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    Published On : Fri, May 4th, 2018

    हायर एजुकेशन के लिए नई संस्था ‘हीरा ‘ बनाएगी सरकार


    नागपुर: साल 2019 में होने वाले आम चुनाव से पहले मोदी सरकार हायर एजुकेशन के मामले में एक नया कदम उठाने जा रही है. सरकार ने संसद में देश में हायर एजुकेशन के लिए एक नई संस्था के गठन के लिए बिल लाने जा रही है. सरकार ने इस बिल का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है. बिल के ड्राफ्ट ‘हायर एजुकेशन इवैल्युएशन ऐंड रेग्युलेशन अथॉरिटी, 2018 (HEERA)’या ‘हायर एजुकेशन रेग्युलेटरी काउंसिल (HERC)’ के मुताबिक, एक बार नया रेग्युलेटर बन जाने के बाद अभी काम कर रही नियामक संस्थाएं जैसे यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (UGC), ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) और नैशनल काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (NCTE) को खत्म कर दिया जाएगा.

    इस ड्राफ्ट बिल में बताया गया है कि नया रेग्युलेटर केवल ऐकडेमिक स्टैंडर्ड की व्याख्या नहीं करेगा बल्कि यह इंस्टिट्यूट का मार्गदर्शन करेगा. बिल में यह भी प्रावधान होगा कि किसी इंस्टिट्यूट द्वारा नियमों का फालन नहीं करने पर HEERA के पास उस संस्थान की मान्यता रद्द करने का भी अधिकार होगा. सरकार में इस बिल पर चर्चा पूरी हो गई है और इसे प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जांचा जा रहा है. बता दें कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने अप्रैल में एक 40 पॉइंट के ऐक्शन प्लान की घोषणा की थी जिसमें बताया गया था कि HEERA बिल सितंबर 2018 में संसद में पेश किया जाएगा.

    HEERA बिल के मुताबिक, नई नियामक संस्था एजुकेशन इंस्टिट्यूट्स के लिए क्वॉलिटी स्टैंडर्ड का निर्धारण करेगी जिसमें इंस्टिट्यूट की परफॉर्मेंस का हर साल इवैल्युएशन होगा. सूत्रों के मुताबिक, ऐकडेमिक स्टैंडर्ड्स के लिए यूजीसी द्वारा बनाई गई कई कमिटियों की अनुशंसाओं को भी HEERA में शामिल किया जाएगा. यूजीसी से उलट HEERA ऐसे इंस्टिट्यूट्स का ट्रेनिंग और मार्गदर्शन भी करेगा जो निर्धारित स्टैंडर्ड्स को पूरा नहीं कर पा रहे हैं. HEERA के स्टैंडर्ड को पूरा करने पर ही किसी इंस्टिट्यूट को केंद्र या राज्य सरकारों से मिलने वाले फंड मिल सकेंगे.

    हालांकि इस बात पर अभी भी डिबेट चल रही है कि स्टेट यूनिवर्सिटीज को कैसे HEERA के अंतर्गत लाया जाएगा. नए सिंगल रेग्युलेटरी संस्था में यूजीसी ऐक्ट से अधिक पावर दी जाएंगी. यह संस्था किसी खास कोर्स में किसी इंस्टिट्यूट द्वारा नियमों का पालन नहीं करने पर स्टूडेंट्स को ऐडमिशन दिए जाने पर रोक लगा सकेगी. साथ ही, यह इंस्टिट्यूट में ऐडमिशन ले चुके छात्रों के हितों की रक्षा करते हुए, उसकी मान्यता रद्द कर सकेगा.

    बिल के मुताबिक, HEERA में 10 सदस्य होंगे और इसमें किसी प्रसिद्ध शिक्षाविद को चेयरमैन के तौर पर नियुक्त किया जाएगा जिनकी मदद के लिए 2 वाइस चेयरमैन होंगे. इसमें 3 मेंबर ऐसे होंगे जिन्होंने कम से कम 5 साल तक आईआईटी, आईआईएम, आईआईएससी, आईआईएसईआर जैसी संस्थाओं में बतौर डायरेक्टर काम किया हो. इसके अलावा अन्य 3 सदस्य ऐसे होंगे जिन्होंने स्टेट या सेंट्रल यूनिवर्सिटी में कम से कम 5 सालों तक वाइस चांसलर के तौर पर काम किया हो.


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