Published On : Mon, Oct 23rd, 2017

जाती अंत नहीं हुआ तो स्त्री मुक्ति नहीं हो सक्ति – अहिरे

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नागपुर: सोमवार को अखिल भारतीय महिला क्रांति परिषद् के तृतीय सत्र में वक्ताओं ने शोषित पीड़ित महिलाओ के मुक्ति का मार्ग इस मुख्य विषय पर अपने अपने विचार को विस्तार से पेश किया।

स्मिता पानसरे, अहमदाबाद, अध्यक्ष भारतीय महिला फेडरेशन, महाराष्ट्र, ने महिलाओ के विकास में धर्माधता की बाधाऐ इस विषय पर बहुत ही सुन्दर तरीके से समझाते हुए कहा की यहाँ जो लोग आए है वो सिर्फ सुनने नहीं आए है बल्कि क्रांति के लिए आए है और सभी लोग कोई न कोई रूप से बदलाव लाना चाहते है। स्त्रियों को सिर्फ संघठित होना काफी नहीं है उनमे समजाहदरी आना भी जरुरी है जिससे क्रांति आ सकती है .

कुछ लोग धर्मनदाता के नाम पर षंडयंत्र रच रहे है और इन्ही लोगो के वजह से परिवर्तन नहीं हो रहा है । अगर हमे बाबा साहेब , महत्मा फुले इनके दिखाए हुए सपनो को पूरा करना है तो हमे उसके लिए वास्तविकता को समझने की बहुत जरुरी है । नई पीढ़ी तक धर्म और विज्ञान का मेल करके पहुंचाया जा रहा जो हमारे सामने एक बड़ी चुनौती है । बाबा साहेब की जयंती माननी चाहिए लेकिन कुछ लोग जो जयंती मनारहे है जिसमे बाबा साहेब के नारे लगा रहे है परन्तु उनके विचारो को दफना रहे है ये क्यों किसीने सोचा ? ये सब उनलोगो का षंडयंत्र है ये हमे समझना चाहिए ।

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जेबुनिसा शेख, उमरेड, सामाजिक कार्यकर्ता, इन्होने मुस्लिम स्त्री मुक्ति का संविधानिक लढा इस विषय पर कहा की हम सभ पढ़े , लिखे , हममे समझ आयी सब कुछ हुआ लेकिन बहार निकलकर हमने क्रांति नहीं किया । अगर सारे धर्म के लोगो ने बाबा साहेब से लेकर गौतम बुद्धा के बारे में पढ़ा होता तो शायद अभीतक काफी परिवर्तन होता था । अन्याय करने वाले से ज्यादा अन्याय सहने वाला जिम्मेदार होता है । भारतीय संविधान में बाकि महिलाओ की तरह मुस्लिम महिलाओ को भी अघिकर दिया है । जिससे सही रास्ता मिले वो उंगलिया डॉ बाबा सेब की है ।

डॉ माधुरी थोराट, नागपुर, अतिरिक्त जिल्हा शल्यचिकित्सक डागा हॉस्पिटल, महिलाओ का स्वास्थ और शासकीय योजनाओ की वास्तविकता इस विषय पर सभी उपस्तित महिलाओ को जानकारी दी। उन्होंने कहा की सबसे पहले स्वच्छता की और ध्यान देना चाहिए। बाबा साहेब ने बताए की पुरुषो की तुलना में महिलाओ की समस्या ज्यादा है और इसिलए उनकी स्वास्थ पर ध्यान देना जरुरी है। क्योकि महिला पहले अपने परिवार क बारे में सोचती है फिर अपने स्वास्थ के बारे में , इसिलए बाबा साहेब ने परिवार नियोजन के बारे में सभी स्त्रियों को बताया था । सभी स्त्रियों के मन में क्रांति लाने के लिए उनको परिवार नियोजन की जानकारी दी गयी । परिवार की महिला अगर सशख्त होजाती है तो वह परिवार अछेसे चला सकती है । बाबा साहेब ने उनके १४ ,१५ ,१६ आर्टिकल में महिलाओ को समान अवसर देने क बारे में कहा है ताकि महिलाये अपने पैरो पर खड़ी होजाये । मैटरनिटी लीव के बारे में भी बाबा साहेब ने निकला था । प्रताडित महिला के लिए भी योजनाए बाबा साहेब ने ही लाये थे । आज महिलाओ को शिक्षित होकर संघर्ष करना पड़ेगा जिससे वो अपना स्वास्थ अच्छा रख सकती है ।

प्रतिभा अहिरे , औरंगाबाद, सामाजिक कार्यकर्ता, ने अध्यक्षीय भाषन में कहा बाबा साहेब जी का हमेशा से प्रयास रहा है की हिन्दू धर्म का विकास हो लेकिन कुछ समय में उन्हें समझ आगया की इसमें सुधारना नहीं हो सकती बल्कि उन्होंने उसे नष्ट करने के बारे में सोचा। सभी महिला आज अच्छे कब्दे में है, शिक्षित है, अच्छा खान पान है इससे बहुत ख़ुशी है लेकिन वो पल याद आरहे है जब उस वक़्त महिलाये पुरुषो के धोतर लपेट कर आया करती थी । महिला संघटन तो हो चुका है लेकिन उसका सही तरीके से प्रस्तुति हो रहा है या नहीं । बाबा साहेब के विचारो को हमने जीवन में लाया है या नहीं इसपर सोचना जरुरी है । अहिरे ने आयोजकों से कहा की अगर कोई भाषन देने अत है यहाँ तो यह देखना जरुरी है की वह अम्बेडकरेट है या नहीं, उनके आचार विचार मिलते है या नहीं। हर महिला को अपने पति के साथ दोस्त बनकर खड़ा रहना चाहिए बाबा साहेब ने कहा था लेकिन आज ७५ साल बाद भी नहीं दिख पा रहा है। दलित मुक्ति के बारे में जो बाते है वो महिला नहीं बल्कि मानव मुक्ति की बात है ।
सूत्रसंचालन माधुरी गायधनी व धन्यवाद ज्ञापन वंदना वनकर ने किया ।

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