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    Published On : Fri, Aug 14th, 2020

    जनता से अपराधियों का कच्चा-चिट्ठा मांगना पुलिस प्रशासन का अपमान ! 

    – राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख का आव्हान से उठ रहे अनगिनत सवाल

    नागपुर – गृहमंत्री अनिल देशमुख ने जिले की जनता से अपराधियों का कच्चा-चिट्ठा मांगा। गृहमंत्री के इस मांग से पुलिस महकमे की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हो गया हैं। दरअसल गृहमंत्री ने पुलिस आयुक्त और ग्रामीण पुलिस अधीक्षक के मार्फत सभी थानों के थानेदारों से उक्त सूची सबूत सह मांग की होती तो गृहमंत्री की सराहना हुई होती। हकीक़त भी हैं कि सभी थानेदारों के समक्ष उनके अधिनस्त इलाकों के अपराधियों की बारीक जानकारियां उपलब्ध हैं, जिनसे समझौता नहीं हुआ वे कैदखाने में और जिनसे हो गया वे आज भी खुलेआम क्षेत्र में अपनी मनमानी कर रहे। कैद में जाने के बाद भी कुछ से समझौता होने पर उन्हें सुख-सुविधा उपलब्ध करवाने में महकमा सक्रिय हैं या फिर पुलिस प्रशासन के कार्यशैली पर गृहमंत्री को शंका हैं ?

    गृहमंत्री का जनता से अपराधियों का कच्चा-चिट्ठा की मांग का दूसरा पहलू यह भी बताया जा रहा कि वे अपने पक्ष के कार्यकर्ताओं को सभी थाना अंतर्गत क्षेत्रों में मजबूत और सक्षम करना चाह रहे हो। इनके तक पहुंचने वाली सूची के मध्यस्थ इनके ही पक्ष के कार्यकर्ता होंगे,जिनकी महती ज़िम्मेदारी से इनके कार्यकर्ताओं की चल पड़ेंगी।   

    यह भी चर्चा हैं कि पुलिस महकमें के आला अधिकारियों,अपराध शाखा और आर्थिक अपराध शाखा से खुलेआम घूम रहे अपराधियों की जानकारी मांगी गई तो उम्मीद के अनुरूप जानकारी नहीं मिल पाई,इससे गृहमंत्री क्षुब्ध बतलाए जा रहे।

    उल्लेखनीय यह हैं कि जिले में रेत सह खनिज सम्पदाओं की चोरी,मादक पदार्थो की बिक्री,जुए के अड्डों का जगह जगह पर बदल बदल कर संचलन, मध्यप्रदेश के शराब की बिक्री,सरकारी जमीनों का जाली कागजात बनाकर दूसरे-तीसरे को बेचना आदि के अनगिनत अनसुलझे मामले आज भी गृह विभाग को आइना दिखा रहे। इनकी सम्पूर्ण जानकारी पुलिस विभाग,जिलाधिकारी अंतर्गत खनन विभाग,आरटीओ,राजस्व विभाग,आबकारी विभाग के पास हैं लेकिन सांठगांठ होने के कारण संबंधित महकमा गृहमंत्री को ‘ऑल इज वेल’ कहकर टाल रही। ऐसे में गृहमंत्री का जनता से आव्हान कर उन्हें आफत में डालने जैसा कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होंगी।


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