Published On : Thu, Jan 8th, 2015

घाटंजी की अंजली ने भरी उंची उड़ान

 

  • पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम, कैलास सत्यार्थी ने की सराहना
  • भारतीय विज्ञान परिषद में पेश किया साईकिल पर बना स्वयंचलीत फवारणी मशीन

Anjali Gode
घाटंजी (यवतमाल)। यवतमाल जिले की  घाटंजी तहसील की अंजली गोड़े इस छात्रा ने भारतीय विज्ञान परिषद द्वारा आयोजित राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी में प्रस्तूत की साईकिल पर स्वयंचलीत फवारणी मशीन को देखकर पूर्व राष्ट्रपति डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, कैलास सत्यार्थी समेत मान्यवरों ने उसे शाबासी दी. उल्लेखनीय है कि, उसे इस काम में अध्यापक अतुल ठाकरे ने अच्छा मार्गदर्शन किया. वह भविष्य में खेती में ही अपना भविष्य सवारनेवाली है. स्थानीय शिक्षण प्रसारक मंडल के कन्या स्कूल की अंजली किसान संजय गोड़े की क या है और 10 वीं की छात्रा है. मुंबई में हुए अ.भा. इंडियन साईन्स कांग्रेस इस विज्ञान प्रदर्शनी में उसे सराहा गया.

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यहां पर आए सभी मान्यवरों को यह फवारनी यंत्र ने आकर्षित किया. इस प्रदर्शनी का उद्घाटन पूर्व राष्ट्रपति डा. कलाम ने किया. उस समय उन्होंने अंजली से इस फवारनी मशीन की जानकारी ली. जिसके बाद अंजली और उसके अध्यापक अतुुल ठाकरे तथा नोबल पुरस्कार प्राप्त कैलास सत्यार्थी ने भी इन दोनों की सराहना की. मुंबई में शुरू राष्ट्रीयस्तर की विज्ञान प्रदर्शनी का उद्घाटन 3 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. वहां मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस भी थे. इस विज्ञान प्रदर्शनी में अंजली ने राज्य का नेतृत्व किया.  घाटंजी के खापरी इस गाव की कन्या ने इस तरह उची उड़ान भरते हुए लोगों को देहात में पैदा होने के बावजूद इच्छा हों तो कुछ भी किया जा सकता है.

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यह बता दिया है. सिर्फ ढ़ाई से तीन हजार रुपए यह फवारणी मशीन शुरू होती है, जिसके लिए कोई डीझल या पेट्रोल भी नहीं लगता है. जिससे पर्यावरणपूरक साबित हुई है. साईकिल के पैडल से इस मशीन पर दबाव निर्माण किया जाता है. 10 अलग-अलग नोझल से किटनाशक फंवारा जा सकता है. साईकिल की गति कम हों तो भी फंवारा जा सकता है. साईकिल चलाकर एक आदमी भी फवारनी कर सकता है. जिससे यह किटनाशक शरीर पर पडऩे या फवारनेेवाले के मुंह में जाने का खतरा भी नहीं है.

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