Published On : Sat, May 23rd, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

गोंदिया महासंग्राम: 1092 दुकानों पर ‘तालाबंदी’ का नोटिस, मैदान में उतरी NCP, सियासत का पारा सातवें आसमान पर

नगरसेवक लोकेश यादव की खुली ललकार- "दुकानें आपकी थीं, हैं और रहेंगी

गोंदिया। गोंदिया नगर परिषद ने जैसे ही 1092 दुकानदारों को दुकान खाली करने का फरमान (नोटिस) थमाया, पूरे शहर का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस नोटिस के बाद से खौफ और भारी चिंता के साये में जी रहे छोटे व्यापारियों के समर्थन में अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) खुलकर मैदान में उतर आई है। एनसीपी नेता और नगरसेवक लोकेश (कल्लु) यादव ने सीधे तौर पर साफ कह दिया है कि रोजी-रोटी पर राजनीति किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

दुकानदारों के बीच पहुंचे लोकेश (कल्लु) यादव ने उन्हें ढाँढस बंधाते हुए एक बेहद भावुक और कड़ा संदेश दिया।

Gold Rate
May 22- 2026 - Time 10.30Hrs
Gold 24 KT ₹ 160,100 /-
Gold 22 KT ₹ 1,48,900 /-
Silver/Kg ₹ 2,71,200/-
Platinum ₹ 88,000/-
Recommended rate for Nagpur sarafa Making charges minimum 13% and above

उन्होंने गरजते हुए कहा- “व्यापारी और दुकानदार भाइयों को डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। आपकी दुकानें आपकी थीं, हैं और हमेशा आपकी ही रहेंगी। किसी के बहकावे में न आएं। अगर कोई निराकरण के नाम पर भ्रम फैला रहा है या डरा रहा है, तो सीधे हमसे संपर्क करें।”

इस दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस के सभी पार्षदों ने भी दुकानदारों के साथ मजबूती से खड़े रहकर अपनी अटूट एकजुटता दिखाई, जिससे पिछले कई दिनों से खौफजदा व्यापारियों में एक नई उम्मीद और जोश जाग उठा है।

गरीबों की रोजी-रोटी छीनने का पाप कर रहे कुछ लोग!

नगरसेवक लोकेश यादव ने इस दौरान साल 2019 की आमसभा बैठक का पूरा ‘कच्चा-चिट्ठा’ खोलकर रख दिया और प्रशासन को उसकी पुरानी बातें याद दिलाईं।

24 दिसंबर 2019 के इस आमसभा बैठक में दुकानों की पुनः नीलामी (री-ऑक्शन) कर नगर परिषद को करोड़ों रुपये का मुनाफा और भारी सिक्योरिटी राशि मिलने का अनुमान लगाया गया था।

लोकेश यादव ने बेबाकी से बताया कि उन्होंने उसी वक्त इस जनविरोधी काले प्रस्ताव का सदन में पुरजोर विरोध किया था।
यादव ने प्रशासन को आईना दिखाते हुए कहा कि एक दौर ऐसा भी था जब नगर परिषद की दुकानें कोई किराए पर लेने तक को तैयार नहीं था। उस मुश्किल वक्त में इन्हीं व्यापारियों ने आगे आकर नगर परिषद का हाथ थामकर उसका साथ दिया और परिषद का राजस्व (रिवेन्यू) बढ़ाया , मौजूदा वक्त में एक-एक दुकान से चार-चार परिवारों का पेट पलता है अगर दोबारा पुनः नीलामी (री-ऑक्शन) का आत्मघाती कदम उठाया गया, तो एक दुकान उजड़ने से उससे जुड़े चार परिवारों का चूल्हा बुझने का खतरा पैदा हो जाएगा। इसलिए न.प. प्रशासन दुकानदारों के पेट पर लात मारना तुरंत बंद करे।

नियमों की आड़ या “वसूली का खेल”?

गोंदिया में कोई बड़ा उद्योग ना होने की वजह से पहले से ही भारी रोजगार का संकट है। ऐसे में अचानक आए इस ‘दुकान खाली करो’ वाले नोटिस के बाद व्यापारियों में व्यापार ठप्प होने और सड़क पर आने का डर बना हुआ है।
इस पूरे सनसनीखेज घटनाक्रम के बाद अब गोंदिया की जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि-क्या नगर परिषद सचमुच सिर्फ ‘नियमों’ का हवाला देकर यह दंडात्मक कार्रवाई कर रही है ? या फिर व्यापारियों के इस डर के पीछे, पर्दे के पीछे कोई बहुत बड़ा ” वसूली खेल ” चल रहा है ?

क्या पुराने और वफादार दुकानदारों को जबरन हटाकर, मोटी रकम के लालच में ‘पुनः नीलामी’ (री-ऑक्शन) का गुप्त प्लान बनाया जा रहा है ?

एक तरफ नगर परिषद प्रशासन के अधिकतम 9 साल की मियाद वाले कड़े और बेजान नियम हैं, तो दूसरी तरफ 1092 दुकानदारों के हक और अस्तित्व की लड़ाई।

आने वाले दिनों में यह टकराव सिर्फ ‘नगर परिषद बनाम व्यापारी’ तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि यह “गरीब का रोजगार बनाम सरकारी नियम” का एक ऐसा महा-आंदोलन बनने जा रहा है, जिसकी गूंज पूरे सूबे (राज्य) में दूर तक सुनाई देगी।

रवि आर्य

Advertisement
GET YOUR OWN WEBSITE
FOR ₹9,999
Domain & Hosting FREE for 1 Year
No Hidden Charges
Advertisement
Advertisement