हजारों श्रद्धालु- सैकड़ों दीप… धार्मिक आस्था के साथ सम्मान और समानता का संदेश
सावन का पावन महीना और गोंदिया के मोक्षधाम के महाकालेश्वर मंदिर में कुछ ऐसा हुआ, जिसने भक्ति, परंपरा और सामाजिक समानता की एक नई और ऐतिहासिक इबारत लिख दी। जब ढोल-नगाड़ों की थाप पर किन्नर समाज ने भगवान महाकाल के सामने अपनी आस्था का समर्पण किया, तो देखने वाले बस देखते ही रह गए।
जब श्मशान परिसर बन गया देवलोक
17 अगस्त सुबह की शुरुआत हुई वैदिक मंत्रोच्चार और महाकाल के अलौकिक श्रृंगार के साथ। ‘जय श्री महाकाल सेवा संस्थान’ के अध्यक्ष लोकेश (कल्लू) यादव की पहल पर मंदिर परिसर को दुल्हन की तरह सजाया गया।किन्नर समाज की प्रमुख निशा मौसी अपनी 14 सदस्यीय टोली के साथ पहुंचीं और विधि-विधान से रुद्राभिषेक कर अपनी सुरीली आवाज में भजनों का ऐसा समां बांधा कि हर कोई भक्ति रस में गोते लगाने लगा।
सड़क पर उतरी शिव बारात , नंदी पर सवार भोलेनाथ
शाम ढलते ही मोक्षधाम परिसर में निकाली गई एक ऐतिहासिक ‘शिव बारात’। एक तरफ नंदी पर सवार भगवान शिव, दूसरी तरफ राधा-कृष्ण और मां काली के रौद्र रूप का मंचन… और बीच में रोंगटे खड़े कर देने वाला भूत-पिशाचों का तांडव और थिरकते श्रद्धालु ,
ढोल-नगाड़ों की गूंज पर किन्नर समाज की इस भावविभोर नृत्य प्रस्तुति ने माहौल में ऐसा जोश भरा कि हर श्रद्धालु ‘बम-बम भोले’ के रंग में रंग गया।
हजारों दीपों की महाआरती ,वीआईपी जमावड़ा
सैकड़ों जलते दीयों की जगमगाहट और हजारों श्रद्धालुओं के जयघोष के बीच संपन्न हुई महाआरती के इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने कई प्रमुख गणमान्य जिनमें राज्यसभा सांसद राजेंद्र जैन ,नगराध्यक्ष सचिन शेंडे ,नगर परिषद मुख्य अधिकारी संदीप बोरकर, शहर थाना प्रभारी बुरकुटे, पूर्व सिटी थाना इंचार्ज किशोर पर्वते ,भाजयुमो जिला अध्यक्ष रोहित अग्रवाल, मोक्षधाम सेवा समिति के प्रमुख देवेश मिश्रा , जिला मजदूर संघ अध्यक्ष सचिन बंटी मिश्रा, दामिनी संगठन की मैथिली पुरोहित, पूर्व नगरसेविका भावना कदम ने सामाजिक समरसता की मिसाल बने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
महाकाल को चाहिए सिर्फ सच्ची भक्ति
यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज के उस वर्ग को मुख्यधारा में गले लगाने का क्रांतिकारी संदेश था, जिसे अक्सर हाशिए पर रखा जाता है।महाकाल सेवा संस्थान के अध्यक्ष लोकेश कल्लू यादव , महिला सेवा समिति अध्यक्षा स्वाती लोकेश यादव, मार्गदर्शक पंकज मिश्रा की मौजूदगी में महाप्रसाद वितरण के साथ इस भव्य उत्सव का समापन हुआ।गोंदिया ने साबित कर दिया कि भोलेनाथ के दरबार में कोई भेद नहीं-महाकाल सिर्फ और सिर्फ सच्ची भक्ति के भूखे हैं।
रवि आर्य





