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    Published On : Tue, Jun 25th, 2019

    बंदूक उठी तो गोली.. बंदूक झूकी तो सलाम

    2 आत्मसमर्पित नक्सलियों को पुनवर्सन योजना के तहत धनादेश सौंपा

    गोंदिया: महाराष्ट्र के अंतिम शोर पर बसे गोंदिया जिले में नक्सल गतिविधियां अब भी जारी है। खासतौर पर देवरी, सालेकसा, केशोरी, अर्जुनी मोरगांव थाने के राजोली जैसे इलाके इस नक्सल समस्या से अब भी जूझ रहे है और जिले में 6 नक्सली संगठन आज भी सक्रिय है लिहाजा शासन ने गोंदिया को नक्सल प्रभावित जिलों की सूची में रखा हुआ है। आज नक्सल समस्या से देश के 10 राज्य ग्रस्त है जहां वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए एक ओर पुलिस और नक्सल ऑपरेशन सेल के कमांडो सख्ती बरत रहे है वहीं दुसरी ओर आत्मसमर्पण करने के इच्छुक नक्सलियों के प्रति नरमी भी बरती जा रही है तथा इन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने वाली पुनवर्सन योजना को समान महत्व देते हुए आगे बढ़ने की सरकार की रणनीति का असर भी अब गोंदिया जिले में दिखने लगा है।

    आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को उनकी ऊंची रैकिंग के हिसाब से पुनवर्सन राशि दी जाती है। जबकि आजिविका शुरू करने के लिए कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण भी दिया जाता है, साथ ही रहने के लिए घर अथवा खेती के लिए जमींन की सहायता भी की जाती है।

    इसी क्रम में केंद्र तथा राज्य सरकार की ओर से नक्सलवादी रंजुला उर्फ अनिता रवेलसिंह हिडामी (17 रा. लवारी पो. पुराड़ा त. कुरखेड़ा जि. गड़चिरोली) जिसने 14 सित. 2018 को आत्मसमर्पण किया था, इसे सामाजिक व आर्थिक पुनवर्सन हेतु नक्सल आत्मसमर्पित योजना के तहत 2 लाख की धनादेश राशि पुलिस अधीक्षक विनीता साहू के हस्ते सौंपी गई। साथ ही गत 27 मई 2019 को जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले जगदीश उर्फ महेश उफर्फ विजय अगनू गावड़े (27 रा. बोडेना पो. मसेली त. कोरची जि. गड़चिरोली) इन्हें भी ढ़ाई लाख का धनादेश 24 जून को सौंपा गया।

    इस अवसर पर मानवी संसाधन शाखा के पुलिस निरीक्षक सुधीर घोनमोडे, पुलिस उपनिरीक्षक महेंद्र सहारे, मुकेश कुरेवाड सहित नक्सल ऑपरेशन सेल गोंदिया के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।

    नक्सलियों से लोहा लेते जख्मी हुए 4 जवानों को भी धनादेश सौंपा

    महाराष्ट्र के गोंदिया तथा छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से सटे पहाड़ी इलाके में नक्सलियोें और पुलिस पार्टी के बीच 20 सित. 2018 को भीषण मुठभेड़ हुई थी। देवरी तथा चिचगड़ के मध्य पड़ने वाले ग्राम कोसबी के निकट स्थित घने जंगल परिसर में नक्सलीयों के मौजुदगी की सूचना मिलने के बाद सी-60 कमांंडो के जवानों ने सुबह से इस इलाके में कोम्बिंग ऑपरेशन चलाया। इस सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने खुद को घिरता हुआ देख, अचानक फायरिंग शुरू कर दी। दोनों ओर से कई राऊंड फायर किए गए। बुलेट का जवाब बुलेट से देते हुए पुलिस दल ने नक्सलियों पर जर्बदस्त प्रहार किया जिससे उन्हें इलाका छोड़कर भागने हेतु विवश होना पड़ा, लेकिन इस नक्सल-पुलिस मुठभेड़ में नक्सल ऑपरेशन सेल देवरी के सी-60 पथक के 4 जवान जख्मी हुए जिनमें पो.ह. शेखर वसंत सोनवाने (ब.नं. 299), पो.ना. रामेश्‍वर नंदुजी राऊत (ब.नं, 1244), नंदकिशोर ब्रिजलाल पटले (ब.नं. 1201), अंजनराव शंकरराव सोडगिर (ब.नं. 2223) का समावेश था।

    इन जवानों ने घायल होने के बाद भी मोर्चा नहीं छोड़ा और नक्सलियों से लोहा लेते रहे। लिहाजा इनकी वीरता और पराक्रम को देखते हुए इन्हें सम्मानित करने का निश्‍चय तत्कालीन पुलिस अधीक्षक हरिश बैजल ने लिया और इस संदर्भ में एक रिपोर्ट तैयार कर सरकार की ओर सादर की।
    अब शासन ने नक्सलियों से लोहा लेने वाले इन जख्मी 4 जवानों को सहानुभूति धनादेश पुरस्कार स्वरूप देने की घोषणा की है। पो.ना. रामेश्‍वर राऊत, नंदकिशोर पटले, अंजनवार सोडगिर इन्हें प्रत्येक को 2 लाख तथा पो.ह. शेखर सोनवाने को 2 लाख 30 हजार का धनादेश 24 जून को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में जिला पुलिस अधीक्षक विनीता साहू ने पुष्पगुच्छ के साथ सौंपकर उनकी हौसला अफजाई की।


    रवि आर्य

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