Published On : Thu, May 6th, 2021

गोंदिया: इंसानियत के दुश्मन , रेमडेसिविर के 2 सौदागर धरे गए

क्राइम ब्रांच ने 15 दिनों के भीतर जिला kts अस्पताल से इंजेक्शन चोरी का दूसरा मामला पकड़ा

गोंदिया : रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वालों की धरपकड़ जारी है, पुलिस खरीदार बनकर जगह-जगह छापे मार रही है । इंसानियत के दुश्मन और जिंदगी के सौदागर नर्स , वार्ड बॉय , ब्रदर और सफाई कामगार कालाबाजारी के आरोप में गिरफ्तार होकर पुलिस कस्टडी में जा रहे हैं लेकिन बड़ा सवाल- इन सबों के लिए जिम्मेदार कौन ? आखिर जिला सरकारी केटीएस अस्पताल के औषधि भंडार गृह में किसके पास रखे होते हैं यह इंजेक्शन ? इन महत्वपूर्ण इंजेक्शनों को संभालने की जिम्मेदारी किसकी ? स्टोर रूम से यह दलालों के हाथों तक कैसे पहुंच जाते हैं ?
कौन है बड़े मगरमच्छ ? क्यों नहीं करता जिला प्रशासन उनके खिलाफ सस्पेंशन की कार्रवाई ?

कोविड वार्ड में भर्ती गंभीर मरीज के पलंग पर , पैरों के पास पड़ी चार्ट ( तख्ति ) में लिख तो दिए कि इसे रेमडेसिविर इंजेक्शन का डोज़ दिया गया लेकिन असल में उसे इंजेक्शन नहीं लगता ? और बाहर उस इंजेक्शन की बिक्री खुले बाजार में रही और पेशेंट जीवन रक्षक दवाओं के अभाव में मर जाता है तो आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है ?

लोकल क्राइम ब्रांच पुलिस को एक बार नहीं 2-2 बार धरपकड़ के केस मिल रहे हैं शासकीय अस्पताल के नर्स , ब्रदर , वार्ड बॉय , सफाई कामगार रंगे हाथों 18 से 20 हजार में इंजेक्शन कालाबाजारी के तौर पर बेचते पकड़े जा रहे हैं आरोपियों को कोर्ट में पेश कर पुलिस उनका पीसीआर ले रही ऐसे में जिले की जनता यही जानना चाहती है -आखिर इन सबों के लिए जिम्मेदार कौन ? अस्पताल प्रशासन कब तक अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता रहेगा , इंसानियत के दुश्मन और जिंदगी के सौदागरों को आखिरकार सस्पेंड क्यों नहीं किया जाता ? इस घिनौने खेल में शामिल स्वास्थ्य विभाग के बड़े खिलाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होती ?


ताजा मामला कुछ इस प्रकार है कि..?
खतरनाक संक्रमण कोरोना से बचाव के लिए कारगर माने जाने वाले रेमडेसिवीर इंजेक्शन की ब्लैक मार्केटिंग के खिलाफ स्थानिक अपराध शाखा दल ने कार्रवाई करते हुए जिला केटीएस अस्पताल के सफाई कामगार व अधिपरिचारक (वार्ड बॉय) को धरदबोचा है।

स्थानिक अपराध शाखा पुलिस टीम को खबरी से 18 हजार रूपये में अवैध रूप से एक रेमडेसिवीर इंजेक्शन की बिक्री होने की गोपनीय जानकारी मिली जिसके बाद पुलिस टीम तत्काल हरकत में आयी और मामले का पर्दाफाश करने हेतु जाल बिछाया।

जिला पुलिस अधीक्षक विश्‍व पानसरे के मार्गदर्शन एंव एलसीबी पुलिस निरीक्षक बबन अव्हाड़ के नेतृत्व में 5 मई को छापामार कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने जिला केटीएस अस्पताल के सफाई कामगार सागर राजेंद्र पटले (20 रा. बड़ा रजेगांव त. किरणापुर जि. बालाघाट) इसे इंदिरा गांधी स्टेडियम के गेट के निकट धरदबोचा और तलाशी में युवक के पास से 2 रेमडेसिवीर इंजेक्शन बरामद किए।

उक्त इंजेक्शन के संदर्भ में कड़ाई से पूछताछ में सफाई कामगार सागर ने बताया कि, उसने यह इंजेक्शन केटीएस अस्पताल में अधिपरिचारक (स्टॉफ ब्रदर) के रूप में कार्यरित अशोक उत्तमराव चव्हान (रा. शास्त्रीवार्ड) से हासिल किए थे।

सफाई कामगार के बयान के बाद एलसीबी टीम ने कार्रवाई करते हुए अशोक चव्हान को उसके घर से गिरफ्तार करते पूछताछ शुरू की जिसपर उसने बताया कि, कोविड के संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए जिला केटीएस अस्पताल के औषधी भंडार में उपलब्ध रेमडेसिवीर इंजेक्शन के स्टॉक से कुछ इंजेक्शन चुराकर वह स्वंय के फायदे के लिए अधिक कीमत पर बेच देता था। कार्रवाई के दौरान 2 इंजेक्शन तथा 2 मोबाइल हैडसेंट इस तरह 32 हजार का माल जब्त किया गया।

बहरहाल इस प्रकरण में आरोपी सागर राजेंद्र पटले (20 रा. रजेगांव) तथा अशोक उत्तमराव चव्हान (रा. शास्त्रीवार्ड गोंदिया) के खिलाफ गैर जमानती धाराओं के तहत शहर थाने में अ.क्र. 275/2021 के भादंवि की धारा 420 , 188, 34 सह कलम 26 औषधि नियंत्रण कीमत आदेश 2013 ,सह कलम 3 (क) 7 जीवन आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 (ईसी एक्ट), सह कलम 18 (क) 27 ( ख ) (2) औषधि व सौंदर्य प्रसाधन कायदा 1940 व नियम 1954 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

विशेष उल्लेखनीय है कि, कोरोना मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले रेमडेसिवीर इंजेक्शन की बेहद डिमांड बढ़ गई है लेकिन कुछ लालची प्रवत्ती के लोग अपने आर्थिक फायदे के लिए उपलब्ध स्टॉक में से इंजेक्शन चुराकर कालाबाजारी करते हुए मरीजों की जान से खिलवाड़ करने में जुटे है।
जीवन रक्षक दवाओं की ब्लैक मार्केटिंग का यह 15 दिनों के भीतर तीसरा मामला है।

उक्त धरपकड़ कार्रवाई जिला पुलिस अधीक्षक विश्‍व पानसरे के मार्गदर्शन तथा एलसीबी के पुलिस निरीक्षक बबन अव्हाड़ के नेतृत्व में पुलिस उप निरीक्षक तेजेंद्र मेश्राम, अभयसिंह शिंदे, सहा. फौ. लिलेंद्रसिंह बैस , चंद्रकात करपे, राजेंद्र मिश्रा, रेखलाल गौतम , तुलसीदास लुटे , महेश मेहर , अजय रहांगडाले, विजय मानकर, संतोष केदार, मपोसि गेडाम द्वारा की गई।

रवि आर्य