Published On : Mon, May 17th, 2021

जैविक ईंधन की ओर गोंदिया के बढ़े कदम

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प्लांट का भूमिपूजन: उर्जा युक्त फसलों से बनेगा बायोफ्यूल

गोंदिया पर्यावरण को बचाने के लिए पूरी दुनिया में वैकल्पिक स्त्रोतों की खोज और अनुसंधान का काम चल रहा है , बायोफ्यूल को 21वीं सदी का फ्यूल कहा जा रहा है। उर्जा के स्वच्छ विकल्पों पर आज सबका ध्यान है । पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करते हुए अब बायोफ्यूल याने जैविक ईंधन की ओर भारत ने कदम बढ़ा दिए हैं तदहेतु केंद्र सरकार ने ‘ जैव ईंधन राष्ट्रीय नीति 2018 ‘ के तहत कई महत्वपूर्ण पहल की है।
बायोफ्यूल (जैव ईंधन ) यानी आम शब्दों में ऊर्जा युक्त फसलों से निकला ईंधन ।

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मसलन: मकई , गन्ना, गेहूं , चावल , आलू , करंजी , महुआ , सूर्यमुखी के पौधे , सफेद सरसों आदि फसलों के अवशेषों सहित केले के पत्ते , पौधों की पत्तियां , जलकुंभी , ताजा गोबर , जैविक कचरे से निकला ईंधन ही बायोफ्यूल है,जिसका उपयोग पेट्रोलियम ईंधन के विकल्प के तौर पर किया जा सकता है।

गोंदिया जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने वाले प्रगत किसान महेंद्र ठाकुर अब जैविक ईंधन के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं उनका मानना है जब तक हमारे देश का किसान अपने खेतों में उर्जा युक्त फसलों का उत्पादन नहीं करेंगे तब तक हमारे देश को ईंधन के क्षेत्र में मजबूत नहीं बनाया जा सकता ?
इसी संकल्पना के साथ पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक एपीजे अब्दुल कलाम को प्रेरणा स्त्रोत मानकर उन्होंने जैविक ईंधन निर्मिती प्रकल्प की शुरुआत अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर की ।

इस प्लांट को मिरा क्लीन फ्यूल लिमिटेड कंपनी के साथ साझेदारी में शुरू किया गया है।मिरा क्लीन फ्यूल्स लिमिटेड कंपनी जापानी टेक्नोलॉजी के माध्यम से बायोगैस निर्मिती करेगी जिसका उपयोग घरेलू गैस और दुपहिया एवं फोर व्हीलर वाहनों को चलाने के लिए किया जाएगा।
एक अनुमान के मुताबिक गोंदिया में प्रतिदिन 4 लाख लीटर पेट्रोल- डीजल की खपत होती है एवं 12000 लीटर घरेलू गैस की खपत होती हैं।

प्रकल्प से किसानों को लाभ मिलेगा ,आमदनी दुगुनी होगी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम पदार्थ के दाम दिनों दिन बढ़ रहे हैं इस प्रकल्प से गोंदिया जिले के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी क्योंकि इस प्लांट से उत्पन्न होने वाली गैस की कीमत विदेशों से आयात होने वाले ईंधन के मुकाबले काफी कम होगी एवं हमेशा उपलब्धता रहेगी।

इस प्रकल्प की शुरुआती क्षमता 10,000 लीटर प्रतिदिन होगी भविष्य में इसे बढ़ाकर 1 लाख लीटर प्रतिदिन किया जाएगा। इस प्रकल्प का संचालन गोंदिया पावर प्रोड्सर कंपनी के माध्यम से किया जाएगा जिसके मुख्य संचालक महेंद्र ठाकुर है। भूमि पूजन के शुभ अवसर पर ठाकुर ने कहा- गोंदिया के किसानों को इससे लाभ मिलेगा तथा उनकी आमदनी दुगने से भी अधिक होगी और गोंदिया जिला पूरे विदर्भ में जैविक खेती के क्षेत्र में अव्वल रहेगा तथा किसानों के खेतों में उर्जा युक्त फसलों की पैदावार होगी।

प्रकल्प का भूमि पूजन रुचि बायो कंपनी लिमिटेड के संचालक श्री राम ठाकुर के शुभहस्ते हुआ ।

इस अवसर पर मार्गदर्शक के रुप में ब्रह्माकुमारी माउंट आबू की कृषि एवं ग्राम विकास की अध्यक्षा राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरला दीदी एवं उपाध्यक्ष राजू भाई , प्रमुख अतिथि के रूप में जिला कृषि अधिकारी गणेश घोरपड़े ,प्रेमलता दीदी , भालचंद्र ठाकुर , प्रवीण चौधरी , इंजि.राजीव ठाकरेले, पंकज चौधरी आदि उपस्थित थे कार्यक्रम में ऑनलाइन ज़ूम ऐप के जरिए देश के जैव ईंधन एवं जैविक खेती से जुड़े अनेकों गणमान्य ने हिस्सा लिया।

गौरतलब है कि भारत में जैविक ईंधन यह सामायिक महत्त्व रखता है क्योंकि यह मेक इन इंडिया , आत्मनिर्भर भारत और स्वच्छ भारत अभियान जैसी चल रही पहलों से यह आयात में कमी , विदेशी मुद्रा की बचत , किसानों की आय में वृद्धि और रोजगार अवसर भी प्रदान करता है इतना ही नहीं जैविक ईंधन के उपयोग से वायु प्रदूषण में 15 से 20% की कमी आएगी।

रवि आर्य

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