Published On : Thu, Jun 25th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

गोंदिया: पूर्व विधायक ‘ थप्पड़ कांड ” में 10 साल बाद आया कोर्ट का ” इंसाफ ” , 4 आरोपी बाइज्जत बरी, हमलावर पार्षद और दोस्त को सज़ा

होटल में हुई थी लाइव 'दबंगई ' , हाई प्रोफाइल केस का फाइनल जजमेंट , पॉलिटिकल थ्रिलर पर कोर्ट की मुहर
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गोंदिया: जिले की राजनीति को हिलाकर रख देने वाले गोंदिया के सबसे हाई-प्रोफाइल और चर्चित ‘पूर्व विधायक थप्पड़ कांड’ में आज पूरे 10 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद इंसाफ की घड़ी आ गई। जिला व सत्र न्यायालय क्रमांक 1 के माननीय न्यायाधीश श्री प्रतिनिधि साहब की कोर्ट ने आज गुरुवार, 25 जून 2026 को इस मामले की फाइनल सुनवाई करते हुए अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है।
​अदालत ने कैमरे के सामने पूर्व विधायक पर हमला करने वाले मुख्य आरोपी भाजपा पार्षद शिव शर्मा और उसके सहयोगी राहुल श्रीवास को धारा 325 में दोषी करार दिया है, वहीं मामले के 4 अन्य सह-आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया है।
फैसले के वक्त सभी आरोपी कोर्ट रूम में मौजूद थे।


फ्लैशबैक: 9 अप्रैल की वो शाम, जब होटल में मचा था गदर
यह पूरा मामला 9 अप्रैल 2016 की शाम का है, जब गोंदिया के तत्कालीन विधायक गोपालदास अग्रवाल रामनगर थाना अंतर्गत कुड़वा क्षेत्र स्थित ‘होटल ग्रैंड सीता’ के हॉल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। विधायक अग्रवाल मीडिया के सामने नगर परिषद के विकास कार्यों में अनियमितताओं को उजागर कर रहे थे। उन्होंने कहा था कि- “नगर परिषद का जो काम है वह अंधेरे में चल रहा है, ई-टेंडर में भी धांधली की खबरें हैं और वह इसकी स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट की मांग करेंगे।”
विधायक अभी बोल ही रहे थे कि शाम करीब 7:00 बजे अचानक भाजपा पार्षद शिव शर्मा और उसका मित्र राहुल श्रीवास होटल के हॉल में दाखिल हुए।

विधायक की टेबल के पास पहुंचे शिव शर्मा गरजते हुए बोले- “तुम हमारी कंप्लेंट करते हो, तुम्हें अभी बताता हूं !”
इतना बोलते ही पार्षद शिव शर्मा ने सारी मर्यादाएं तार-तार करते हुए विधायक के गाल पर 2 से 4 थप्पड़ रसीद कर दिए। हमले में विधायक जब कुर्सी से नीचे गिर गए, तो उन पर ताबड़तोड़ घूंसे बरसाए गए जिससे उनके नाक से खून बहने लगा। पिता को लहूलुहान होते देख जब बेटा विशाल अग्रवाल उन्हें बचाने दौड़ा, तो हमलावरों ने उसके साथ भी हाथापाई की और उसके कपड़े (शर्ट और बनियान) फाड़ दिए। इसके बाद दोनों ओर से जमकर गाली-गलौज हुई।

लाइव कैमरा कभी झूठ नहीं बोलता
चूंकि यह हमला मीडिया कर्मियों की आंखों के सामने लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुआ था, इसलिए पत्रकारों ने इस वारदात की हर एक हरकत और घूंसे को अपने कैमरों में कैद कर लिया था। यही फुटेज इस केस का सबसे बड़ा गवाह बना।

