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    Published On : Thu, May 20th, 2021

    अवैध उत्खनन व बिना रॉयल्टी के रेत बिक्री पर गंभीर नहीं खनिकर्म महामंडल

    – महामंडल के अध्यक्ष के विधानसभा क्षेत्र में मॉयल को फर्जी रॉयल्टी पर रेत पूर्ति की जा रही

    नागपुर – राज्य की खनिकर्म महामंडल सिरे से निष्क्रिय हैं, जब और जो भी जिम्मेदार रहा उसने महामंडल को चुना ही लगाया।अब जबकि महामंडल के चुनावी क्षेत्र में मॉयल जैसी राष्ट्रीय कंपनी को बिना रॉयल्टी वाली रोजाना सैकड़ों ट्रक रेत पूर्ति की जा रही,यह सब जानकर भी उनकी चुप्पी समझ से परे हैं, फिर महामंडल का कारोबार कैसा चल रहा होगा,इसका अंदाजा लगाया जा सकता हैं।

    जिले के रेत माफियाओं द्वारा मॉइल खदानों के स्थानीय प्रबंधनों के मध्य गहरी सांठगांठ के तहत मैंग्नीज निकालने बाद हुए गड्ढों में भरण के लिए बिना ROYALTY वाले रेत को तरजीह दी जा रही.इस मामलात की जानकारी जिलाधिकारी,संबंधित SDO,तहसीलदार,जिला खनन अधिकारी को होने के बाद भी उनकी चुप्पी उक्त अवैध कृत को बढ़ावा दे रही हैं.

    याद रहे कि मॉइल की नागपुर जिले के कैची(KAICHI) व कांद्री(KANDRI) खदानों से मैंग्नीज उत्खनन बाद हुए गड्ढों को भरने के लिए रेत सह पानी का इस्तेमाल किया जाता हैं.इसके लिए एक ओर विधिवत टेंडर निकाले जाते हैं तो दूसरी ओर फर्जी/बिना रॉयल्टी वाली रेती से गड्ढे भरे जा रहे.बाद में इन्हें टेंडर दर पर भुगतान किया जाता हैं.

    MOIL को फर्जी/बिना रॉयल्टी की रेत आपूर्ति करवाने के लिए रामटेक विधानसभा क्षेत्र के छुटभैय्या तथाकथित नेता सक्रिय हैं,वे वाघोड़ा और पलोरा रेत घाटों से रेत परिवहन कर मॉइल के उक्त खदानों में रोजाना सैकड़ों ट्रक/टिप्पर/ट्रैक्टर रेत डाल रहे.

    उक्त खदानों के परिसर में इन बिना रॉयल्टी वाले गाड़ियों को देखा जा सकता हैं.
    उक्त मामले को लेकर एमओडीआई फाउंडेशन ने मॉइल प्रबंधन से मांग की हैं कि उक्त मामले पर तत्काल पाबंदी लाए और सम्बंधित दोषियों पर कड़क कार्रवाई की जाए.

    उल्लेखनीय यह हैं कि खनिकर्म महामंडल के अध्यक्ष के चुनावी क्षेत्र में चोरी की रेत सरकारी महकमें को दी जा रही,जिसे जिलाधिकारी,उपविभागीय अधिकारी,तहसीलदार का पूर्ण समर्थन हैं, इन माफियाओं को स्थानीय पुलिस,यातायात पुलिस का भी समर्थन हासिल हैं।इस ओर महामंडल के अध्यक्ष की नज़रन्दाजगी,क्या इनका भी रेत माफियाओं को मूक समर्थन हैं या फिर कोई खौफ ? महामंडल के लिए चंद्रपुर जिले के आरक्षित रेत घोटाले का मामला भी इनदिनों काफी गर्माया हुआ है,विभागीय आयुक्तालय जांच में लापरवाही कर रहा क्योंकि इसमें भी सफेदपोशों की मिलीभगत से करोड़ों के रेत अवैध उत्खनन कर निजी ग्राहकों को बेच दिया गया था।

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