Published On : Wed, Jun 23rd, 2021

JBCCI को लेकर दायर इंटक की याचिका कोलकाता हाईकोर्ट में हुई सूचीबद्ध

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– उच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं मिला तो याचिकाकर्ता सुको का दरवाजा खटखटाएगा।

नागपुर – नेशनल कोज वेज एग्रीमेंट(NCWA) – 11 के लिए गठित JBCCI ( Joint Bipartite Committee for the Coal Industry) से इंटक को बाहर रखने के खिलाफ कोलकाता उच्च न्यायालय की शरण ली गई है. डा. जी संजीवा रेड्डी के नेतृत्व वाले इंटक से सम्बद्ध राष्ट्रीय खान मजदूर फेडरेशन इंटक ने उच्च न्यायालय में गत सोमवार का याचिका दायर की. मंगलवार, 22 जून को याचिका हाईकोर्ट में सूचीबद्ध हुई है। जल्द ही याचिका पर सुनवाई हो सकती हैं.

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रेड्डी गुट के फेडरेशन के महासचिव एस.क्यू जामा ने याचिका में दो प्रमुख डिमांड की है।
पहला यह कि JBCCI – 11 में इंटक को प्रतिनिधित्व दिया जाए.
दूसरा यह कि जब तक याचिका पर कोर्ट कोई कार्यवाही नहीं करता तब तक JBCCI – 11 की प्रक्रिया शुरू न की जाए।
दायर याचिका द्वारा उच्च न्यायालय को बताया गया है कि इंटक को JBCCI में सम्मिलित किए जाने को लेकर किसी प्रकार की कोई क़ानूनी रोक नहीं है। कोल इंडिया(CIL) राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है और इसी के तहत इंटक(INTUC) को JBCCI से दूर रखा गया है। नेशनल कोज वेज एग्रीमेंट(NCWA) एक से लेकर 10 तक में इंटक की प्रमुख भूमिका रही है। यदि उच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं मिला तो याचिकाकर्ता सुको का दरवाजा खटखटाएगा।

याचिकाकर्ता ने दावा किया हैं कि डा. जी संजीवा रेड्डी के नेतृत्व वाले इंटक के 3.30 करोड़ मजदूर सदस्य हैं। कोल इंडिया में भी इंटक सदस्यता में दूसरे नंबर पर है। ऐसे में इंटक की अनदेखी नहीं की जा सकती है।
JBCCI में BMS व HMS के 4-4 एवं CITU व AITUC से 3-3 प्रतिनिधि सम्मिलित किए हैं। इंटक को इससे बाहर रखा गया है।

25 जून को हो सकती हैं सुनवाई
18 जून को भी राष्ट्रीय कोलयरी श्रमिक संघ की याचिका पर सुनवाई नहीं हुई. इसके पहले 11 जून को सुनवाई होने वाली थी,लेकिन नहीं हो पाई। JBCCI सहित कोल इंडिया लिमिटेड की अन्य समितियों से इंटक को बाहर रखे जाने को लेकर जबलपुर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है।

कोर्ट द्वारा 18 जून, 2021 को सुनवाई होने वाली थी, कोविड-19 की वजह से सुनवाई आनलाइन हो रही है। इस कारण कम प्रकरणों पर ही सुनवाई हो पा रही है। कोर्ट ने अब सुनवाई की अगली तारीख 25 जून तय की गई हैं.

इंटक से सम्बद्ध राष्ट्रीय कोलयरी श्रमिक संघ (आरसीएसएस), एनसीएल के महामंत्री बिरेन्द्र सिंह बिस्ट मामले को लेकर न्यायालय की शरण में गए हैं। प्रकरण में कोल सचिव, सीआईएल के सीएमडी, जीएम (एमपी एंड आईआर), सीएमडी एनसीएल को पार्टी बनाया गया।जेबीसीसीआई-11 के गठन के पूर्व ही अप्रैल में याचिका दायर की जा चुकी है।

उल्लेखनीय यह हैं कि इंटक के बगैर नेशलनल कोल वेज एग्रीमेंट-11 के लिए जेबीसीसीआई का गठन हुआ है। इंटक के तीन अलग- अलग गुटों ने प्रतिनिधित्व के लिए नाम भेजे थे। कोल इंडिया प्रबंधन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि सक्षम न्यायालय के फैसले अथवा निर्देश के बाद ही इंटक को JBCCI में स्थान मिल सकेगा। जेबीसीसीआई में बीएमएस व एचएमएस के 4-4 एवं सीटू व एटक से 3-3 प्रतिनिधि सम्मिलित किए हैं। प्रबंधन जेबीसीसीआई की बैठक की तैयारी भी कर रहा है।

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