Published On : Sat, Sep 17th, 2016

एनवीसीसी ने कर में बढ़ोत्तरी का किया विरोध

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नागपुर: राज्य सरकार ने 17 तारीख की मध्यरात्रि से वैट में बढ़ोत्तरी कर दी। सरकार का यह फैसला शनिवार से लागू भी हो चुका है। आनन-फानन में सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले से व्यापारी वर्ग सकते और अब खुलकर इस फैसले के विरोध में खड़े हो गए है। नाग विदर्भ चेम्बर ऑफ़ कॉमर्स ने इस फैसले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। एनवीसीसी ने सरकार के इस फैसले के विरोध में आंदोलन की चेतावनी भी दी है। एनवीसीसी पदाधिकारियो ने शनिवार को पत्र परिषद लेकर इस फैसले पर विरोध जताते हुए तत्काल इसे वापस लेने की माँग की है।

संस्था के सचिव जयप्रकाश पारेख ने इस फैसले को सरकार का व्यापारियों पर एक तरह का अन्याय बताया। उनके मुताबिक इस फैसले से महँगाई से पहले ही जूझ रहे आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ जाएगी। एनवीसीसी का कहना है कि किसी भी प्रकार के कर को बढ़ाने से पहले सरकार हमेशा व्यापारी संगठन और प्रतिनधियों को भरोसे में लेती है पर यह फैसला अचानक ही लिया गया। बाजार में भीषण मंदी का दौर शुरू होने के बावजूद व्यापारी वर्ग ईमानदारी से टैक्स का भुगतान कर रहा है। राज्य सरकार ने 6 महीने पहले ही बजट के माध्यम से 0.5 फीसदी वैट बढ़ाया था। जिसका एलबीटी की वजह से सरकार होने वाले नुकसान की भरपाई के तौर पर स्वीकार किया गया। पर इतनी जल्दी सरकार द्वारा यह कदम उठाया जाना व्यापारियों के साथ धोखा है। यह फैसला बताता है कि सबका साथ सबका विकास चाहने वाली सरकार व्यापारियों का विकास नहीं चाहती। जीएसटी बिल आगामी वित्त वर्ष से लागू ही होने वाला है ऐसे में इस बढ़ोत्तरी का औचित्य ही नहीं बनाता।

व्यापर तिमाही, छमाही और वार्षिक कर भुगतान की व्यवस्था से चलता है। अब वर्ष के बीच में इस फैसले की वजह से छोटे और माध्यम वर्ग के व्यापारियों को अपने खातों में बदलाव करेगा जिसका आर्थिक बोझ बढ़ेगा। इस फैसले का त्यौहार के मौसम में सबसे ज्यादा असर आम आदमी पर पड़ेगा। इसलिये सरकार अपना फैसला वापस ले।

व्यापारियों ने सरकार की इस दलील को भी सिरे से ख़ारिज कर दिया है जिसमे उसने सरकारी योजनाओं के लिए धन जुटाने के लिए यह फैसला लेने की बात कही है। एनवीसीसी के मुताबिक इस फैसले से सरकार राजस्व के ढाई हजार करोड़ की बढ़ोत्तरी की बात कह रही है। इसमें कोई शक नहीं है राजस्व बढ़ेगा पर 2005 से लेकर 2016 तक के सिर्फ सेल टैक्स से रेविन्यू प्राप्ति के आकड़े देखे को इसमें 300 फीसदी से भी ज्यादा हुआ है। वित्तीय वर्ष 2005-6 में 22646.48 करोड़ रूपए प्राप्त हुए जबकि 2015-16 में यह अकड़ा 79124.29 करोड़ तक पहुँच गया। कल के फैसले से न्यूनतम कर को साढ़े पांच फीसदी बढाकर 6 फीसदी जबकि वैट कर को 12.5% से बढाकर 13.5 फीसदी किया गया है इसका विरोध है और इस फैसले के खिलाफ व्यापारी फिर एक बार सरकार के खिलाफ आंदोलन करने के लिए विवश हो चुका है।