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    Published On : Thu, Feb 20th, 2020

    सत्तापक्ष-मनपायुक्त की जुगलबंदी में ‘कैफो’ आऊट 

    कांग्रेस नगरसेवक हरीश ग्वालवंशी आयुक्त से कहा तुकाराम नामक जगप्रसिध्द संत हैं,ग्वालवंशी ने विश्वास जताया कि आयुक्त तुकाराम संत तुकाराम का नाम मलिन होने नहीं देंगे।

    नागपुर: मनपा में सत्तापक्ष इनदिनों चाहे विशेष सभा हो या फिर आमसभा लंबी चर्चासत्र का संचलन कर रही,जबकि पूर्व आयुक्तों के कार्यकाल में बहुमत के आधार पर चटपट सभागृह की कार्यवाही बहुमत के आधार पर निपटा दी जाती थी.नए आयुक्त तुकाराम मुंढे के कार्यशैली से कमकस में दिख रही सत्तापक्ष आयुक्त को ‘एमएमसी एक्ट’ के तहत लपेटे में लेने की पिछले दो सभा से जीतोड़ कोशिश कर रही.इस क्रम में आज आमसभा में सत्तापक्ष और आयुक्त के मध्य रोचक जुगलबंदी देखी गई.जिसका मजा विपक्ष के नगरसेवक हरीश ग्वालवंशी ने लेते हुए आयुक्त से गुजारिश की कि उनका नाम तुकाराम हैं,तुकाराम महान संत हुए,उन्हीं की भांति कार्यशैली अपनाए और संत तुकाराम का नाम न ख़राब होने दें.

    उल्लेखनीय यह हैं कि आर्थिक शिष्टाचार पहाड़ा पढ़ चालू वर्ष का विकास कार्य रोकने वाले आयुक्त को प्रवीण दटके और दयाशंकर तिवारी ने उन्हीं की चाल में लपेट औंधे मुँह गिरा दिया।क्यूंकि पिछली सभा में आयुक्त को १२ साल का हिसाब इस सभा में गया था.लेकिन आयुक्त एक वर्ष का लेखाजोखा देकर वर्त्तमान और आने वाले वर्ष पर डंडा चलाने के फ़िराक में थे कि दया-दटके के झटके के कारण महापौर जोशी ने उक्त वर्षो का लेखाजोखा ३० दिन के भीतर देने और तब तक कार्यादेश हुए सभी विकासकार्यों को शुरू करने के आदेश दिए.

    ५ अपराध शाखा,१० एनडीएस व १ शहर पुलिस कर्मी के साए में आयुक्त
    आयुक्त मुंढे मनपा के नगरसेवकों से इतने भवभीत चल रहे कि उनसे जब जब एक से ज्यादा नगरसेवक उनसे मिलने या आमना-सामना होने की नौबत आयुक्त के सामने आई तो वे सुरक्षा के घेरे में चले जाते हैं.गत दिनों विशेष सभा के दौरान नगर भवन के बाहर तगड़ी पुलिस बंदोबस्त,आयुक्त से मिलने जब सत्तापक्ष के सैकड़ों नगरसेवकों का हुजूम मिलने पहुंचा तो अंदर-बाहर पुलिस बंदोबस्त चर्चे का विषय रही.और तो और आज आमसभा में आयुक्त नगर भवन पहुंचने से पहले कई दर्जन शहर पुलिस,डेढ़ दर्जन एनडीएस पुलिस आयुक्त के आवाजाही मार्ग पर तैनात दिखे।इसके अलावा सफ़ेद वेशभूषा में पुलिस अपराध शाखा के ५ कर्मी सभागृह परिसर में महापौर कक्ष के बाहर आयुक्त के पीछे तैनात दिखें।इतना ही नहीं मनपा के बजट सत्र में सभागृह के भीतर कार्यवाही की शूटिंग की अनुमति होती थी,आज यह आमसभा में व्यवस्था की जानी भी आयुक्त के भय का हिस्सा कहा जा रहा.

