Published On : Sat, May 21st, 2022
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मैंगनीज खनन प्रभावित ग्रामवासियों के विकास के नाम पर धांधली

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– उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी

नागपूर – महाराष्ट्र सीमा से 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित छिन्दवाडा जिला के सौंसर तहसील अंतर्गत ग्राम पलासपानी कच्छीढाना रामपेठ दमानी और कोपरावाडी परिसर मे स्थित मैंगनीज खदान से प्रभावित हजारों आदिवासियों तथा जन सामान्य नागरिकों को विकास के अभाव में काफी दिक्कतों और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

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तत्संबंध में आल इंडिया सोशल आर्गनाईजेशन ने मध्यप्रदेश शासन तथा केन्द्र सरकार के संबंधित अधिकारियों से जबाव मांगा है कि छिन्दवाडा जिला के सौंसर तहसील अंतर्गत ग्राम पलासपानी कच्छीढाना रामपेठ दमानी और कोपरावाडी परिसर मे स्थित मैंगनीज खदान का परिसर का अवलोकन निरीक्षण और अध्ययन किये बिना वहां पर निजी कंपनी को खनन पट्टा व लीज कैसे मंजूर कर दी गई है.

शिकायत के ज्ञापन मे स्पष्ट किया गया है कि मैंगनीज खनिज प्रभावित ग्रामवासियों की आत्मसुरक्षा के लिए खदान के चहूओर सुरक्षा दीवार क्यों नही बनाई गई ? इसके अलावा वहां ग्रामवासियों के लिए चहूओर पक्की सडक,पेयजलापूर्ति योजना उपलब्ध नहीं करवाने तथा बांध जलाशय भूमि और चारागाह भूमि पर जबरन अतिक्रमण करके वहां अंधाधुंध तरीके भूगर्भ का खनन किया गया है इस प्रकरण के दोषियों पर जिलाधिकारी,उपविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, वन मंडल अधिकारियों तथा पुलिस विभाग ने कार्रवाई क्यों नही की. निजी कंपनी को खनन पट्टा व लीज देने के पूर्व खनन प्रभावित ग्रामवासियों का पुनर्वास क्यों नही करवाया गया. वहां विचरण कर रहे वन्यप्राणियों को अन्यत्र विहंगम वन परिक्षेत्र मे स्थानांतरण किये बिना वन भूमि पर मैंगनीज खनन पर रोक क्यों नही लगाई गई.

इसके अलावा वहां उपलब्ध वहूमूल्य उपजाऊ और इमारती लकडियों के जंगल की ई-निविदा निलामी की घोषणा किये बिना लाखों करोडों की वन संपदा का क्या हुआ. वन व जलवायू परिवर्तन मंत्रालय द्धारा जारी पर्यावरण के नियमों और शर्तों का उलंघन करने वाली मैंगनीज खनन कंपनी प्रबंधन के पदाधिकारी और सदस्यों पर दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई. वन्यप्राणियों तथा मानवीय विनाश के जिम्मेदार खनन कंपनी मेसर्स कृष्णापिंग फेरो अलाएस प्रा लि के पदाधिकारियों और सदस्य संचालकों को क्यों संरक्षण दिया जा रहा.ज्ञापन से जबाव मांगा है कि अंधाधुंध तरीके भूगर्भ का खनन कर लिया गया है जिसका प्रदूषित और जहरीला पानी एक मौसमी नाला के जरिए कन्हान नदी में क्यों छोड़ा गया है.

परिणामतः कन्हान नदी तटवर्तीय ग्रामवासियों को जलवायू प्रदूषण की मार झेलनी पड़ रही हैं इसके जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई कर्मों नहीं की गई.इस संबंध में मध्यप्रदेश शासन तथा केन्द्र सरकार जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्यवाई कर रही है ? इसका भी जवाब अबतक नहीं दिया गया.
नागरिकों को झेलनी पड़ रही हैं बेरोजगारी और प्रदूषण की मार

तत्संबंध में स्वास्थ्य विशेषज्ञों की माने तो अधिक मात्रा मे धातुय खनिज तथा गौड़ खनिज के प्रदूषित और जहरीले कण जन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक बताए जाते है.बताते हैं कि धातुय खनिज के अधिक संपर्क मे आने पर तंत्रा तंत्र और मास्तिस्क सम्बधित रोग उत्पन्न हो सकते है
यहां मैंगनीज खनन प्रभावित ग्राम पलासपानी-कच्छीढाना रामपेठ दमानी कोपरावाडी वासियों को बेरोजगारी तथा भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है। जबकि यहां मैंगनीज अयस्क खनन के कार्यों के लिए बाहरी राज्यों के श्रमिकों को रोजगार दिया जा रहा.

