Published On : Wed, Sep 8th, 2021

आइए जानें मिट्टी की गणेश प्रतिमा बनाने की प्रक्रिया!

-मनपा-वुई सेवन केअर फाऊंडेशन की ऑनलाईन कार्यशाला

नागपुर: राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए आदेशानुसार इस वर्ष नागपुर शहर में पीओपी मूर्तियों की खरीदारी-बिक्री पर रोक लगा दिया गया है। नागपुर महानगरपालिका और वुई सेवन केयर फाउंडेशन द्वारा मिटटी से गणेश प्रतिमा बनाने की प्रक्रिया सीखाने के एक ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया।

वूई सेवन केयर फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में जया गुप्ता ने श्रीगणेश की मिट्टी की मूर्ति बनाने का प्रशिक्षण दिया। मेलघाट के एक छोटे से गांव में जन्मी जया गुप्ता ने कड़ी मेहनत कर अपनी शिक्षा पूरी की। पर्यावरण की दृष्टि से शादु माटी के महत्त्व को समझाते हुए उन्होंने अब तक लगभग पांच हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को शादु माटी की गणेश प्रतिमाएं बनाने का प्रशिक्षण दिया है।

इस कार्य के लिए उन्हें विदर्भ भूषण, वुमेन्स अचीवर्स, वुमन भास्कर, सन क्वीन, नेशनल प्राइड आदि पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उन्होंने बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर मूर्तियां बनाने की प्रक्रिया को समझाया। उन्होंने कहा कि शादु माटी किसी भी हार्डवेयर स्टोर में उपलब्ध होता है और आम तौर पर गणेश मूर्ति बनाने में कम से कम तीन किलो मिट्टी लगती है। उन्होंने बताया कि गणेश की पूरी मूर्ति तैयार होने के दो दिन बाद उसकी रंगाई की जा सकती है। मिट्टी के गणेश की मूर्ति को घर में पानी में विसर्जित किया जा सकता है। यह पूरी तरह से पानी में घुल जाता है। बाद में उसी मिट्टी का उपयोग कर दिवाली या अगली बार गणेश मूर्ति बनाने के लिए इस मिटटी का उपयोग किया जा सकता है, उन्होंने कहा।

इस कार्यशाला में वूई सेवन की कोर कमेटी की सदस्या स्मिता भार्गव ने सवाल पूछे और शादु माटी गणेश मूर्ति बनाने की विधि सीखी। इसके बाद महापौर दयाशंकर तिवारी ने भगवान गणेश की मूर्तियों का निरीक्षण किया और नागरिकों से भगवान गणेश की मिट्टी से बनी मूर्तियां खुद बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि शादु माटी से बनी गणेशमूर्ति पर्यावरण के दृष्टि से बहुत ही इको-फ्रेंडली है। प्लास्टर ऑफ पेरिस पानी में नहीं घुलता है। सीमेंट को सख्त करने के लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस का उपयोग किया जाता है। मनपा ने जिन तालाबों में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन पर प्रतिबंध लगाया है, उनके पानी की गुणवत्ता में सुधार आया है। यह प्लास्टर ऑफ पेरिस के पर्यावरणीय खतरों को दर्शाता है। सरकार ने पीओपी मूर्तियों पर प्रतिबंध लगाने का कानून पारित किया है। नागपुर महानगरपालिका ने कुछ साल पहले यह फैसला लिया था। नागरिकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है।

उन्होंने लोगों से जागरूक होने और पर्यावरण के लिए अनुकूल मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं का इस्तेमाल करने और घर में विसर्जित करने की अपील की। इस अवसर पर फाउंडेशन की संस्थापक नीरजा पठानिया, सदस्या रूपा अग्रवाल, रीमा सियाल आदि ने फेसबुक लाइव पर आयोजित इस ऑनलाइन वर्कशॉप में हिस्सा लिया।