    प्रभारी कैफो मोना ठाकुर को लौटाया
    आज मनपा की आमसभा में आयुक्त मुंढे और सत्तापक्ष के मध्य कानून रूपी शर्तों के आधार पर सत्तापक्ष ने आयुक्त को आड़े हाथ लिया तो आयुक्त ने हाजिर जवाब देते हुए अपना बचाव करते रहे.इस चक्कर में आर्थिक शिष्टाचार के चर्चा दौरान एक तरह से आयुक्त में आयुक्त का रिवाइज बजट पेश कर दिया।जब इसके उपरांत सत्तापक्ष ने आयुक्त से पूर्व में महापौर द्वारा दिए गए निर्देशानुसार पिछले १२ वर्षों का ‘कैरी फॉरवर्ड’ राशि की जानकारी मांगी तो आयुक्त सिरे से देने में मुकर गए और इसे देने के लिए ३० दिन का कम से कम समय माँगा।इस चक्कर में पिछले दिनों कैफो के रिक्त पद पर प्रभार संभालने पहुंची मोना ठाकुर को सभागृह ने एकमत से बलि लेकर सरकार को लौटा दिया। इस निर्णय में मोना ठाकुर और मनपा के ठेकेदारों में ख़ुशी की लहर आग की तरह फ़ैल गई.ठाकुर पहले भी मनपा में कैफो की भूमिका निभा चुकी हैं,लेकिन मनपा का उनका पिछला अनुभव बेहद ख़राब होने से इस दफे भी मनपा में ‘ज्वाइन’ नहीं होना चाहती थी,सिर्फ आयुक्त मुंढे के जिद्द पर ठाकुर ने ‘कैफो’ की जिम्मेदारी संभाली।

    उपमहापौर से बढ़िया आयुक्त का चेयर
    मनपा आमसभा अर्थात सभागृह में सबसे बड़ा महापौर फिर उपमहापौर और फिर सत्तापक्ष नेता व विपक्षनेता का होता हैं इसके बाद आयुक्त का दर्जा होता हैं.क्यूंकि सभागृह सिर्फ निर्देश देती और उसका पालन करने और न करने का पूर्ण अधिकार आयुक्त का होता हैं,इसलिए आयुक्त भी मनपा के हिसाब से वजनदार अहोदेदार पद हैं.मनपा परंपरा के हिसाब से दूसरे क्रमांक का पद उपमहापौर का होता हैं,इसके बावजूद आयुक्त मुंढे के निर्देश पर पुराना और हल्के स्तर की कुर्सी उपमहापौर के लिए रखी गई और नई-नवेली कुर्सी आयुक्त के लिए सभागृह में रखी गई,यह भी नगरसेवकों के मध्य चर्चा का विषय रहा.

    जनसंपर्क विभाग मामले में अतिरिक्त आयुक्त रिपोर्ट सौंपे
    कांग्रेस के नगरसेवक संदीप सहारे ने निजी जनसंपर्क एजेंसी के कामकाज और उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए।इसके साथ ही जनसंपर्क विभाग के अस्तित्व और उसका प्रभार संभालने वाले की महत्ता पर भी सवाल दागे।लेकिन प्रशासन समाधानकारक जवाब नहीं दे पाया।इसी बीच भाजपा के वरिष्ठ नगरसेवक सुनील अग्रवाल आदतानुसार बीच में अकारण कूदने की कोशिश की.मामले की नजाकत को देखते हुए महापौर संदीप जोशी ने अतिरिक्त आयुक्त को मामले की समीक्षा कर रिपोर्ट सभागृह में सौपने का निर्देश दिया।

    सीमेंट सड़क निर्माण में भारी धांधलियां का आरोप
    भाजपा के निष्काषित नगरसेवक सतीश होले ने सीमेंट सड़क के तीनों फेज के निर्माणकार्य,ठेकेदार कंपनी के कारनामों को तकनिकी रूप से सार्वजानिक किया।उन्होंने आरोप लगाया कि रोड निर्माण में न ही क्वालिटी, सीबीआर टेस्ट और ट्राफिक डेन्सिटी टेस्ट किया गया है. सवाल उठाया कि क्या मनपा के पास मनमाना पैसा है. फिर किस आधार पर गलियों को 1 फुट मोटा बनाने का खर्च किया जा रहा है. उनके सवालों का बांधकाम विभाग के अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाये. वहीं विपक्ष के नेता तानाजी वनवे ने सीमेन्ट रोड निर्माण का ठेका जिन 3 कंपनियों को दिया गया उनकी वैधानिकता पर सवाल उठाया. दोनों ही पार्षदों का पक्ष सुनकर मेयर संदीप जोशी ने अधीक्षक को पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया. वहीं दोषी पर कार्रवाई का आदेश भी दिया.

