Published On : Mon, May 7th, 2018

उर्दू भाषा के साथ महाराष्ट्र सरकार कर रही है भेदभाव

Advertisement

मुंबई : महाराष्ट्र में उर्दू भवन की निर्मिति की मांग को ध्यान में रखते हुए महारष्ट्र सरकार ने करीब 50 करोड़ की लागत से मुंबई में उर्दू भवन बनाने का ऐलान किया। लेकिन इस भवन की निर्मिति के लिए राज्य सरकार ने मुंबई के भायखला इलाके में जगह को मंजूरी दी। इसके बाद से ही कई मुस्लिम संगठनों ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है।

बता दे कि, मुंबई के कलीना इलाके में स्थित मुंबई विश्वविद्यालय के कैम्पस में ही सभी भाषाओं की इमारतें मौजूद हैं लेकिन सरकार ने उर्दू भवन के इमारत को इसी कैम्पस में बनाने के बजाय इसे विश्वविद्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर भायखला इलाके में बनाने का ऐलान किया है। सरकार के इसी फैसले से नाराज़ मुस्लिम संगठनों ने सरकार को चिट्ठी लिख इमारत को मुंबई विश्वविद्यालय में ही बनाने की मांग की है।

Gold Rate
13 Jan 2026
Gold 24 KT ₹ 1,41,000/-
Gold 22 KT ₹ 1,31,100 /-
Silver/Kg ₹ 2,64,000/-
Platinum ₹ 60,000/-
Recommended rate for Nagpur sarafa Making charges minimum 13% and above

जय हो फाउंडेशन के अध्यक्ष अफ़रोज़ मलिक ने सरकार को लिखी चिट्ठी में कहा है कि विश्वविद्यालय के कलीना कैम्पस में उर्दू भवन के निर्माण के लिए जमीन भी उपलब्ध है और इसका निर्माण भी वहीं होना चाहिए जहां दूसरी सभी भाषाओं की इमारतें मौजूद हैं। अफ़रोज़ मलिक ने सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि, “भायखला इलाके में उर्दू भवन का निर्माण करने का ऐलान कर सरकार इस भाषा से भेदभाव कर रही है।

यह पहली बार नहीं है जब महाराष्ट्र की शिक्षा विभाग विवादों में रहा हो। इससे पहले भी इतिहास की किताबों में से मुगल बादशाहों की जानकारी को कम करने के कारण और डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर, महात्मा फुले से ज़्यादा पैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किताबों पर खर्च करने के कारण भी शिक्षा विभाग पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

GET YOUR OWN WEBSITE
FOR ₹9,999
Domain & Hosting FREE for 1 Year
No Hidden Charges
Advertisement
Advertisement