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    Published On : Tue, Jun 23rd, 2020

    व्यक्तिगत सम्मान में तुलना तो ठीक, नकारात्मक समीक्षा की तो बुरा : हरीश ग्वालवंशी

    शनिवार को आमसभा में घटित घटना पर कांग्रेसी वरिष्ठ नगरसेवक हरीश ग्वालवंशी ने दी सफाई

    नागपुर – शनिवार को आमसभा के दौरान नगरसेवकों से तीखी नोकझोंक से क्षुब्ध होकर मनपायुक्त तुकाराम मुंढे बिना अनुमति के सभा छोड़ चले गए। जिसकी चर्चा सर्वत्र हुई,आरोप-प्रत्यारोप का दौर राज्य भर में शुरू रहा।इसका ठीकरा कांग्रेस के वरिष्ठ नगरसेवक हरीश ग्वालवंशी के सर फोड़ा गया।

    आज मंगलवार को शनिवार की स्थगित सभा पुनः शुरू हुई। कामकाज शुरू होते ही ग्वालवंशी ने संबोधित करते हुए अपना पक्ष रखा कि जिस दिन पहली मर्तबा मनपायुक्त तुकाराम मुंढे सभागृह में आये थे तब उन्होंने कहा था कि आयुक्त का नाम तुकाराम हैं, महाराष्ट्र में एक संत जो विख्यात हुए जिन्हें संत तुकाराम के नाम से जाना जाता हैं, उन्हीं की भांति नाम के अनुरूप आयुक्त तुकाराम मुंढे मनपा के सर्वपक्ष के नगरसेवकों के साथ न्याय करेंगे। अर्थात उनकी सकारात्मक तुलना संत से की थी,तब उन्होंने आक्षेप दर्ज नहीं किया क्योंकि उनके सम्मान में था।शनिवार को 3 माह बाद आमसभा ली गई,जिसमें पुनः हरीश ग्वालवंशी ने उन पर व्यक्तिगत टिपण्णी करते हुए कहा था कि उन्हें उम्मीद थी कि मुंढे संत तुकाराम जैसा व्यवहार करेंगे लेकिन उन्होंने उनके नाम के अनुरूप काम नहीं किया। ग्वालवंशी ने आगे कहा कि तब आयुक्त मुंढे ने उन्हें व्यक्तिगत टिपण्णी करने से रोक दिया होता तो आज यह नौबत नहीं आती।

    शनिवार को ही ग्वालवंशी के अलावा सत्तापक्ष की ओर से जोरदार शाब्दिक हमला किया गया,हरीश के प्रश्न पर मनपायुक्त सह प्रशासन की बोलती सत्तापक्ष ने बंद सी कर दी,इतना ही नहीं आयुक्त को मनपा आमसभा की नियमावली न पता होने पर भी खिंचाई की गई। इसी बीच आयुक्त मुंढे ने महापौर संदीप जोशी से कहा कि उनकी बेइज्जती की जा रही,वे सभा में नहीं रहेंगे और मंशा बनाए चलते बने।

    उक्त मामला मिनटों में राज्य भर में आग की तरह फैल गई,पिछले 3 दिन में मुंढे के खिलाफ मनपा के नगरसेवकों की पहल की खिंचाई होने लगी तो अपना बचाव में सभी ने हरीश ग्वालवंशी के सर अपना ठीकरा फोड़ कर अपना बचाव करते देखें गए। सच्चाई यह भी हैं कि हरीश ग्वालवंशी के वक्तव्य से पहले ही आयुक्त मुंढे ने महापौर जोशी को अपनी मंशा से रु-ब-रु करवा दिया था और कुछ मिनट रुक चलते बने थे।

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