    होले ने कहा कि ट्राफिक डेन्सिटी नाप कर सड़क की मोटाई-चौड़ाई आदि निर्धारित की जाती है. रोड कांग्रेस ने क्या कोई गाइडलाइन दी है. अधिकारी का कहना था कि वीएनआईटी की गाइडलाइन के अनुसार डामर व सीमेंट रोड का थिकनेस, कैमरा लगाकर ट्राफिक डेन्सिटी देखी गई. होले ने कहा कि किसी भी फाइल में टेस्ट रिपोर्ट और फ्लाईऐश कितना उपयोग किया गया, इसका उल्लेख भी नहीं है. नेशनल हाईवे ने लिबर्टी से पागलखाना चौक तक जो रोड बनाया उसकी मोटाई 6 इंच से भी कम है जबकि मनपा 1 फुट के करीब मोटी सड़कें गलियों में बना रही है. मेयर ने अधीक्षक को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट सादर करने का निर्देश दिया.

    विरोधी पक्ष नेता तानाजी वनवे ने एक अलग प्रश्न में कहा कि 3 ठेकेदारों को चरण-1 के सीमेन्ट रोड निर्माण का ठेका दिया गया. ये ठेकेदार पर्यावरण के नियमों का पालन नहीं कर रहे. 2017 सीएम निधि से जो रोड बनाया जाना था, वह 20 फीसदी भी पूरा नहीं किया गया. सूचना के अधिकार से मिली जानकारी के अनुसार, एक ठेकेदार अभि इंजीनियरिंग ने तो पीडब्ल्यूडी विभाग का 100 करोड़ रुपये जमा नहीं किया है. इसके पास बोगस अनुभव प्रमाणपत्र है. ऐसी कंपनी को मनपा ने ठेका किस आधार पर दिया. मेयर ने इस मामले की जांच का भी आदेश दिया.

    लेकिन इस मजबूती से बचाव अधीक्षक अभियंता तलवार नहीं कर पाए.एक भी सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिए.कारण तालेवार भी जुगाड़ से इस पद पर विराजमान हैं.आयुक्त ने पहले दिन ही उनकी क्लास ले चुके हैं.मामले को बिगड़ता देख महापौर जोशी ने उन्हें ही विस्तृत जाँच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।

    टाउन वेंडिंग कमेटी जल्द गठित करें -महापौर का निर्देश
    शहर में अधिकृत साप्ताहिक बाजार का ज्वलंत मामला कांग्रेस के वरिष्ठ नगरसेवक प्रफुल्ल गुरधे पाटिल ने उठाया।सभागृह को शहर में बढ़ती जनसंख्या के आधार पर अधिकृत बाजार के न होने से निर्माण हुई प्राकृतिक और अवैध बाजार सह फुटपाथ व सड़क किनारे व्यवसाय करने वालों के संरक्षण में पहले ‘टाउन वेंडिंग समिति’ का गठन करने की मांग की.फिर समिति के सुझाव से बाजार के आरक्षण की जगह पर बाजार का निर्माण कर उक्त अवैध बाजार व अतिक्रमण कर व्यवसाय करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गुजारिश की.इसी दौरान दयाशंकर तिवारी ने भी शनिवार बाजार (चोर बाजार) से टाटा पारसी स्कूल की विद्यार्थिनियों को होने वाले दिक्कतों को सामने रखा और इस बाजार को संचलन करने वाले माफिया को अंकुश लगाने के लिए मनपा की कार्रवाई को जायज ठहराया।इस मसले पर महापौर ने गंभीरता दिखाते हुए जम्मू ननद,कमलेश चौधरी,प्रफुल्ल गुरधे पाटिल से अगले ८ चर्चा करेंगे। और प्रशासन को जल्द से जल्द ‘टाउन वेंडिंग समिति’ करने सम्बंधित पहल करने का निर्देश दिया।

