Published On : Wed, Aug 12th, 2020

क्या मनपा आयुक्त मुंढे निजी अस्पतालों को लाभ पहुंचाना चाहते हैं?

एक ओर जहां कोविड के फैलते पांव से अन्य क्षेत्रों के साथ- साथ नागपुर शहर का भी हाल बेहाल है,वहीं मनपा प्रशासन के रवैये से ऐसा प्रतीत होता है जैसे उसने नागरिकों को ‘तुम जानो, तुम्हारा काम जाने’ की अवस्था में असहाय छोड़ दिया है।संक्रमितों के इलाज की लचर व्यवस्था से तो ऐसा ही लग रहा है।

लोग पूछ रहे हैं कि जब शहर के 12 निजी अस्पतालों को कोविड इलाज के लिए अनुमति दी गई, तब सिर्फ 6 अस्पतालों में ही इलाज क्यों शुरु हो पाया है?जबकि, इनमें से अधिकांश में बिस्तर भर चुके हैं!

लचर व्यवस्था और अपर्याप्त सुविधा के कारण लोग सरकारी अस्पतालों में नहीं जाना चाहते।ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या जानबूझकर ऐसी स्थिति पैदा की जा रही है जिससे निजी अस्पतालों को फायदा पहुंचे?


क्या मनपा आयुक्त तुकाराम मुंढे की इसमें कोई पक्षपाती भूमिका है?

मालूम हो कि आयुक्त मुंढे ने 23 अप्रैल को एक आदेश जारी कर शहर के 12 प्रमुख अस्पतालों को कोविड के इलाज के लिए आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे।लेकिन निर्धारित अवधि में ऐसा नहीं हो पाया।मनपा आयुक्त मुंढे ने पुनः 24 जुलाई को 12 में से 10 अस्पतालों को कोविड के मरीजों के इलाज की व्यवस्था करने संबंधी आदेश जारी किया।बावजूद इसके अपेक्षित व्यवस्था अभी भी नजर नहीं आ रही!जले पर नमक छिड़कने समान अस्पताल प्रबंधन दावा कर रहे हैं कि सभी बिस्तर मरीजों से भर चुके हैं, जबकि वास्तविकता में अधिकांश बिस्तर खाली पड़े हैं।फिर, प्रशासन दंडात्मक कारर्वाई क्यों नहीं कर रहा?

सवाल ये भी खड़े रहे हैं कि बेहाली की अवस्था में लगभग बंद पड़े मनपा के अस्पताल आखिर कब शुरु होंगे?जब मनपा प्रशासन ने इंदिरा गांधी अस्पताल, आइसोलेशन हास्पिटल और पांचपावली सूतिकागृह मेंं आइसीयू बिस्तर की व्यवस्था की , ढाई सौ से अधिक बिस्तर की व्यवस्था की गई, तब साथ -साथ आवश्यक चिकित्सक व अन्य कर्मचारी उपलब्ध क्यों नहीं कराये गये?मनपा आयुक्त की इस बिंदु पर निष्क्रियता और उनकी चुप्पी अनेक संदेह प्रकट कर रहे हैं।क्या मनपा अर्थात् सरकारी अस्पतालों की कीमत पर वे निजी अस्पतालों को लाभ पहुंचाना चाहते हैं?

जवाब मनपा आयुक्त तुकाराम मुंढे को ही देना है!