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हाई-प्रोफाइल एफआईआर और पुलिस का एक्शन
इस घटना के बाद पीड़ित विधायक के बेटे विशाल गोपालदास अग्रवाल (निवासी: शंकर गली, गोंदिया) की शिकायत पर रामनगर पुलिस ने अपराध क्रमांक 94/16 के तहत धारा 307 (हत्या का प्रयास), 120-बी (साजिश रचना), 353 (शासकीय कार्य में बाधा), 324, 325, 294, 506 और 34 के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपियों के अलावा कई मददगारों को भी दबोचा था।
13 अप्रैल 2016 को पुलिस ने अभिषेक उर्फ राज लक्ष्मी नारायण दुबे (32, गजानन कॉलोनी) और गजेंद्र रामचरण साठे (30, मरारटोली) को गिरफ्तार किया , इन पर आरोप था कि इन्होंने हमले के बाद पार्षद शिव शर्मा और राहुल श्रीवास को अपनी मोटरसाइकिल पर बिठाकर पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में भगाया था।
9 अप्रैल से फरार चल रहे मुख्य आरोपियों को शरण देने के आरोप में परवेज अब्दुल उर्फ बाबू पटेल खान (40, रामपायली, तहसील भरवेली जिला बालाघाट) और जसजीत सिंह उर्फ बिट्टू भाटिया ( गोंदिया ) को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

अदालत में क्यों फ्लॉप हुईं पुलिस की धाराएं (353 और 307 )?

सुनवाई के दौरान कोर्ट में कानूनी दलीलों की जबरदस्त जंग देखने को मिली। बचाव पक्ष के वकीलों ने पुलिस की थ्योरी को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया।
अदालत ने पाया कि यह पत्र परिषद (प्रेस कॉन्फ्रेंस) एक प्राइवेट होटल में आयोजित थी। वहां कोई भी शासकीय अधिकारी मौजूद नहीं था और न ही टेबल पर कोई सरकारी फाइलें रखी थीं। ऐसे में सरकारी काम में रुकावट की धारा 353 टिक नहीं सकी।
चूंकि ‘कैमरा कभी झूठ नहीं बोलता’, और मीडिया के किसी भी कैमरे के फुटेज में लाठी, डंडा या कोई धारदार हथियार नजर नहीं आया, इसलिए पुलिस द्वारा लगाई गई जान से मारने के प्रयास (धारा 307) की दलील भी कोर्ट में औंधे मुंह गिर गई।

कोर्ट का अंतिम फैसला: कौन हुआ बरी, किसे मिली सजा?

10 साल की लंबी कानूनी पैंतरेबाजी और गवाहियों के बाद आज जिला न्यायालय ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया।
आरोपी क्रमांक 3, 4, 5 और 6 यानी बिट्टू भाटिया, परवेज पठान (उर्फ बाबू खान) ,अभिषेक उर्फ राज दुबे और गजेंद्र साठे को कोर्ट ने सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया।
अदालत ने मुख्य आरोपी भाजपा पार्षद शिव शर्मा (44, निवासी: साईं मंगलम रेजिडेंसी, अयोध्या नगर रिंग रोड) और उसके सहयोगी राहुल हेमराज श्रीवास (30, निवासी: दसखोली, गौशाला वार्ड) को धारा 325 (नाक से खून बहना/गंभीर चोट) के तहत दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।
दिग्गज वकीलों की फौज के बीच हुई जिरह

दिग्गज वकीलों की फौज के बीच हुई जिरह

इस हाई-प्रोफाइल केस को लेकर पूरे जिले की नजरें कोर्ट पर टिकी थीं। अदालत में दोनों पक्षों की ओर से नामी वकीलों ने ताकत झोंकी थी, बचाव पक्ष (आरोपियों की तरफ से) अंतिम दलील एडवोकेट प्रकाश तोलानी ने पेश की। इससे पूर्व नामी वकील एड. प्रकाश जायसवाल (नागपुर) और एड. गिरीश बापट ने भी आरोपियों की ओर से पैरवी की थी।
अभियोजन पक्ष (सरकार की तरफ से) सरकार का मजबूत पक्ष नागपुर के विशेष सरकारी वकील (स्पेशल पीपी) एड. प्रशांत कुमार सत्यानाथन और एडवोकेट कृष्णा पारधी ( गोंदिया) ने अदालत के सामने रखा।
इस फैसले के आते ही कोर्ट परिसर में भारी गहमा-गहमी देखी गई। 10 साल पुराने इस हाई-प्रोफाइल राजनीतिक ड्रामे के पटाक्षेप ने यह साबित कर दिया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और कैमरे की नजर से कोई नहीं बच सकता।

रवि आर्य

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