    खाली प्लॉट पर कचरा:२ बार जुर्माना फिर निलामी
    स्थगन प्रस्ताव के तहत दयाशंकर तिवारी ने दिए ,जिस पर चर्चा करते हुए शहर के खाली प्लॉट पर जमा कचरा,गंदगी से हो रही दिक्कतों के मद्देनज़र भाजपा वरिष्ठ नगरसेवक दयाशंकर तिवारी के दबाव में प्रशासन में विषय सभागृह में मौखिक रखा,जिस पर महापौर ने कड़क आदेश खुले भूखंड पर कचरा,गंदगी दिखा तो पहली दफा ५० रूपए तो दूसरी दफा १०० वर्ग मीटर से मनपा सफाई कर जुर्माना वसूलेंगी माने तो स्थानीय समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर उन प्लॉट/जमीन को अपने कब्जे में ले लेंगी।

    अतिरिक्त शिक्षकों को अतिरिक्त जिम्मेदारी देकर काम चलाए
    स्थगन प्रस्ताव के तहत विपक्ष नेता तानाजी वनवे ने मनपा आयुक्त द्वारा अतिरिक्त शिक्षकों को अन्यत्र भेजने का मुद्दा उठाया।इसके साथ ही पिछली सभा में ६ स्टेट बोर्ड स्कूल शुरू करने के प्रस्ताव पर आयुक्त ने बदलकर ३ सीबीएससी पैटर्न स्कूल शुरू करने की कोशिश शुरू की तो आज सभागृह में सर्वपक्षीय नगरसेवकों ने इसका विरोध किया।इस मामले पर महापौर ने कहा कि मंजूर ६ स्टेट बोर्ड स्कूल खुलेंगे ही साथ में सीबीएससी स्कूल खोलने की कोशिश को तहरिज दी जाएंगी।इसके साथ ही अतिरिक्त शिक्षकों को अन्य विभागों के अतिरिक्त कामकाज में समाहित निर्देश दिया।

    २ मार्च को २० वर्ष पूर्ण कर चुके एवजदार स्थाई होंगे
    मनपा के वे कर्मचारी 2 मार्च को नियमित हो जाएंगे जो 20 वर्षों से कार्यरत हैं. राज्य सरकार ने इस आशय का जीआर जारी किया था. मनपा के 4407 सफाईकर्मियों को नियमित करने का मुद्दा जीतेन्द्र घोड़ेस्वार ने आमसभा के प्रश्नोत्तर काल में उठाया था. उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में 5 महीने पूर्व सभा में नियमित करने का निर्णय लिया गया था लेकिन अब तक उन्हें आर्डर नहीं दिया गया.इस दौरान किसी की मृत्यु या कोई रिटायर्ड होता है तो उसे इसका भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. मनपा प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर भी असंवेदनशील है. जो कर्मचारी शहर की गंदगी साफ करने का काम करते हैं उनके साथ अन्याय किया जा रहा है. अधिकारी का कहना था कि अब तक 2354 कर्मचारियों के आवेदन आ चुके हैं. प्रशासकीय मान्यता के लिए फाइल अग्रेषित की गई है, लेकिन आस्थापना खर्च 35 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए, इस आधार पर निर्णय लिया जाना है. इस पर घोड़ेस्वार ने प्रशासन की जमकर खिंचाई की. दटके ने भी कर्मचारियों को 2 मार्च तक किसी भी हालत में नियमित करने की बात की. उन्होंने कहा कि स्वच्छ सिटी बनाना है तो सफाईकर्मियों के साथ न्याय करना ही होगा. प्रशासन बताये कि वर्तमान आस्थापना खर्च कितना है और इसे प्रशासन कैसे एडजस्ट कर रहा है. राज्य सरकार ने आदेश दिया है तो नियम में बैठने वाले कर्मचारियों को नियमित करना ही पड़ेगा.

