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    Published On : Thu, Jan 3rd, 2019

    गांधीवादी चंद्रशेखर धर्माधिकारी पंचतत्व में विलीन

    नागपुर : वरिष्ठ गांधीवादी,पद्मभूषण पूर्व न्यायाधीश चंद्रशेखर धर्माधिकारी पंचतत्व में विलीन हो गए। उनका दिल का दौरा पड़ने के बाद नागपुर के निजी अस्पताल में ईलाज चल रहा था। बुधवार-गुरुवार की रात 1 बजकर 30 मिनट पर उन्होंने अंतिम साँस ली। गुरुवार को अंबाझरी घाट पर उनकी बेटी डॉ अरुणा पाटिल ने उन्हें मुखाग्नि दी। चंद्रशेखर धर्माधिकारी को राजकीय सम्मान के साथ शोकाकुल वातावरण में विद्युत् शव दहन गृह में अंतिम संस्कार किया गया। 91 वर्षीय धर्माधिकारी वरिष्ठ गांधीवादी थे। उन्होंने जीवन भर गाँधी के विचारों को आत्मसाथ किया। उनके निधन में गांधीवादी आंदोलन और सामाजिक क्षेत्र को बड़ी क्षति के रूप में महसूस किया जायेगा। श्री धर्माधिकारी गाँधी की तरह विनोबा के विचारों के काफी प्रेरित रहे।

    उनके शरीर को अंतिम दर्शन के लिए नागपुर के सर्वोदय आश्रम में रखा गया था। अंतिम संस्कार के समय उनके पुत्र न्यायाधीश सत्यरंजन धर्माधिकारी के साथ डॉ आशुतोष धर्माधिकारी,डॉ अरुणा पाटिल, न्या. डी. एन. धर्माधिकारी, न्या. आर. के. देशपांडे, न्या. विकास शिरपूरकर, उद्योगपती राहुल बजाज, डॉ. अभय बंग, राणी बंग, अशोक जैन गाँधी संशोधन प्रतिष्ठान,सेवाग्राम आश्रम समिति के राहुल बजाज,बजाज समूह की विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी न्यायाधीश जे ए हक़,अतुल चांदुरकर, मनीष पिंपळे, रोहित देव, व्ही. एम. देशपांडे, मुरलीधर गिरडकर, विनायक जोशी, गांधीवादी सुगंध बरंठ, जयंत मटकर, महात्मा गांधी आंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्व विद्यालय के प्रो. मनोज कुमार, कुलसचिव प्रो. के. के. सिंह. मा. म. गडकरी, गौतम बजाज के साथ बड़ी संख्या में उनसे जुड़े लोग और शोकाकुल परिवार उपस्थित था।

    घाट पर न्यायाधीश आर के देशपांडे की अध्यक्षता में शोक सभा हुई जिसमे मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। राज्य के शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने चंद्रशेखर धर्माधिकारी के घर जाकर उनके शोकाकुल परिवार को अपने संवेदनाएं व्यक्त की।

    मानवतावादी बड़ा व्यक्ति खोया-राज्यपाल
    न्या. चंद्रशेखर धर्माधिकारी निधन पर महाराष्ट्र के राज्यपाल चेन्नमनेनी विद्यासागर ने कहाँ कि हमने श्रेष्ठ मानवतावादी व्यक्तित्व और सच्चे गांधीवादी को खो दिया। देश की आजादी में योगदान देने वाले परिवार में जन्म वाले धर्माधिकारी के मन में बचपन से ही गाँधी विचारों का प्रभाव रहा। मुंबई उच्च न्यायालय में उनका सम्मान था। उन्होंने कई अहम फैसले सुनाये। वो एक प्रभावी व्यक्तित्व के धनि होने के साथ प्रखर वक्त और लेखक थे।

    समाज उनके योगदान को नहीं भूल सकता – पुरोहित
    राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने अपनी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहाँ की चंद्रशेखर धर्माधिकारी के योगदान को समाज नहीं भुला सकता। मेरे लिए उनका जाना निजी क्षति है। गाँधी के विचारों को बढ़ाने का काम उनके द्वारा हुआ है।

    भावी पीढ़ी का मार्गदर्शक खोया -मुख्यमंत्री
    मुख्यमंत्री ने चंद्रशेखर धर्माधिकारी के निधन पर अपने शोक संदेश में कहाँ कि भावी पीढ़ी का मार्गदर्शन हमने को दिया है। न्या. धर्माधिकारी अपने पिता वरिष्ठ विचारक दादा धर्माधिकारी के वैचारिक और सामाजिक कार्य को आगे बढ़ा रहे थे। गाँधी के विचारों को नई पीढ़ी से अवगत कराने का काम उन्होंने किया। काम उम्र में स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के साथ वह न्याय के क्षेत्र में सक्रीय रहे। उनके द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण फैसलों से दिशा निर्माण हुई है।

    श्रेष्ठ कार्यकर्त्ता समाज ने खोया – नितिन गड़करी
    नितिन गड़करी ने अपनी भावना प्रकट करते हुए दिवंगत चंद्रशेखर धर्माधिकारी को श्रेष्ठ कार्यकर्त्ता बताया। उन्होंने अपनी संवेदना में कहाँ कि धर्माधिकारी जी ने समाज के वंचितों के लिए काम किया। न्यायाधीश रहते हुए उन्होंने महिला,आदिवासी,बच्चों,मानसिक रोगीयो के अधिकारों को देने का काम किया। आपातकाल के समय नागरिक अधिकारों को लेकर दिया गया उनका निर्णय चर्चित रहा। सेवा से निवृत होने के बाद उन्होंने अपना जीवन समाज को समर्पित कर दिया।

    धर्माधिकारी ने न्याय क्षेत्र को दिशा दिखाई-ऊर्जा मंत्री
    राज्य के ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने शोक संदेश में कहाँ कि उन्होंने न्याय क्षेत्र को दिशा देने का काम किया। 17 वर्ष बतौर न्यायाधीश उन्होंने न्याय देने का काम किया। उनका जाना समाज के लिए बड़ा नुकसान है।

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