| | Contact: 8407908145 |
    Published On : Thu, Mar 9th, 2017

    राज्यपाल ने सरसंघचालक को ‘डॉक्टरेट’ की मानद उपाधि प्रदान की


    नागपुर:
    सच कर्तव्य की तरह बोलने और हमेशा माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करने की सलाह महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने माफसु के आठवें दीक्षांत उपरांत समारोह को संबोधित करते हुए विद्यार्थियों को दी। सिविल लाइन्स स्थित डॉ. वसंतराव देशपांडे सभागार में आयोजित इस दीक्षांत समारोह में राज्य के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, पशुसंवर्धन एवं दुग्ध विकास मंत्री महादेव जानकर तथा पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले प्रमुखता से उपस्थित थे। इस दीक्षांत समारोह का सबसे उल्लेखनीय क्षण वह रहा जब राज्यपाल ने सरसंघचालक को मानद डॉक्टरेट की उपाधि ‘डीएससी’ यानी डॉक्टर ऑफ साइंस से नवाजा।

    इस दौरान मौजूद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विद्यार्थियों को मार्गदर्शन करते हुए कहा की जीवन में विचारों की दिशा निश्चित करने का कार्य विद्यापीठ ही करता है। मोहन भागवत को डॉक्टर ऑफ़ साइंस की मानद पदवी देने के लिए उन्होंने विद्यापीठ का अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भागवत इन्हें यह सम्मान देकर विद्यापीठ की प्रतिष्ठा का मान बढ़ा है। समाज और देश का गठन करनेवाले दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संघटन के भागवत प्रमुख हैं। विद्यार्थियों को मार्गदर्शन करते हुए उन्होंने कहा कि पदवी प्राप्त करके सभी आज मानव संसाधन में सहभागी हुए। भारत देश युवाओं का देश है। देश की जनसंख्या के आधार पर 50 प्रतिशत जनसंख्या यह 25 साल से कम की है। उन्होंने बताया की 2020 और 2035 तक हमें मानव संसाधन के माध्यम से सही अर्थों में देश को प्रगति करना है। पर्यावरण और पशुधन की हानि को रोकने के लिए भी युवाओं को आगे का आव्हान भी उन्होंने किया।

    समारोह में उपस्थित सरसंघचालक डॉ.मोहन भागवत ने डॉक्टर ऑफ़ साइंस की पदवी देने के लिए विद्यापीठ के प्रति कृतृज्ञता व्यक्त की। उन्होंने विद्यार्थियों को मार्गदर्शन करते हुए कहा कि कृषि व पशुपालन आज जैसा है वैसा उनके समय नहीं था। आज इसकी प्रतिष्ठा बढ़ी है। विद्यार्थियों को पसंद आए ऐसे शोध प्रबंध विद्यार्थियों की ओर से किए जाने चाहिए। जो बोल नहीं सकते और मारते है ऐसे घटको को प्रेम से ठीक करना यह विद्यार्थियों का कर्त्तव्य है। यह कार्य निरंतर करने की बात भी विद्यार्थियों से कही। विद्यार्थियों को नए नए शोध करने का आव्हान भी उन्होंने इस दौरान किया।


    इस समारोह में 2014 -15 साथ ही 2015 -16 शैक्षणिक सत्र के लिए महाराष्ट्र पशु व मत्स्य विज्ञानं विद्यापीठ के द्वारा 58 पदक प्रदान किए गए है। इसमें 42 स्वर्ण और 16 रजत पदक का समावेश है। इस दौरान दीक्षांत भाषण में डॉ त्रिलोचन मोहपात्रा ने कहा कि माफसु विद्यापीठ को अधिस्वीकृत दर्जा मिला है। देश के 73 विद्यापीठ में से माफसु यह गुणवत्ता व आधुनिक शिक्षा देनेवाला संस्थान है। उन्होंने बताया की माफसु विद्यापीठ को इस साल 3 करोड़ तो अगले वर्ष 5 करोड़ रुपए उपलब्ध कराकर दिए जाएंगे।


    कार्यक्रम का प्रस्ताविक कुलगुरु ए.के.मिश्रा ने किया। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया की विद्यापीठ की सभी शाखाओं की प्रवेश प्रक्रिया ऑनलाइन की गई है। विद्यापीठ के विभिन्न महाविद्यालय में 21 शोध प्रबंध चल रहे हैं साथ ही इसके विद्यापीठ की शुरुवात होने के बाद से अब तक 130 संशोधन पूरे किए गए है। इस समारोह में डॉ. शिरीष उपाध्य , डॉ.सुनीत वानखेड़े भी मौजूद थे।

    Stay Updated : Download Our App
    Mo. 8407908145