    महापौर संदीप जोशी ने कहा कि यह विषय राजनीति का नहीं है. सभी पक्षों की इच्छा है कि कर्मियों को नियमित किया जाए. 15 दिन पूर्व हुई स्थायी समिति सभा में 35 फीसदी आस्थापना खर्च का मुद्दा उठा था. उस बैठक में कर्मचारियों को नियमित करने का निर्णय लिया गया था. उस दिन 1800 कर्मियों के आवेदन आ चुके थे. मेयर ने कहा कि उस निर्णय के अनुसार ही 2 मार्च को जितने आवेदन क्लीयर हुए हैं, उन लोगों को नियमित करने का आर्डर दे दिया जाएगा.

    बकाया सम्पत्ति कर पर लगी जुर्माना माफ नहीं करेंगे
    सम्पत्ति कर के अनाप-शनाप डिमांड और पानी बिल में कई तरह की खामियों को लेकर सदन में प्रस्ताव लाकर प्रवीण दटके की ओर से प्रशासन को घेरने का प्रयास किया गया हो, लेकिनहाजिर जवाब मनपा आयुक्त तुकाराम मुंढे ने अपने अधिकारों का हवाला देते हुए किसी भी सूरत में सम्पत्ति कर बकाया होने पर लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि माफ करने की मानसिकता में नहीं होने का खुलासा सदन में कर दिया.महापौर संदीप जोशी ने सभी गुट नेताओं की 29 के पूर्व एक बैठक लेकर चर्चा करने के बाद एक बार पुन: आयुक्त से इस संदर्भ में अनुरोध करने के निर्देश सदन को दिए.

    समुपदेशन केंद्रों में भ्रष्टाचार – आभा पांडे
    निर्दलीय वरिष्ठ नगरसेविका आभा पांडे की ओर से समुपदेशन केंद्रों में चल रहे भ्रष्टाचार को लेकर सदन में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताई गई.उन्होंने कहा कि भले ही अच्छे उद्देश्य से समुपदेशन केंद्रों का गठन किया गया हो, लेकिन जिन संस्थाओं को समुपदेशन केंद्र आवंटित किए गए, उनकी ओर से मनपा को झूठी जानकारी देकर धोखा किया गया है, जिससे मनपा आयुक्त के माध्यम से ही इसकी जांच होनी चाहिए. चर्चा के बाद महापौर जोशी ने उपायुक्त स्तर के अधिकारी से सम्पूर्ण मामले की जांच करने तथा इसकी रिपोर्ट सदन में पेश करने के आदेश प्रशासन को दिए.

    विस्तारित कृषि उत्पन्न बाजार परिसर में स्थापित होंगी मछली बाजार
    मेयो के सामने बजरिया में लगनेवाले मछली बाजार के कारण होनेवाली परेशानियों को देखते हुए जहां हाईकोर्ट की ओर से कार्रवाई के आदेश दिए गए, वहीं अब मनपा की सभा में लाए गए प्रस्ताव पर वरिष्ठ नगरसेवक दयाशंकर तिवारी द्वारा दिए गए सुझावों के अनुसार होलसेल मछली बाजार के लिए आरक्षित एपीएमसी की जमीन पर स्थानांतरित करने के लिए 15 दिनों में मामले का अध्ययन कर निर्णय लेने के निर्देश महापौर संदीप जोशी ने मनपा प्रशासन को दिए. चर्चा के दौरान नगरसेवक तिवारी ने कहा कि मछली और बकरी का व्यवसाय कृषि उत्पाद के अंतर्गत आने के कारण गत समय एपीएमसी को जमीन देते समय वहीं इन दोनों बाजारों के लिए जमीन का आरक्षण रखा गया था, जिससे भांडेवाड़ी में स्थानांतरित करने की अड़चन होने से इसे एपीएमसी में स्थानांतरित किया जाना चाहिए.

