Published On : Fri, Jun 29th, 2018

नागपुर से भेड़-बकरियों के निर्यात योजना पर जैन समाज ने जताई आपत्ति, अदालत जाने की तैयारी

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नागपुर : मध्य भारत से भेड़-बकरियों के निर्यात की प्रक्रिया शनिवार से शुरू हो जायेगी। नागपुर के डॉ बाबासाहब आंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय विमानतल से पहली खेप शारजाह के लिए रवाना होगी। विदर्भ की धरती से शुरू जानवरों के निर्यात को लेकर सरकार उत्साही है। सरकार का मानना है की इस योजना का शुभारंभ होने के साथ विदर्भ के उन किसानों को कमाई की वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी जो पारंपरिक पद्धति से खेती तो करते है लेकिन मुनाफ़ा नहीं कमा रहे है। सरकार का यह भी मानना है की इस कदम की वजह से कभी किसानों की आत्महत्या के लिए बदनाम रहे विदर्भ क्षेत्र में किसानों की आर्थिक उन्नति को बल मिलेगा। देश में मीट या फिर भेड़-बकरियों के आयात का यह कोई पहला मामला नहीं है लेकिन नागपुर में शुरू हो रहे इस काम को लेकर विरोध के स्वर भी मुखर हो रहे है। शुक्रवार को जैन समाज से जुडी कई संस्थाओं ने प्रदर्शन कर सरकार के इस कदम पर विरोध दर्ज कराया गया। सकल जैन समाज नागपुर से भेड़-बकरियों के निर्यात पर रोक लगाने की कोशिश के तहत अदालत जाने की तैयारी में है।

दूसरी तरफ नागपुर में मूक प्राणियों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्त्ता भी जानवरों के निर्यात पर विरोध दर्ज करा रहे है। पीपल्स फॉर एनिमल संस्था की करिश्मा गिलानी ने इसे नियमों के विपरीत करार दिया है। गिलानी के मुताबिक मूक जानवरों को एक जगह से दूसरी जगह लेकर जाने को लेकर कानून है। वन्यजीव संरक्षण कानून 1972 के मुताबिक जानवरों के हस्तांतरण को लेकर खास गाइडलाइंस है। देश में जब कुछ किलोमीटर जानवरों को ले जाने के लिए दिशानिर्देश है तो यहाँ तो बात दूसरे देश ले जाने की है। क्या सरकार यह सुनिश्चित करेगी की जानवरों को लेकर जाने के समय नियमों का पालन किया जायेगा। उनके साथ वेटनरी डॉक्टर,उनके खाने पीने की पर्याप्त व्यवस्था या फिर उनके मूवमेंट के लिए पर्याप्त जगह प्लेन में उपलब्ध होगी। भेड़ और बकरी प्रकृति चक्र का अहम हिस्सा है। नियम कहता है की किसी जानवर की ब्रिडिंग ( उन्हें गर्भवती करने की प्रक्रिया ) वर्ष में एक बार और जीवन काल में सिर्फ पाँच बार की जा सकती है। ऐसे में विदेश में देश के जानवरों के साथ किस तरह का व्यवहार हो रहा है, इसकी देखरेख कौन करेगा। सरकार का यह कदम भेड़-बकरियों के पालन को उकसायेगा और ज्यादा उत्पादन के लिए अप्राकृतिक तरीक़े को अपनाना शुरू हो जायेगा। जब इतने जानवरों को एक साथ भेजा जायेगा तो उनके टीकाकरण और जाँच की क्या व्यवस्था उपलब्ध होगी।

करिश्मा गिलानी की ही तरह प्राणियों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्त्ता अरविंद कुमार रजुड़ी भी सरकार के इस कदम के ख़िलाफ़ है। उनका मानना है की सिर्फ कटने के लिए मूक प्राणियों का निर्यात करना उचित नहीं है। मूक प्राणियों के संरक्षण को लेकर पशु संरक्षण अभिप्राय 1960 के विशेष नियम है। भेड़-बकरी का पालन करना आज सामान्य स्थिति नहीं है। समाज का विशेष वर्ग इस काम को करता है किसान नहीं, ऐसे में इससे अचानक किसानों की आर्थिक हालत सुधर जायेगी यह कहना प्रामाणिक नहीं लगता। जानवरों को नियमों के तहत भेजा जायेगा इसकी भी स्पस्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं है।

