Published On : Wed, Oct 7th, 2020

देर शाम अमूमन सभी रेती घाटों में अवैध उत्खनन शुरू

– सावनेर के नए तहसीलदार के लिए बड़ी चुनौती

नागपुर – कानूनी रूप से कागजों पर रेती की पाबंदी के बावजूद कल मंगलवार की देर शाम से सावनेर तहसील के अमूमन सभी रेती घाटों पर अवैध रेती उत्खनन का दौर शुरू हो गया। जबकि 2 दिन पूर्व तहसील में नए तहसीलदार ने तहसील के जिम्मा संभाल,क्या उक्त कृत पर उनकी मौखिक स्वीकृति अवैध उत्खनन करने वालों को प्राप्त हो गई या फिर उनके की अधिकारी कर्मी उन्हें अंधेरे में रख अवैध उत्खनन शुरू करवा दिए।

याद रहे कि रविवार तक यह चर्चा थी कि नए तहसीलदार काफी कड़क हैं,अवैध रेती उत्खनन आदि को बढ़ावा नहीं देंगे। लेकिन कल देर शाम शुरू हुई रेती की अवैध उत्खनन से सभी की सोच एकाएक बदल गई।

इस अवैध उत्खनन करके माँगकर्ताओ तक पहुंचाने वालों का साफ साफ कहना हैं कि वे प्रशासन संभालने की जिम्मेदारी किसी ‘कंपनी’ को दे रखी हैं, इसके एवज में हम सभी साप्ताहिक शुल्क अदा करते हैं।

कोछि घाट परिसर जिसका परसों जिला प्रशासन ने मिट्टी मिश्रित रेती उत्खनन/उठाने और परिवहन करने की अनुमति दी,यहां की शेष प्रक्रिया बड़ी तेजी से पूरी की जा रही,इसके बाद इसी तर्ज पर जिला प्रशासन के ही सूत्रों की माने तो अन्य 4 से 5 घाटों की अनुमति देने वाले हैं।

उल्लेखनीय यह हैं कि मिट्टी मिश्रित रेत का कोई खास उपयोग नहीं होता। यह तो सिर्फ अवैध उत्खनन के लिए मार्ग प्रसस्त करने का जरिया मात्र हैं। ऐसी अनुमति जिन्हें मिली वे नदी से अवैध उत्खनन कर जिस खेत से रेती निकालने की अनुमति लाए उस खेत में रेती जमा करेंगे,फिर इस जमा रेत को रोजाना 1-2 रॉयल्टी अनगिनत रेत का परिवहन करेंगे। जिला प्रशासन सूत्रों के अनुसार कोछि घाट के आसपास के खेत,जिसमें से रेती मिश्रित मिट्टी निकालने की 400 से 500 ब्रास की अनुमति मिलेंगी,अर्थात यह 10 से 15 दिन का काम होंगा,जबकि दर्शाए गए खेतों में इतनी रेती जमा ही नहीं हैं। यह भी जानकारी मिली कि कोछि प्रकल्प के लिए घाट के आसपास की कई हेक्टर जमीन का सरकार ने अधिग्रहण कर चुकी हैं, क्योंकि जिला प्रशासन घटनास्थल अर्थात जहां की जिस बिना पर अनुमति मांगी जा रही,वहां का प्रत्यक्ष मुआयना कभी करती नहीं इसलिए वैध अनुमति की आड़ में अवैध उत्खनन का सिलसिला जारी हैं।

स्थानीय जागरूक नागरिकों ने जनप्रतिनिधियों से मांग की हैं कि पर्यावरण के संरक्षण और अवैध रेती उत्खनन सह परिवहन पर अंकुश लगाने संबंधी सरकार का ध्यानाकर्षण कर कड़क अध्यादेश जारी करवाए।