    तुरंत हटाएं सीमेंट रोड का अतिक्रमण- महापौर
    चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि तत्कालीन विधायक सुधाकर देशमुख द्वारा बजरिया में सीमेंट रोड के लिए निधि का आवंटन किया था, जिसके अनुसार यहां पर सीमेंट रोड का निर्माण तो शुरू किया गया, लेकिन बीच में मछली बाजार आने के कारण वहां का निर्माण रोक दिया गया है. अत: मछली बाजार का अतिक्रमण निकालकर इस मार्ग का निर्माण पूरा करने के निर्देश प्रशासन को देने की मांग भी उन्होंने की. चर्चा के उपरांत हाईकोर्ट के इस संदर्भ में दिए गए निर्देश का हवाला देते हुए महापौर ने तुरंत अतिक्रमण हटाने के निर्देश प्रशासन को दिया.

    मछली बाजार के लिए बदलना पड़ेगा जमीन का उपयोग
    चर्चा के दौरान वरिष्ठ पार्षद प्रफुल्ल गुड्धे ने कहा कि प्रस्ताव के अनुसार भांडेवाड़ी और बीड़गांव में इसका स्थानांतरण प्रस्तावित किया गया था. लेकिन बीड़गांव की 2.5 एकड़ जमीन एनएमआरडीए के अंतर्गत आती है. ऐसे में एनएमआरडीए के डीपी प्लान में क्या इसी के लिए जमीन का आरक्षण रखा गया है या नहीं? यह भी सुनिश्चित करना होगा. यदि नहीं तो, जमीन का उपयोग बदलने की पहले कार्रवाई करनी होगी. चर्चा के दौरान कुछ विक्रेताओं के लिए मंगलवारी बाजार में भी व्यवस्था होने का खुलासा किया गया. किंतु यहां जगह पर्याप्त नहीं होने से अंतत: एपीएमसी में ही स्थानांतरित करने के लिए प्रशासन को कार्यवाही के आदेश देने का निर्णय लिया गया.

    अवैध निर्माण पर कड़क कार्रवाई के आदेश
    मनपा की ओर से अवैध निर्माण को लेकर भले ही सम्पत्तिधारकों को नियमों के अनुसार नोटिस तो दिया जाता है, लेकिन लंबे समय तक किसी न किसी कारणवश कार्रवाई नहीं की जाती है. इस तरह से कार्रवाई लंबित रखे जाने पर गुरुवार की मनपा सभा में पूर्व महापौर प्रवीण दटके की ओर से नोटिस देकर सदन में प्रश्न उपस्थित किया गया. जिस पर लंबी चर्चा के बाद महापौर संदीप जोशी ने एमआरटीपी कानून की धारा 52, 53 और 54 के तहत जारी किए गए नोटिस पर क्या कार्रवाई की गई? इसकी जानकारी जोन के सहायक आयुक्त को मनपा आयुक्त को भेजने के निर्देश दिए. साथ ही मनपा आयुक्त को अगली सभा में रिपोर्ट पेश करने के आदेश भी दिए.

    महल,सीए रोड आदि स्लम में डिनोटिफाइड करने की प्रक्रिया शुरू करें
    चर्चा के दौरान पार्षद दयाशंकर तिवारी ने कहा कि स्लम में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं है. आलम यह है कि मध्य नागपुर में महल,इतवारी, गांधीबाग और सेंट्रल एवेन्यू जैसा क्षेत्र अभी तक स्लम के दायरे में है. स्लम के दायरे में होने के कारण कई बार दलित बस्ती के लिए मिलनेवाली निधि से इन क्षेत्रों में विकास किया जाता है, जिससे वास्तविक क्षेत्र इस निधि के लाभ से वंचित रहते हैं. उन्होंने कहा कि वर्ष 1997 में पहली बार पार्षद बनने के बाद अपने क्षेत्र को घोषित स्लम से बाहर निकालने के लिए काफी विकास के काम किए. यहां तक कि विकास के लिए लोगों के 16-16 फुट मकान भी तोड़े गए, लेकिन आलम यह है कि अब वर्ष 2020 शुरू होने के बावजूद क्षेत्र डिनोटिफाइड नहीं हो सके हैं. अत: ऐसे कई क्षेत्र होने से तुरंत प्रभाव से स्लम को डिनोटिफाइड करने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश प्रशासन को देने का अनुरोध भी किया. चर्चा के बाद महापौर ने स्लम डिनोटिफाइड करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए.

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