
गोंदिया: महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए राज्य के कृषि इतिहास का सबसे बड़ा राहत पैकेज घोषित किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में राज्य के 56 लाख किसानों के लिए 36,585 करोड़ रुपये की फसल कर्जमाफी और 48,000 करोड़ रुपये के बकाया कृषि बिजली बिल की पूर्ण माफी का ऐलान किया गया है।
गोंदिया में आयोजित पत्रकार परिषद में पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ. परिणय फुके ने इस फैसले को “बलिराजा के आर्थिक पुनरुत्थान की दिशा में ऐतिहासिक कदम” बताते हुए कहा कि सरकार किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार ठोस निर्णय ले रही है।
कर्जमाफी और मुफ्त बिजली की बड़ी घोषणाएं
डॉ. फुके ने बताया कि ‘पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर शेतकरी कर्ज मुक्ति योजना’ के तहत पहले निर्धारित 50 हजार रुपये की सीमा समाप्त कर अब 2 लाख रुपये तक का कृषि ऋण पूरी तरह माफ किया जाएगा।
इसके अलावा 7.5 हॉर्स पावर तक के कृषि पंपों पर किसानों को अब बिजली बिल नहीं देना होगा। राज्य सरकार किसानों के 48 हजार करोड़ रुपये के बकाया बिजली बिल का पूरा भार स्वयं उठाएगी। वहीं महावितरण को वित्तीय संकट से उबारने के लिए सरकार 32,679 करोड़ रुपये का कर्ज भी अपने ऊपर लेगी।
उन्होंने बताया कि ‘सौर कृषि वाहिनी’ योजना के तहत वर्तमान में 76 प्रतिशत किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध हो रही है, जिसे वर्ष के अंत तक 100 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
सूखा मुक्त महाराष्ट्र के लिए 6 लाख करोड़ का मास्टर प्लान
डॉ. फुके ने बताया कि राज्य के सूखा प्रभावित क्षेत्रों को स्थायी राहत देने के लिए 6 लाख करोड़ रुपये की ‘रिवर लिंकिंग’ परियोजना तैयार की गई है। इसके तहत विदर्भ और मराठवाड़ा में हर वर्ष 475 टीएमसी अतिरिक्त पानी पहुंचाया जाएगा।
योजना के अंतर्गत 24 नए बांधों का निर्माण और 16 पुराने बांधों की ऊंचाई बढ़ाई जाएगी, जिससे सिंचाई क्षमता में बड़ा विस्तार होगा।
उन्होंने बताया कि किसानों से खरीदी गई फसलों का भुगतान भी तेजी से किया जा रहा है। सरकार ने कपास खरीदी के लिए 10,883 करोड़ रुपये तथा प्याज खरीदी के लिए 3,198 करोड़ रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा किए हैं।
नागपुर टुडे के सवालों पर डॉ. फुके के जवाब
पत्रकार वार्ता के दौरान नागपुर टुडे द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में डॉ. फुके ने कहा कि नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों को दिए जा रहे 50 हजार रुपये के प्रोत्साहन को अन्याय नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि कर्जमाफी का उद्देश्य उन किसानों को राहत देना है जो विपरीत परिस्थितियों में ऋण चुकाने में असमर्थ रहे, जबकि समय पर भुगतान करने वालों को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
7.5 एचपी बिजली बिल माफी के लाभ पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सुविधा संयुक्त सिंचाई अथवा सामूहिक खेती करने वाले किसानों पर लागू नहीं होगी।
पृथक विदर्भ पर क्या बोले?
विदर्भ राज्य आंदोलन के सवाल पर डॉ. फुके ने कहा कि वह अखंड महाराष्ट्र के समर्थक हैं। उनके अनुसार विदर्भ का विकास महाराष्ट्र के साथ मिलकर ही संभव है। उन्होंने गढ़चिरौली के स्टील उद्योग, अमरावती के टेक्सटाइल पार्क, चंद्रपुर के औद्योगिक विकास, समृद्धि महामार्ग और सिंचाई परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं से विदर्भ का विकास तेज हुआ है।
NEET विवाद पर प्रतिक्रिया
NEET परीक्षा को लेकर पूछे गए सवाल पर डॉ. फुके ने कहा कि परीक्षा में हुई त्रुटि के बाद दोबारा परीक्षा आयोजित कर परिणाम घोषित कर दिए गए, इसलिए अब यह मुद्दा समाप्त हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के दौरान कई बार पेपर लीक हुए थे, जबकि शिक्षा व्यवस्था में सुधार एनडीए सरकार ने किए हैं।
उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे फर्जी और भ्रामक सूचनाओं से बचें तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें।
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