
गोंदिया। एक तरफ छुट्टियां मनाने की खुशी, बच्चों के चेहरों पर कान्हा नेशनल पार्क देखने का उत्साह… लेकिन किसे पता था कि लोगुर घाटी के घुमावदार मोड़ों पर मौत घात लगाए बैठी है। एक तेज रफ्तार यात्री बस काल बनकर आती है और एक हंसते-खेलते परिवार को पल भर में उजाड़ देती है।वारदात 2 जून सुबह करीब 11:30 बजे लोगुर घाटी पर घटित हुई ।आमगांव शहर के जाने-माने पेंट दुकान संचालक और भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता निमेश दमाहे अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ अपनी चौपहिया गाड़ी (कार) में सुबह 10:30 बजे सवार हुए। परिवार बेहद खुश था, मंजिल थी ‘कान्हा नेशनल पार्क’।
लेकिन ठीक 1 घंटे के बाद बालाघाट- बैहर रोड पर सुबह 11:30 बजे गाड़ी जैसे ही लोगुर घाटी के खतरनाक रास्तों पर पहुंची, सामने से आ रही एक तेज रफ्तार यात्री बस के ड्राइवर ने लापरवाही की सारी हदें पार कर दीं।चश्मदीदों के मुताबिक, बस की रफ्तार इतनी खौफनाक थी कि मोड़ पर उसने कार को सीधे टक्कर दी , जोरदार आवाज का धमाका हुआ और चीख-पुकार मच जाती है।
हादसे में भारी क्षति: समाज सेविका दुर्गा दमाहे का दुखद निधन*
इस भीषण टक्कर में कार के परखच्चे उड़ गए। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निमेश दमाहे की 33 वर्षीय पत्नी दुर्गा दमाहे ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। दुर्गा दमाहे सिर्फ एक गृहणी नहीं, बल्कि इलाके की एक जानी-मानी शख्सियत थीं। वह लोधी समाज सेवा समिति’ की कर्मठ संचालिका थीं, जो हमेशा सामाजिक कार्यों में आगे रहती थीं। उनके निधन से पूरे समाज में शोक की लहर दौड़ गई है, इस भयंकर एक्सीडेंट में खुद निमेश दमाहे और उनके दोनों मासूम बच्चे भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। जिन्हें आनन-फानन में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
बेलगाम यात्री बसों पर प्रशासन का नहीं कंट्रोल ?
राजनीतिक रसूल रखने वाले निमेश दमाहे भारतीय जनता पार्टी के आमगांव शहर सचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। जैसे ही उनके गंभीर घायल होने की खबर आमगांव भाजपा कार्यकर्ताओं तक पहुंची, पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया। इस दिल दहला देने वाली घटना से भाजपा परिवार और स्थानीय लोग गहरे सदमे में हैं। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक, हर कोई इस घटना पर दुख जता रहा है और पीड़ित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कर रहा है।
घटित हादसे के बाद बड़ा सवाल यही है क्या लोगुर घाटी के इन खतरनाक मोड़ों पर अंधाधुंध दौड़ने वाली बसों पर प्रशासन का कोई कंट्रोल नहीं है? आखिर कब तक इन बेलगाम यात्री बसों की वजह से बेगुनाह परिवार अपनी जान गंवाते रहेंगे ?
रवि आर्य







