Published On : Mon, Nov 14th, 2016

मनोरंजन का साधन बनकर रह जाएगी मेट्रो रेल

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नागपुर टुडे : रोजगार निर्माण के क्षेत्र में वर्त्तमान सरकार को कोई सफलता नहीं हासिल हुई,स्थानीय विद्यार्थी उच्च शिक्षा और नौकरी के लिए अन्य शहर,राज्य और देशों की ओर वर्षो से पलायन कर रहे है.इसे समय रहते रोक नहीं गया तो यह शहर “पेंशनर्स सिटी” के रूप में जाना जाने लगेगा।उक्त विचार एनसीपी के एमएलसी प्रकाश गजभिये ने एक मुलाकात के दौरान की.

शहर में बड़े धूमधाम से मेट्रो रेल के शुरू होने का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है,यह सिर्फ मनोरंजन का साधन बनकर रह जायेगा।इस प्रकल्प में लगने वाली राशि से शहर में स्थित झोपड़पट्टियों का विकास हो सकता था.१५०-२०० साल पुरानी अंग्रेजों के ज़माने के आज भी मुस्तैदी से खड़े सेवाएं दे रहे और शहर में चल रहे मेट्रो रेल के काम में दुर्घटनाओं का दौर शुरू हो गया,यह भविष्य के लिए चिंताजनक है.

शहर में बड़े प्रमाण में झोपड़पट्टियां है.लेकिन आजतक झोपड़पट्टी में रहने वाले किसी को रह रहे क्षेत्र का स्थाई हक्क नहीं दिया गया.इन झोपड़पट्टी के निवासियों को पानी,बिजली और शौचालय जैसी मुलभुत सुविधा जैसे ज्वलंत समस्याओं से जूझ रहे है.इस ओर सिर्फ राजनैतिक घोषणाबाजी की जा रही है.
वही दूसरी ओर शहर में मेट्रो रेल प्रकल्प को साकार करने का क्रम शुरू है,इसमें झोपड़पट्टी में रहने वाले सफर नहीं करेंगे,जब कभी मेट्रो रेल शुरू होंगे तब मध्यमवर्गीय और आर्थिक रूप से उच्च वर्गीय खुद के मनोरंजन हेतु मेट्रो रेल का सफर करते नज़र आएंगे।

मेट्रो प्रकल्प पर किये जाने वाले राशि को शहर के झोपड़पट्टीधारो को सर्व-सुविधायुक्त बनाने जैसी पहल की जाती तो इन झोपड़पट्टियों में रहने वालो को आम जनजीवन में मुख्य धारा में लाया जा सकता था.ये झोपड़पट्टी में रहने वाले वर्षो से अपने परिसर में सर्वांगीण विकास के लिए संघर्ष कर रहे है.इनके लिए अबतक अनेको दफे आंदोलन कर उन्हें तत्काल न्याय दिलवाया,इन्हें स्थाई न्याय की जरुरत है.वर्त्तमान में शहर सिमा अन्तर्गत १० लाख से ऊपर नागरिक झोपड़पट्टी में निवास कर अपना और अपने परिजनों का जीवनयापन कर रहे है.

इन झोपड़पट्टियों में अधिकांश नागरिक रोज कमाने,रोज खाने वालों में से है.इनके लिए सरकार ने इनके सर्वांगीण उत्थान के लिए योजना बनाकर उसके लिए स्वतंत्र आर्थिक प्रावधान करना चाहिए।

पिछले १० वर्षो में उल्लेखनीय विकासकार्य नहीं हुए ,उलट मुलभुत करो में भारी-भरक्कम इजाफा हुआ.इससे आम नागरिक त्रस्त हो चुके है.
गजभिये ने विदर्भ के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा करते हुए कहा कि विदर्भ में विदर्भ में बिजली निर्माण होता है,निर्माण हुए बिजली का ७०% हिस्सा विदर्भ के बाहर महाराष्ट्र के अन्य जिलों में उपयोगार्थ भेजे जाते है,बावजूद इसके अन्य राज्यो की तुलना में महाराष्ट्र का बिजली दर काफी महंगा है.

शहर में रमाई घरकुल योजना शुरू की गई,योजना की शर्ते इतनी सख्त तैयार की गई कि कोई गरीब इस योजना का लाभ नहीं उठा सका.गरीबी मुक्त करने का नारा सतत दिया जाता है,लेकिन इसके लिए ठोस उपाययोजना नहीं किया जाना निंदनीय है.इस मामले में देश की दोनों प्रमुख पार्टियों की नीति एक सरीखे है.

सरकार और सत्ताधारी नए नागपुर निर्माण करने की दृष्टि से प्रयत्न किये जा रहे लेकिन पिछले १० वर्षो में नागपुर में नयापन नज़र नहीं आ रहा.अनाधिकृत ले-आउट में निवास करने वाले नागरिकों से नागपुर सुधार प्रन्यास में विकास शुल्क भरवाया जाता है और प्रशासन इन जमा हो रहे निधि से “मेट्रो रीजन” का विकास कर रही है.आगामी मनपा चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन स्थानीय परिस्थितियों के मद्देनज़र संभव है,फ़िलहाल पार्टी और संगठन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.

– राजीव रंजन कुशवाहा