
गोंदिया। गुदमा-प्रताप बाग के बीच 18 किलोमीटर की नई रेलवे लाइन परियोजना को लेकर किसानों का गुस्सा अब सड़क पर फूट पड़ा है। भूमि अधिग्रहण के प्रस्तावित मुआवजे से नाराज 12 गांवों के किसान सोमवार, 7 सितंबर को आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आए। आक्रोशित किसानों ने ग्राम कटंगीकला चौराहे पर गोंदिया-बालाघाट राज्य महामार्ग पर जोरदार चक्का जाम कर दिया।
चक्का जाम होते ही हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने वाहनों का रूट डायवर्ट किया।
85 करोड़ मंजूर, किसानों के हिस्से में सिर्फ 45 करोड़?
किसानों का आरोप है कि कटंगीकला, नागरा, हल्बी टोला, सावरी, गुदमा , दागोटोला समेत 12 गांवों की करीब 105 एकड़ बेशकीमती और उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। किसानों का दावा है कि हाईवे से लगी जमीन, खेती, मकान और दुकानों के लिए प्रस्तावित मुआवजा मौजूदा जमीन की कीमत की तुलना में बेहद कम है। किसानों के अनुसार जमीन का बाजार मूल्य 500 करोड़ है , अधिग्रहण के लिए शासन स्तर से 85 करोड़ रुपये का बजट मंजूर कर भेजा गया है, जबकि 105 एकड़ जमीन के लिए करीब 45 करोड़ रुपये का मुआवजा निर्धारित कर एसडीओ कार्यालय की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं।
इसी को लेकर किसानों में जबरदस्त आक्रोश है। किसानों का साफ कहना है कि उचित मुआवजे के बिना जमीन देना मंजूर नहीं है।
मार्केट रेट का 5 गुना मुआवजा दो
चक्का जाम आंदोलन के दौरान किसानों ने अपनी मांगों को लेकर जमकर हुंकार भरी। किसानों की प्रमुख मांगें हैं-
जमीन के मौजूदा बाजार मूल्य का कम से कम 5 गुना मुआवजा दिया जाए।प्रभावित और विस्थापित परिवार के प्रत्येक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। जिन किसानों की आधी जमीन अधिग्रहित होने के बाद बची जमीन अनुपयोगी हो जाएगी, उस पूरी जमीन का भी अधिग्रहण कर उचित भुगतान किया जाए। रेलवे लाइन के कारण खेतों के पारंपरिक पानदन (खेत रास्ते) बंद होने पर पक्की सड़क उपलब्ध कराई जाए।
समाधान नहीं तो आंदोलन होगा उग्र
किसानों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि आज का चक्का जाम महज शुरुआत है। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते लिखित और ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप देकर रेल रोको आंदोलन किया जाएगा।
आंदोलनकारियों ने आत्मदाह जैसे आत्मघाती कदम उठाने की चेतावनी भी दी है। किसानों ने कहा कि यदि स्थिति बिगड़ती है या कोई जनहानि होती है, तो इसकी जिम्मेदारी शासन और रेलवे प्रशासन की होगी।
फिलहाल 105 एकड़ भूमि का अधिग्रहण अब महज सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसानों के लिए अपनी जमीन और भविष्य की लड़ाई बन चुका है। सड़क पर उतरे 12 गांवों के किसानों के इस आंदोलन ने प्रशासन के सामने भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है- विकास की कीमत आखिर किसान अपनी जमीन देकर कितनी चुकाएगा ?
उचित मुआवज़े के बिना जमीन देना मंजूर नहीं !
भूमि अधिग्रहण के प्रस्तावित मुआवजे से नाराज किसानों का कहना है कि उचित मुआवजे के बिना हमें जमीन देना मंजूर नहीं , चाहे इसके लिए शासन कुछ भी कर ले। चक्का जाम आंदोलन स्थल से इस बात की हुंकार ग्राम ग्राम कटंगी के पूर्व सरपंच व पीड़ित किसान अखिलेश सेठ , जिला परिषद सदस्या (पूर्व सभापति ) पूजा अखिलेश सेठ , सुरेश लिल्हारे , जनार्दन बनकर ,नंदूभाऊ बिसेन , गुड्डू मिश्रा , कार्तिक चौहान , अमित बुद्दे , सूरज बावनकर , ईश्वर उपवंशी , मानिकचंद भगत , सुरेश तिवड़े ,कृष्ण बान्ते , इमलाबाई लिल्हारे , हेमंतकुमार हनवते , राजू चन्नेकर , रविंद्रकुमार चिखलोंडे सहित सैकड़ो किसानों ने भरी है।
रवि आर्य