मूक प्राणियों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा दी जा रही दलीलों को पशुपालन की खेती बढ़ाने के लिए काम करने वाले लोग सिरे से ख़ारिज कर रहे है। नागपुर पशु चिकित्सालय कॉलेज के सहायक प्रोफ़ेसर डॉ शिशिर उपाध्ये के अनुसार सरकार का यह क़दम भविष्य में विदर्भ के लिए रेवोल्यूशन लाने जैसा साबित हो सकता है। ऐसा नहीं है की भेड़-बकरियों को और अन्य मूक प्राणियों का व्यवसाय देश में होता ही न हो,यह परंपरा वर्षो से चली आ रही है। अब किसानों की दिलचस्पी पशुपालन में बढ़ी है। अब तक किसानों के पास सिर्फ आसपास का बाज़ार उपलब्ध था। लेकिन सरकार के बाद उनके पशु विदेश में जायेगे। जिससे उनकी आमदनी बढ़ेगी। देश में ऐसा कोई नियम नहीं है जो पशुओं व्यापार में पाबंदी लगता हो। उल्टा इस कदम से किसानों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। बीते कुछ वर्षो की रिसर्च बताती है की खेती से ज़्यादा किसान पशुओं के व्यापार से कमाई कर रहे है।

जब से ये खबर चली है की नागपुर की धरती से पशुओं का आयात होने वाला है यहाँ रहने वाले जैन समाज में गुस्सा फूट पड़ा है। समाज की कई संस्थाओं ने इस काम का उद्घाटन ही न होने देने की अपील सरकार से की है। शहर में कई जगह शुक्रवार को प्रदर्शन किया गया। सकल जैन समाज ने तो संघ मुख्यालय के सामने प्रदर्शन कर गिरफ़्तारी दी। इस संस्था के जुडी डॉ रिचा जैन ने संघ से इस मामले में हस्तक्षेप करने की माँग की है। जैन का कहना है की जैन समाज अहिंसा को मनाता है,देश की आजादी अहिंसा से ही मिली है और इस देश का मूल भी अहिंसा धर्म का पालन करना है। जो जानवर विदेश भेजे जा रहे है उसके साथ क्या होगा ये सबको पता है। एक तरह से सरकार का कदम हिंसा की वृत्ति को बढ़ावा देने जैसा है। कम से कम संतरो के लिए पहचाने जाने वाले इस शहर में इस तरह का काम नहीं होना चाहिए। हमने जिलाधिकारी को निवेदन दिया है और जानवरों के निर्यात पर रोक लगाने के लिए हम अदालत भी जाने वाले है।

राज्यसभा सांसद और प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान से सम्मानित डॉ विकास महात्मे ने भेड़-बकरियों का निर्यात नागपुर से शुरू हो सके इसके लिए प्रयास किया। उनके प्रयास का नतीजा है की शनिवार को भेड़-बकरियों की पहली खेप नागपुर एयरपोर्ट से भेजी जा रही है। सरकार की इस योजना को लेकर उठ रही आपत्तियों को डॉ महात्मे ने निरर्थक करार दिया है। उनका कहना है की जानवरों के व्यापार की परंपरा पूर्व से शुरू है। नागपुर में ऐसा होना कोई पहली घटना नहीं है। मीट ( मांस ) का व्यापार देश भर में हो रहा है। ये सच है की वो जिस समाज से आते है उस समाज का भेड़-बकरी पालन पारंपरिक व्यावसाय है। लेकिन हमें देखना चाहिए की उसी समाज की आर्थिक स्थिति आज क्या है? सरकार अगर उस समाज के विकास के लिए कोई कदम उठा रही है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए। इसका फायदा विदर्भ के लाखों किसानों को होगा। किसानों को आर्थिक तौर पर स्वावलंबी बनाने में इस कदम की प्रमुख भूमिका रहेगी। नागपुर से ये पहला प्रयोग है जिसके माध्यम से विदर्भ का किसान ग्लोबल मार्केट से सीधे जुड़ रहा है।

शनिवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस,केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी,केंद्रीय उद्योगमंत्री सुरेश प्रभु,केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र शेखावत और राज्य के पशुसंवर्धन और विकास मंत्री महादेव जानकर की उपस्थिति में इस योजना का उद्घाटन होने वाला है।