Published On : Fri, Jul 31st, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

पीतल पर सोने की परत, करोड़ों का खेल! ICICI गोल्ड लोन घोटाले का बड़ा खुलासा

खेल वही पुराना, तरीका नया; छोटे सर्राफा कारोबारियों की पुरानी चाल से बड़े बैंक बने शिकार
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नागपुर – महाराष्ट्र में सामने आया आईसीआईसीआई बैंक का गोल्ड लोन घोटाला कोई नया अपराध नहीं माना जा रहा है, बल्कि यह वर्षों पुराने फर्जीवाड़े का आधुनिक रूप प्रतीत होता है। जिस तरीके से पहले कुछ छोटे सर्राफा कारोबारी, बिचौलिए और कथित गोल्ड वैल्यूअर मिलकर गोल्ड फाइनेंस कंपनियों को चूना लगाते थे, अब उसी तरीके का इस्तेमाल बड़े निजी बैंकों तक पहुंच गया है। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले निशाने पर छोटी गोल्ड फाइनेंस कंपनियां थीं, जबकि अब देश के प्रतिष्ठित निजी बैंक भी इस संगठित गिरोह के जाल में फंसते दिखाई दे रहे हैं।

आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच में अब तक लगभग 27 करोड़ रुपये के संदिग्ध गोल्ड लोन का मामला सामने आ चुका है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह राशि और बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। इसी मामले में ईओडब्ल्यू ने आईसीआईसीआई बैंक के दो और शाखा प्रबंधकों को गिरफ्तार किया है।

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गिरफ्तार आरोपियों में आशीष बैजू वंजारी (45) और प्रकाश त्रिभुवन अवस्थी (35) शामिल हैं। इससे पहले तत्कालीन शाखा प्रबंधक पंकज केकतपुरे, गोल्ड वैल्यूअर नंदू खरवाड़े, ऑडिटर राजेंद्र शिलंकर तथा प्रमोद टेटे को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

पुराना तरीका, लेकिन लालच ने बैंकिंग व्यवस्था को बना दिया आसान शिकार

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सूत्रों के अनुसार, इस प्रकार का अपराध करने का तरीका नया नहीं है। करीब एक दशक पहले भी कई गोल्ड फाइनेंस कंपनियों में ऐसे मामले सामने आए थे, जिनमें पीतल अथवा अन्य धातुओं से बने आभूषणों पर सोने की मोटी परत चढ़ाकर उन्हें असली सोना बताकर गिरवी रखा जाता था।

उस समय कुछ छोटे सर्राफा व्यापारी, बिचौलिए और कथित गोल्ड वैल्यूअर मिलकर इस प्रकार की धोखाधड़ी को अंजाम देते थे। कई मामलों में फाइनेंस कंपनियों के कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई थी।

अब जांच एजेंसियों को संदेह है कि उसी पुराने मॉडस ऑपरेंडी को आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था में अपनाकर करोड़ों रुपये का फर्जी गोल्ड लोन स्वीकृत कराया गया।

कम ब्याज का लालच बना करोड़ों के घोटाले की वजह

जानकारों के अनुसार, स्थानीय साहूकार अथवा सर्राफा व्यापारी जहां गोल्ड लोन पर 2 से 3 प्रतिशत तक ब्याज वसूलते हैं, वहीं बड़े बैंक और गोल्ड फाइनेंस कंपनियां अपेक्षाकृत कम ब्याज दर पर शीघ्र ऋण उपलब्ध कराती हैं। इसी व्यवस्था का लाभ उठाकर गिरोह ने बैंकिंग प्रणाली में सेंध लगाई।

जांच में सामने आया है कि फर्जी ग्राहक, गोल्ड वैल्यूअर और बैंक के भीतर कार्यरत कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की कथित मिलीभगत से नकली आभूषणों के आधार पर लाखों रुपये के गोल्ड लोन स्वीकृत कराए गए।

ऑडिट में खुली करोड़ों की हकीकत

सूत्रों के अनुसार, ऐसे मामलों का खुलासा तत्काल नहीं होता। जब ग्राहक ऋण का भुगतान नहीं करता अथवा बैंक का नियमित ऑडिट होता है, तब लॉकर में रखे गिरवी आभूषणों की दोबारा जांच की जाती है। इसी प्रक्रिया में यह सामने आता है कि जिन आभूषणों को असली सोना मानकर करोड़ों रुपये का ऋण दिया गया था, वे वास्तव में नकली हैं।

मनीष नगर शाखा के ऑडिट के दौरान भी इसी प्रकार का फर्जीवाड़ा सामने आया, जिसके बाद अन्य शाखाओं की भी जांच शुरू की गई।

159 संदिग्ध गोल्ड लोन खाते जांच के दायरे में

जांच में जनवरी 2023 से अक्टूबर 2025 के बीच 159 संदिग्ध गोल्ड लोन खातों को स्वीकृति दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद बैंक की नौ अन्य शाखाओं की भी जांच शुरू की गई। जांच एजेंसियों को संदेह है कि करीब दस पूर्व शाखा प्रबंधकों सहित कई अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध हो सकती है।

क्या केवल शाखा प्रबंधक ही जिम्मेदार हैं?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इतनी बड़ी राशि का गोल्ड लोन केवल एक-दो अधिकारियों की मदद से स्वीकृत कराया जा सकता था?

बैंकिंग प्रक्रिया के अनुसार गोल्ड लोन में ग्राहक की पहचान, सोने की गुणवत्ता की जांच, मूल्यांकन, दस्तावेजों का सत्यापन तथा अंतिम स्वीकृति जैसी कई स्तरों की प्रक्रिया होती है। ऐसे में जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि कहीं इसके पीछे पूरा संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।

जांच गहराई तो खुल सकते हैं कई और बड़े राज

आर्थिक अपराध शाखा की जांच अभी जारी है। जांच अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या इसी प्रकार के फर्जी गोल्ड लोन अन्य शाखाओं अथवा अन्य बैंकों में भी स्वीकृत किए गए हैं। यदि जांच इसी दिशा में आगे बढ़ी, तो करोड़ों रुपये के और घोटालों का खुलासा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

डीसीपी दीपक अग्रवाल के मार्गदर्शन में एपीआई संतोष टोकलवार और उनकी टीम पूरे प्रकरण की जांच कर रही है।

नागपुर टुडे से बातचीत में डीसीपी दीपक अग्रवाल ने मामले की पुष्टि की। वहीं एपीआई संतोष टोकलवार ने बताया कि प्रकरण में जांच लगातार जारी है, आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किया जा रहा है तथा इस मामले में कई अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद पूरे नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है।

रविकांत कांबले

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