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    Published On : Thu, Jun 27th, 2019

    आई-टी रेड : ऑरेंज सिटी हाउसिंग फाइनेंस का मास्टरमाइंड अंडरग्राउंड!

    नागपुर: नागपुर समेत पूरे विदर्भ में फैले शहर के बिल्डरों के अनेक ठिकानों पर पिछले दो दिनों से जारी आयकर विभाग के छापे में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. जहां एक ओर इन्कम टैक्स के सतर्कता विंग के अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर नकद लेनदेन का पर्दाफ़ाश किया है, वहीं एक बड़ा खुलासा सामने आ रहा है। जानकारी मिली है कि इन बिल्डरों के समूह को ऑरेंज सिटी हाउसिंग फ़ाइनेंस लिमिटेड से बड़े स्तर पर सहयोग मिलता था। जानकारों की मानें तो इस वित्तीय संस्थान में कई पार्टनर है और प्रमुख रूप से अतुल यमसनवार का नाम सामने आया है। हालांकि सूत्रों से पता चला है कि यमसनवार की आड़ में एक बड़े नाम को दबाने का प्रयास किया जा रहा है जिसका संबंध शहर और राज्य के एक प्रतिष्ठित नेता से बताया जा रहा है। अब आयकर विभाग इस वित्तीय संस्था पर नजरें गड़ाए हुए है। विभाग के अधिकारी ये पता लगाने में जुटे हैं कि आखिर ये धन किसका है और कैसे इन पैसों को ‘एडजस्ट’ किया जा रहा है।

    सकते में हैं सफेदपोश

    इस बीच यमसनवार,कुणावार,पद्मावार,चकनलवार और बोंगिरवार जैसे बिल्डरों पर आयकर विभाग द्वारा की गई कार्रवाई से राज्य के दिग्गज सफेदपोश भी सकते में हैं. सूत्र बताते हैं कि वर्ष २०१६ से आरेंज सिटी हाउसिंग फाइनांस लि. का प्रबंध निदेशक इस गोरखधंधे में मास्टरमाइंड की भूमिका निभाता आया है. अब मामले का भंडाफोड़ होने पर उसे बचने के लिए दूसरे प्रबंध निदेशक को मोहरा बनाये जाने की चर्चा राजनीतिक हलकों में शुरू हैं.

    नेता-बिल्डर भाई-भाई!

    संकेत मिल रहे हैं कि सत्ताधारी कुछ मंत्रियों के निवेश उक्त फाइनांस संस्थान में होने के साथ ही साथ विपक्ष के भी स्थानीय कुछ सफेदपोशो जो खासकर सत्तापक्ष नेताओं के काफी करीबी हैं और राज्य के बिल्डर लॉबी का हिस्सा हैं,उनके नाम सार्वजानिक न हो इसलिए केंद्र स्तर पर मशक्कत की जा रही हैं. कुल मिलकर बिल्डर लॉबी और उन्हें वित्तीय मदद करने वाली समूहों पर एकाधिकार के राजनितिक रसूख का दुरूपयोग किया जा रहा.

    10 करोड़ से ज्यादा नगदी बरामद

    अधिकांश बिल्डर कर चोरी करने के उद्देश्य से नकद में ही कारोबार करने को प्राथमिकता दे रहे थे. मिले कागजातों ने इस बात की पुष्टि भी हो गई है. आयकर विभाग ने 20 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी, जो दूसरे दिन बुधवार को भी जारी रही. इन बिल्डरों के साथ कार्य करने वाले अन्य बिल्डरों से पूछताछ की गई और उनसे भी कागजात देने को कहा गया. सूत्रों ने बताया कि छापेमारी के दौरान 10 करोड़ से अधिक की नकदी बरामद हुई है, जिसकी गिनती दूसरे दिन भी जारी रही.

    उजागर हुआ कच्चा चिट्ठा

    उल्लेखनीय यह हैं कि बिल्डरों के समूह को आरेंज सिटी हाउसिंग फाइनेंस लि. से बड़ी मात्रा में आर्थिक सहयोग मिलता था. इस वित्तीय संस्थान में कई पार्टनर हैं और मुख्य रूप से अतुल यमसनवार सामने हैं. इस वित्तीय संस्थान में शहर के सर्वपक्षीय दिग्गज क्षेत्रीय/राष्ट्रीय नेताओं का बड़े पैमाने पर पैसा निवेश के रूप में लगा हुआ है.

    क्यों बच रहा सूत्रधार?

    आयकर विभाग की कार्रवाई में उक्त वित्तीय संस्थान के एक अन्य प्रबंध निदेशक ‘डीएसके’ को नज़रअंदाज किया जाना समझ से परे हैं. संस्थान को संचालित करने का मुख्य व्यक्ति है और इसी ‘डीएसके’ के जरिये खासकर सत्ताधारी नेताओं के काले धन ’ का इस्तेमाल इस वित्तीय संस्थान के जरिए करता है.

    राजनीतिक दबाव हावी

    वहीं ‘डीएसके’ के वित्तीय मदद पर पल रहे दलालों में हड़कंप मची हुई हैं,इन्हीं दलालों के मार्फ़त ‘डीएसके’ ने सरकारी लाभप्रद योजनाओं में अच्छा-खासा निवेश भी किया हैं.अब देखना यह हैं कि आयकर विभाग की कार्रवाई राजनितिक दबाव में किस करवट लेती हैं और किसे बचाने के लिए नज़र फेरती हैं.

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