Published On : Wed, May 9th, 2018

महाराष्ट्र: सरकारी कामकाज में बंद होगा अंग्रेजी का इस्तेमाल, मराठी भाषा होगी सख्‍ती से लागू

Advertisement

Mantralaya

मुंबई: आने वाले दिनों में महाराष्ट्र के सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों को अंग्रेजी का इस्तेमाल बंद करना होगा। महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी कामकाज में मराठी को सख्ती से लागू करने का फैसला किया है। इसके लिए जारी किए गए सरकार के शासनादेश (जीआर) में कार्यालयीन कामकाज में सिर्फ मराठी का इस्तेमाल करने की हिदायत दी गई है।

गौर करने वाली बात यह है कि मराठी भाषा में काम न करने वाले बाबुओं पर नजर रखने के लिए सरकार ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) की शैली में ‘मराठी भाषा दक्षता अधिकारी’ की नियुक्ति करने का भी फैसला किया है।

Advertisement

बाबुओं के लिए शर्तें:

Advertisement
Advertisement

1. सरकारी योजनाओं की जानकारी जन सामान्य को देने और उनके बारे में दूरभाष पर चर्चा करते समय सभी संबंधित सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मराठी भाषा का उपयोग करना अनिवार्य होगा।

2. वरिष्ठ अधिकारियों को किसी सभा या बैठक में भाषण करते समय अपनी बात मराठी में रखना जरूरी होगा।

3. मंत्रिमंडल की बैठक और वरिष्ठ स्तर पर होने वाली समकक्ष बैठकों में अधिकारियों के तमाम प्रस्तुतिकरण (प्रजेंटेशन) प्रमुखता से मराठी में होना अनिवार्य।

4. मंत्रालय के विभिन्न विभागों और उनके नियंत्रण में आने वाले विभागों और अन्य कार्यालयों द्वारा जनता से होने वाला पत्र व्यवहार और सरकारी कामकाज मराठी भाषा में किया जाना अनिवार्य।

…तो रुकेगी पदोन्नति
जो अधिकारी या कर्मचारी सरकारी कामकाज की भाषा के रूप में मराठी का इस्तेमाल नहीं करेगा, उसके लिए सरकार ने सख्त सजा का प्रावधान किया है। ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की एक पदोन्नति और एक वेतन वृद्धि रोक दी जाएगी। इसीलिए अब हर अधिकारी को फाइलों पर मराठी में ही टिप्पणी लिखनी होगी।

मंत्रियों पर भी लागू
मंत्रालयों के विभिन्न विभागों में मंत्रियों और सचिवों जैसे वरिष्ठ स्तर पर लिखी जाने वाली टिप्पणियां और आदेश अनिवार्य रूप से मराठी भाषा में होने चाहिए। मंत्रियों और राज्य मंत्रियों से आग्रह किया गया है कि वे अपने पास आने वाली हर फाइल और प्रकरण को मराठी में प्रस्तुत करें।

और किनके लिए
सरकार का यह फैसला सभी सरकारी विभागों, उनके अंतर्गत आने वाले संचालनालयों, महामंडलों, सरकारी उपक्रमों और उनके द्वारा आयोजित होने वाले सभी समारोहों के निमंत्रण पत्रों, सूचनाओं और विज्ञापनों पर लागू होगा।

जरूरी हो, तो…
हालांकि सरकार ने यह भी आदेश दिया है कि जहां बहुत ज्यादा जरूरी हो, वहां समारोहों के निमंत्रण पत्र मराठी और अंग्रेजी- दोनों भाषाओं में छापे जाएं।

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
 

Advertisement