Published On : Tue, Aug 27th, 2019

आरओ प्लांट की गुणवत्ता पर आमसभा में उठा मुद्दा

मनपा प्रशासन ने कहा कार्रवाई का अधिकार हमें नहीं

नागपुर: आरओ प्लांट के नाम पर शहर के अनेक हिस्सों में भले ही अवैध रूप से व्यवसाय किया जा रहा हो, लेकिन इन पर अंकुश नहीं होने तथा आरओ के नाम पर साधारण पेयजल उपलब्ध किए जाने को लेकर विपक्ष की ओर से प्रशासन को घेरने का प्रयास किया गया. जिस पर जानकारी देते हुए प्रशासन की ओर से बताया गया कि भले ही इस तरह के आरओ प्लांट शहर सीमा में संचालित हो रहे हों, लेकिन मनपा को इनके खिलाफ कार्रवाई का कोई अधिकार नहीं है. इनके खिलाफ कार्रवाई के अधिकार केवल अन्न एवं औषधि विभाग को होने की जानकारी भी प्रशासन की ओर से उजागर की गई.

इस मसले पर प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई कि आरओ प्लांट स्थापित करने के लिए एफडीए विभाग की ओर से लाइसेंस दिया जाता है जबकि स्वास्थ्य से संबंधित मामलों के लिए जोनल कार्यालय की ओर से नियंत्रण रखा जाता है. मनपा के जोनल कार्यालय की ओर से केवल अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया जाता है.

वनवे का मानना था कि आरओ के नाम पर लोगों को बोअरवेल और कुओं का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है. केवल ठंडा कर पानी दिया जाता है, जबकि इसकी गुणवत्ता की जांच नहीं होती है जिससे लोगों के साथ आरओ के नाम पर धोखा किया जा रहा है. न केवल शहर बल्कि शहर की सीमा पर इस तरह के कई आरओ प्लांट लगाए गए हैं. प्रशासन की लापरवाही के चलते व्यवसायी निरंकुश हो गए हैं.

उल्लेखनीय यह हैं कि स्थायी समिति द्वारा लिए गए फैसले के अनुसार लगनेवाले आरओ प्लांट के संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया गया कि इन आरओ प्लांट को लेकर जोन स्तर पर एग्रीमेंट किया जा रहा है, जिसके अनुसार 20 लीटर की कैन 5 रु. में उपलब्ध कराई जाएगी जबकि घरपोच सेवा के लिए 10 रु. का शुल्क लिया जाएगा.

निजी कार्यक्रमों के लिए भी कैन उपलब्ध कराने की व्यवस्था है जिसके लिए 15 रु. का शुल्क लेने का प्रावधान है. प्रशासन की ओर से बताया गया कि शहर में निजी व्यवसायियों द्वारा संचालित आरओ प्लांट की जांच करने के लिए हाल ही में 9 अगस्त को एफडीए विभाग को पत्र भेजा गया था.