नागपुर : काचीपुरा स्थित पीडीकेवी (डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ) की करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन पर बने अवैध व्यावसायिक निर्माणों पर चलने वाला बुलडोजर एक बार फिर ऐन वक्त पर रुक गया है। राज्य सरकार द्वारा ध्वस्तीकरण को मंजूरी दिए जाने और पुरानी अपीलों पर राहत समाप्त होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर देरी की वजह सिर्फ तीन नई अपीलें हैं या पर्दे के पीछे कोई और कानूनी अथवा प्रशासनिक वजह काम कर रही है?
महापालिका के दस्तावेजों के अनुसार, धरमपेठ जोन ने जल्दबाजी में कार्रवाई करने के बजाय पहले कानूनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्णय लिया है। सहायक आयुक्त राजकुमार मेश्राम ने 3 और 13 जुलाई को नगर नियोजन विभाग तथा विधि विभाग से लिखित अभिमत मांगा है। नई अपीलों अथवा न्यायालय में लंबित किसी भी प्रक्रिया के कारण ध्वस्तीकरण पर कानूनी अड़चन तो नहीं आएगी, इसकी पुष्टि की जा रही है।
दशकभर से लंबित मामला-
काचीपुरा स्थित पीडीकेवी की खसरा क्रमांक 204 से 209 की लगभग 8,051.44 वर्गमीटर जमीन पर 54 व्यावसायिक प्रतिष्ठान वर्षों से संचालित हैं। इनमें ऑटोमोबाइल वर्कशॉप, गैरेज, भोजनालय, लकड़ी के कारखाने तथा मैरिज लॉन शामिल हैं।
वर्ष 2016 में न्यायालय से मिली स्थगन राहत के कारण यह मामला करीब दस वर्षों तक लंबित रहा। हाल ही में राज्य सरकार ने महापालिका के पक्ष में निर्णय दिया, जिससे ध्वस्तीकरण का रास्ता साफ माना जा रहा था। लेकिन इसी दौरान तीन नई अपीलें दाखिल होने से पूरी प्रक्रिया फिर धीमी पड़ गई।
हाईकोर्ट की स्थिति भी खंगाल रहा प्रशासन-
महापालिका यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उच्च न्यायालय या किसी अन्य सक्षम प्राधिकरण के समक्ष इस मामले से जुड़ी कोई ऐसी कार्यवाही लंबित तो नहीं है, जिससे बाद में ध्वस्तीकरण कानूनी विवाद में फंस जाए। बिना कानूनी स्थिति स्पष्ट किए कार्रवाई करने पर भविष्य में न्यायालय से प्रतिकूल आदेश आने की आशंका को देखते हुए प्रशासन फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए है।
इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं-
कार्रवाई रुकने के बाद काचीपुरा और आसपास के क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे सामान्य कानूनी प्रक्रिया बता रहे हैं, जबकि कुछ प्रशासनिक दबाव या राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका जता रहे हैं। वहीं, कुछ का कहना है कि प्रभावित व्यापारियों ने अपनी आजीविका बचाने के लिए उपलब्ध कानूनी विकल्पों का सहारा लिया है।
हालांकि, इन चर्चाओं की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। किसी भी राजनीतिक दल, मंत्री या जनप्रतिनिधि की भूमिका संबंधी कोई सार्वजनिक प्रमाण भी सामने नहीं आया है।
प्रशासन का सतर्क रुख-
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि महापालिका इस बार कोई ऐसी प्रक्रियात्मक चूक नहीं करना चाहती, जिससे बाद में अदालत में पूरी कार्रवाई रद्द हो जाए। इसी कारण विधि विभाग और नगर नियोजन विभाग की लिखित राय मिलने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
अब आगे क्या?
यदि नई अपीलों पर स्थगन नहीं मिलता और विधि विभाग ध्वस्तीकरण के पक्ष में स्पष्ट राय देता है, तो महापालिका दोबारा बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर सकती है। लेकिन यदि किसी सक्षम प्राधिकरण या न्यायालय से अंतरिम राहत मिलती है, तो कार्रवाई एक बार फिर टल सकती है।
‘नागपुर टुडे’ की पड़ताल-
अब तक उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों और प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, बुलडोजर कार्रवाई रुकने का तत्काल कारण तीन नई अपीलें और उनकी कानूनी स्थिति की जांच है। राजनीतिक हस्तक्षेप या किसी मंत्री अथवा जनप्रतिनिधि के दबाव संबंधी दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या सार्वजनिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए ऐसे दावों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
अब सभी की निगाहें महापालिका की अगली कानूनी राय और काचीपुरा में संभावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर टिकी हैं।
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