Published On : Wed, Jun 16th, 2021

श्रुत पंचमी पर हुआ जिनवाणी का पूजन

नागपुर : जैन धर्म का बड़ा त्यौहार श्रुत पंचमी के दिन जिनवाणी का ऑनलाइन पूजन हुआ. इसी समारोह में ज्ञान दिवाकर दिगंबर जैनाचार्य गुप्तिनंदीजी गुरुदेव के 21 वे आचार्य पदारोहण दिवस का आयोजन किया गया. देशभर के अनेक भक्तों ने आचार्य भगवंत का पूजन किया. आचार्य भगवंत को जिनवाणी भेट और चरण प्रक्षालन अनेक भक्तों ने किया. गुरूदेव और संघस्थ विमलगुप्त मुनिराज, विनयगुप्त मुनिराज, गणिनी आर्यिका आस्थाश्री माताजी, क्षुल्लक धर्मगुप्तजी, क्षुल्लक शांतिगुप्तजी, क्षुल्लिका धन्यश्री माताजी, क्षुल्लिका तीर्थश्री माताजी को संजीव जव्हेरी मुंबई, जयकुमार कारवां उदयपुर, कोमल, विशाल, वरद, अन्वेषा सैतवाल बैंकाक, महावीर कुसुम गंगवाल बाराबंकी, विजय जैन पुणे, संगीता वर्धमान पूर्वत देउलगांवराजा, माधुरी बंड नागपुर ने पिच्छि भेट की. अनेक भक्तों ने गुरुदेव को आचार्य पदारोहण दिवस की शुभकामनाएं दी.

आचार्यश्री गुप्तिनंदीजी गुरुदेव ने कहा जैन धर्म मंत्रों से रहित नहीं हैं. जैन धर्म की पहचान णमोकार महामंत्र से हैं. बच्चों के जन्म के बाद णमोकार महामंत्र सुनाया जाता हैं. बच्चा गर्भ में आता हैं णमोकार महामंत्र का संस्कार होता हैं. जन्म होता हैं णमोकार महामंत्र का संस्कार होता हैं. नवजात बच्चों को सबसे पहले मंदिर आने के बाद दिगंबर गुरु णमोकार महामंत्र सुनाते हैं. गलती हो जाये प्रायचिश्त के णमोकार महामंत्र हैं. कार्य का शुभारंभ करना हैं णमोकार महामंत्र हैं. जन्म से लेकर मरण तक णमोकार महामंत्र अपने आप महत्व रखता हैं. धर्म मंत्र से रहित नहीं हो सकता. धर्म के नाम पर, मंत्र के नाम पर व्यापार करना, दुरुपयोग नहीं होना चाहिये.

2000 वर्ष पूर्व धरसेनाचार्य गुरुदेव को अचानक यह अनुभव हुआ उनके द्वारा अर्जित जैन धर्म का ज्ञान केवल उनकी वाणी तक सीमित हैं उन्हें यह लगा शिष्यों की स्मरणशक्ति कम हो जाने पर ज्ञान वाणी नहीं बचेंगी. ऐसे मेरे समाधि लेने के पश्चात जैन धर्म का संपूर्ण ज्ञान खत्म हो जायेगा तब महामुनि धरसेनाचार्य ने पुष्पदंतजी गुरुदेव और भूतबलिजी गुरुदेव की सहायता से षटखंडागम ग्रंथ की रचना की और उसे ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी के दिन रचना पूर्ण की. इस शास्त्र में जैन धर्म से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारी हैं. इस ग्रंथ में जैन साहित्य, इतिहास, नियम आदि का वर्णन हैं. श्रुत पंचमी के दिन श्री धवल महाधवलादि आदि ग्रंथों को विराजमान कर श्रद्धा व भक्ति से महोत्सव के साथ उनकी पूजा, अर्चना विधि विधान से की जाती हैं. इस दिन ग्रंथों का पूजन किया जाता हैं, ग्रंथों को सजाया जाता हैं. पुराने ग्रंथों, शास्त्रों और सभी किताबों की देखभाल करते हैं. श्रुत पंचमी ज्ञान के आराधना पर्व हैं, जैन धर्म में इसका विशेष महत्व हैं.