Published On : Mon, Sep 18th, 2017

ख्वाब सिम्बायोसिस का और वहां हो रही खेती


नागपुर: दिल्ली से गल्ली तक एक ही पक्ष की सत्ता है,वह भी बहुमत में. बावजूद इसके की जाने वाले घोषणाओं और उसके पिछे की हक़ीक़त में जमीन-असमान का अंतर है. इससे कई लोकाभिमुख घोषणाएं सिर्फ कागजों और घोषणापत्रों तक सिमित रहने की आशंका स्थानीय ग्रामवासियों ने जताई है। नागरिकों ने प्रशासन से सवाल किया कि क्या इस श्रेणी में सिम्बॉयसिस भी है?

विगत माह मनपा में सत्ताधारी पक्ष ने पूर्व नागपुर के सीमावर्ती इलाके में मनपा की बेशकीमती जमीन लगभग मुफ्त में पुणे की विख्यात शैक्षणिक संस्था सिम्बायोसिस को देने का निर्णय लिया है. क्योंकि राज्य में इन्हीं की सत्ता है और मुख्यमंत्री भी नागपुर से ही है. इसलिए आनन-फानन में बिना मनपा और स्थानीय विद्यार्थियों का हित साधे सिम्बॉयसिस को देने का करार कर लिया।इसके बाद इस जमीन पर भूमिपूजन भी कर सरकार-सत्तापक्ष-प्रशासन ने खुद की पीठ थपथपा ली.


नागपुर टुडे की टीम ने जब उक्त स्थल जहाँ के लिए सिम्बायोसिस प्रस्तावित है. वहां का दौरा किया तो प्रथमदृष्या पाया कि इस स्थल पर कई किसान खेती वर्षों से कर खुद का जीवन यापन कर रहे हैं. वर्तमान में भी फसल लहलहा रहे थे. इसी खेती के बीच भूमिपूजन का स्थल कहीं खो चुका है. इसी जमीन से सटी जमीन पर मनपा और किसी व्यक्ति की खुद के मालिकाना अधिकार वाली सूचना फलक लगी हुई थी. जो दर्शा रही थी कि सम्पूर्ण करोड़ों की परिसर विवादों में घिरा है. इस विवाद को मनपा-सत्तापक्ष-राज्य सरकार निपटाकर मनपा के कब्जे में जमीन लाने के बजाय इस जमीन को लेकर घोषणाएं की जानी तथ्यहीन है.

उल्लेखनीय यह है कि सिम्बॉयसिस को उक्त जमीन देने का लगातार ‘आप’ विरोध कर रही है. लेकिन सरकार व मनपा प्रशासन का इसे लेकर उदासीन रवैय्या समझ से परे है.