खनन प्रभावित ग्राम का पुनर्वास जरुरी
मैंगनीज खनन प्रभावित ग्रामवासियों को नगर रचना अनुसार अन्यत्र सुविधा जनक स्थान में पुनर्वास की योजना थी l परंतु खनन पट्टा व लीज धारक कंपनी मेसर्सः कृष्णापिंग फेरो अलाएस प्रा लि प्रबंधन के साथ मध्यप्रदेश शासन के संबंधित अधिकारियों की गुप्त मंत्रणा से विकास में देरी हो रही हैं. नतीजतन उपरोक्त खनन प्रभावितों की समस्याओं पर ध्यान न देते हुए अंधाधुंध तरीके भूगर्भ का खनन करके करोड रुपये कीमत का मैंगनीज अयस्क की तस्करी करवा दी गई है ?

समस्या के लिए सरकारी यंत्रणा जिम्मेदार
बताते हैं कि यहां संबंधित अधिकारी गण मैंगनीज खनन पट्टा व लीज धारक निजी कंपनी प्रबंधन के खिलाफ कार्यवाई करने के लिए आगे पीछे सोचना पड़ता है ? नागरिकों की शिकायत के बावजूद भी मध्यप्रदेश शासन के संबंधित अधिकारी दोषी फर्म प्रबंधन के खिलाफ कार्यवाई करने में हिचकते और उनके हांथ कांपने लगते है.

छिंदवाडा के जिला खनिज अधिकारी कार्यालयीन सूत्रों की माने तो सरकारी यंत्रणा को वेतनमान सरकार से मिलता है परंतु संबंधित अधिकारी कार्य खनन माफिया के संरक्षण लिए करते है .बताते हैं कि नीचे से लेकर ऊपर तक खनन माफिया के इशारों पर चलती है l चाहे वन विभाग य राजस्व विभाग के अधिकारी हो। सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा और अवैध उत्खनन की हिफाजत के लिए सरकारी यंत्रणा को जिम्मेदार माना जा रहा है .

उल्लेखनीय यह है कि ग्राम पलासपानी कच्छीढाना रामपेठ दमानी और कोपरावाडी परिसर में स्थित मैंगनीज खदान के विषैला व प्रदेषित जल के‌ प्रकोप की वजह से नदी तटवर्तीय ग्रामवासियों के पालतू जानवरों मवेशियों और वन्यप्राणियों के लिए घातक साबित हो रहा हैl इतना ही नही कन्हान नदी तटवर्तीय ग्रामवासियों के निजी और सरकारी कुंओं तथा हैन्डपंप प्रदूषित जल उगल रहे हैं.

हालकि मैंगनीज खदान खनन पट्टा व लीज धारक कंपनी प्रबंधन का कहना है कि वहां खदान परिसर में प्रदूषित जल शुद्धीकरण केन्द्र (ETP) का निर्माण की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश शासन की है। कंपनी की नहीं ? कंपनी प्रबंधन का कहना है कि मध्यप्रदेश शासन के ततसंबंधित विभाग के संबंधित अधिकारियों को मांगोनुरुप निधी भुगतान किया जा चुका है। मैंगनीज खनन पट्टा धारक कंपनी मेसर्स कृष्णापिंग फेरो अलाएस प्रा लि प्रबंधन का मानना है कि मैंगनीज खनन प्रभावित ग्राम:पलासपानी-कच्छीढाना,रामपेठ दमानी कोपरावाडी का पुनर्वास,दबाखाना,खेल मैदान,स्कूल, मंदिर,मस्जिद, बुद्ध विहार, पेयजलापूर्ति योजना कार्यान्वित करना यह सभी मध्यप्रदेश शासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि मैंगनीज खनन कंपनी मेसर्स कृष्णापिंग फेरो अलाएस प्रा लि यह व्यावसायी फर्म है।

नागरिकों के तर्कसंगत आरोप के मुताबिक मैंगनीज खनन कंपनी मेसर्सः कृष्णापिंग फेरो अलाएस प्रा लि के प्रबंध निदेशक संजीव खंडेलवाल और आयरिश खंडेलवाल का मानना है कि यहां मैंगनीज खनन करने का हमने परमिट लिया है ? जल शुद्धीकरण केन्द्र उपलब्ध करवाना और पुनर्वास ये हमारा काम नहीं है ? यह कार्य तो मध्यप्रदेश शासन ने करके देना चाहिए ?
आल इंडिया सोसल आर्गनायजेशन ने मामले की केन्द्र सरकार तथा मध्यप्रदेश शासन के संबंधित अधिकारियों को सविस्तर शिकायत प्रस्तुत की गई है l
इस प्रकरण को लेकर आल इंडिया सोशल आर्गनाईजेशन की तरफ से उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी शुरु कर दी गई है ?

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