
नागपुर – शहर में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। साइबर जालसाजों ने अलग-अलग तरीके अपनाकर तीन बुजुर्गों को अपने जाल में फंसा लिया। पेंशन कार्ड बनवाने, रेलवे में पेंशन संशोधन कराने और पुराने नोट-सिक्के बदलकर मोटी रकम दिलाने का झांसा देकर आरोपियों ने तीनों से कुल 60 लाख 73 हजार रुपए ऐंठ लिए। शिकायत मिलने के बाद साइबर पुलिस ने तीनों मामलों में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पेंशन कार्ड के नाम पर 5.49 लाख की ठगी
पहली घटना अजनी थाना क्षेत्र की है। पीडब्ल्यूडी के सेवानिवृत्त कर्मचारी राजेश वाघमारे (60) को 16 सितंबर को अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। आरोपी ने पेंशन कार्ड बनवाने की बात कहते हुए वाघमारे को एक लिंक भेजा और उसमें बैंक तथा डेबिट कार्ड से संबंधित जानकारी भरने के लिए कहा।
लिंक पर जानकारी दर्ज करते ही उनके बैंक खाते से 5 लाख 49 हजार रुपए की रकम अनधिकृत रूप से निकाल ली गई। ठगी का पता चलने के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
खुद को मंडल रेल प्रबंधक बताकर 31.97 लाख उड़ाए
दूसरी वारदात रामेश्वरी रिंग रोड निवासी रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी विजय ढबरे (61) के साथ हुई। आरोपी ने अपना नाम धर्मेंद्र यादव बताते हुए खुद को मंडल रेल प्रबंधक बताया। उसने ढबरे को पेंशन संशोधन कराने का झांसा दिया।
इसके बाद आरोपी ने व्हाट्सऐप के जरिए फर्जी दस्तावेज भेजे और फॉर्म भरने के बहाने बैंक खाता, एटीएम कार्ड तथा सीवीवी की जानकारी हासिल कर ली। जानकारी मिलते ही आरोपियों ने बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र में मौजूद खातों से कुल 31 लाख 97 हजार रुपए निकाल लिए।
पुराने नोट-सिक्कों के बदले 55.21 लाख का लालच
तीसरी घटना अभ्यंकर नगर निवासी पिलाजी विठोबा सोमकुंवर (66) के साथ हुई। जालसाजों ने पुराने नोट और सिक्के बदलने पर उन्हें 55.21 लाख रुपए मिलने का लालच दिया। इसके लिए आरोपियों ने ‘ओल्ड क्वाइन ओनर 17’ नामक व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए उनसे संपर्क किया।
जालसाजों ने सरकारी टैक्स, बीमा और स्टैंप शुल्क के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर सोमकुंवर को विश्वास में लिया। इसके बाद अलग-अलग शुल्क के बहाने उनसे आरटीजीएस के जरिए विभिन्न बैंक खातों में 23 लाख 26 हजार रुपए ट्रांसफर करवा लिए।
मोबाइल नंबर और बैंक खातों की जांच शुरू
तीनों मामलों में साइबर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और ऑनलाइन लेनदेन की तकनीकी जांच कर रही है। साइबर पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन वारदातों के पीछे एक ही गिरोह है या अलग-अलग साइबर ठगों के नेटवर्क सक्रिय हैं।




