Published On : Sun, Mar 24th, 2019

गोंदिया-भंडारा में होगा त्रिकोणीय मुकाबला


गोंदिया। इतना सस्पेंस तो किसी फिल्म में भी नहीं होता जितना सस्पेंस गोंदिया-भंडारा संसदीय क्षेत्र के एनसीपी व बीजेपी उम्मीदवार को लेकर अब तक बना हुआ है?

राष्ट्रवादी कांग्रेस में नंबर 2 की हैसियत रखने वाले राज्यसभा सदस्य प्रफुल पटेल अब तक यह तय नहीं कर पा रहे है कि, चुनावी समर में वे खुद उतरे या उम्मीदवारी किसी और को सौंपे? एनसीपी नेता गत 16 मार्च से इस बात पर टकटकी लगाए हुए थे कि आखिरकार भाजपा अपना उम्मीदवार किसे घोषित करती है?

24 मार्च शाम बीजेपी की ओर से जारी लिस्ट में कुनबी समाज के सुनील मेंढे जो कि, मौजूदा भंडारा नगर पालिका में अध्यक्ष पर विराजमान है इनहें बीजेपी ने बतौर उम्मीदवार चुनावी रणभूमि में उतारने का ऐलान कर दिया है।

बहुजन समाज पार्टी ने जिले के 9 लाख महिला मतदाताओं को रिझाने के लिए कुनबी समाज की डॉ. विजया नादूंरकर के उम्मीदवारी की घोषणा कर दी है। इन दो प्रमुख दलों द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बावजूद एनसीपी ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले है।

राष्टवादी दफ्तर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि, जलाराम लॉन भंडारा से कल निर्वाचन अधिकारी कार्यालय तक ढोल-ताशों के साथ जुलूस निकाला जाएगा तथा नामांकन पत्र दाखिल किया जाएगा, लेकिन पार्टी की ओर से अधिकृत उम्मीदवार कौन होगा? इसका फैसला अब तक नहीं लिया गया है।

विश्‍वसनीय सूत्रों की मानें तो एनसीपी ने पांच चेहरे तय किए है जिनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल पटेल, वर्षा प्रफुल टेल, पूर्व राज्यमंत्री नाना पंचबुद्धे, पूर्व गोंदिया जि.प. अध्यक्ष विजय शिवणकर तथा सुनील फुंडे में से कोई एक भाग्य आजमाने उतरेगा?

उल्लेखनीय है कि, गोंदिया-भंडारा जिले में बहुजन समाज तथा आदिवासी मतदाताओं के बीच विशेष पकड़ रखने वाली बीएसपी ने महाराष्ट्र में एकला चलो रे.. की नीति अपनाते हुए गोंदिया-भंडारा संसदीय क्षेत्र से अपना उम्मीदवार उतार दिया है, लिहाजा यह कहा जा सकता है कि, हाथी के मैदान में आ जाने से अब इस सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय होगा।

सनद रहे मई 2018 में हुए उपचुनाव के दौरान बीएसपी ने अपना कैडिडेंट नहीं उतारा था जिसका लाभ एनसीपी-कांग्रेस को मिला और मधुकरराव कुकड़े चुनाव जीत गए।

… रवि आर्य