Published On : Wed, Sep 6th, 2017

अंबाझरी तालाब से किनारे मेट्रो का काम सही या गलत तय करेगा हाईकोर्ट

 
  • निर्माण कार्य के ख़िलाफ़ जनहित याचिका अदालत ने की मंजूर
  • याचिकाकर्ता की दलील कई जिंदगियों को दाव पर लगाकर हो रहा निर्माण


नागपुर:
 नागपुर मेट्रो का काम शहर भर में भले ही तेज गति से शुरू है लेकिन अंबाझरी तालाब के किनारे शुरू निर्माण कार्य को लेकर खड़ा हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब मामला हाईकोर्ट जा पहुँचा है जहाँ तय होगा की निर्माण कार्य सही है या नहीं। हाईकोर्ट ने तालाब किनारे हो रहे निर्माण कार्य पर आपत्ति दर्ज कराने वाली सामाजिक कार्यकर्त्ता मो शाहिद शरीफ़ की जनहित याचिका बुधवार को मंजूर कर ली। जनहित याचिका से जुड़े प्रतिवादियों राज्य सरकार,नगर विकास विभाग,डैम सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन,नागपुर महानगर पालिका,नागपुर मेट्रो और हैरिटेज संवर्धन कमिटी को नोटिस जारी कर मामले में पक्ष रखने को कहाँ गया है।

याचिकाकर्ता की दलील है की मेट्रो के निर्माण कार्य को लेकर नियमों को न सिर्फ़ ताक पर रखा गया बल्कि बिना इजाजद पिछले वर्ष दिसंबर माह से काम शुरू भी कर दिया गया। राज्य सरकार की मध्यस्थता के बाद निर्माण कार्य को लेकर भले ही अब जाकर अधिकृत मान्यता मिल गयी हो पर डैम सेफ़्टी ऑर्गेनाइजेशन के सुझाव की भी अवहेलना की गयी। याचिकाकर्ता की तरफ से दलील दी गयी है की निर्माण कार्य को लेकर जब डैम सेफ़्टी ऑर्गेनाइजेशन से सुझाव माँगा गया। तब उसने अपने चार पन्ने की ज़वाब में स्पष्ट किया था की क़ायदे से डैम से 200 मीटर इलाके में यानि की तालाब की बॉउंड्री वॉल से 10 गुना तक के जमीनी इलाक़े में किसी भी तरह का निर्माण कार्य तालाब के लिए घातक है। बावजूद इसके नियम में परिवर्तन का अधिकार राज्य सरकार के पास है वह चाहे तो इसे बदल भी सकती है।

डीएसओ के सुझाव के बाद मेट्रो ने अपने टेक्निकल कंसल्टेंट इताची इंजीनियर्स से भी सुझाव लिया। जिसमे उस कंपनी ने भी डैम में लीकेज होने की बात कहीं थी। याचिकाकर्ता की दलील है की यह डैम 146 वर्ष पुराना है डैम की दीवार मिट्टी की है इसलिए भारी निर्माण कार्य की वजह से तालाब के ध्वस्त होने का खतरा है। तालाब से साटकट ही रिहायशी इलाक़े है जिससे उनके लिए ख़तरे की संभावना लगातार बनी हुई है। याचिका में दावा किया गया है की इन सभी गंभीतरता को देखते हुए भी तालाब की बॉउंड्री वॉल की सतह से काम हो रहा है। ख़ास बात है की अंबाझरी तालाब नागपुर महानगर पालिका द्वारा बनायीं गयी हैरिटेज की ए श्रेणी में आता है।

याचिकाकर्ता के वकील सतीश मेहता ने साफ़ किया की उनके मुवक्किल का शहर में शुरू विकास कार्य को लेकर किसी भी तरह की आपत्ति नहीं है। चूँकि यह मसाला सीधे तौर पर लोगों की जिंदगियों से जुड़ा हुआ है इसलिए इस गंभीर मसले को अदालत तक लाया गया है। हमारे पास अपने दावे को सही साबित करने के पर्याप्त दस्तावेज़ उपलब्ध है। याचिकाकर्ता मो शाहिद शरीफ़ की तरफ से एडवोकेट अरुण पाटिल,कौस्तुभ पाटिल और सतीश मेहता पैरवी कर रहे है।