Published On : Tue, Mar 17th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

कोंडागांव अध्ययन दौरे में विदर्भ के किसानों ने आधुनिक नारियल खेती मॉडल का अध्ययन किया

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फसल विविधीकरण तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से Vidarbha Industries Association (VIA), नागपुर के Agro, Rural Development & Food Processing Forum द्वारा विदर्भ क्षेत्र के किसानों के लिए आधुनिक नारियल खेती पर चार दिवसीय अध्ययन दौरे का आयोजन किया गया। यह अध्ययन दौरा 13 से 16 मार्च 2026 के दौरान Kondagaon में आयोजित किया गया, जिसमें नागपुर सहित विदर्भ के विभिन्न जिलों के लगभग 45–50 किसानों ने भाग लिया।

यह अध्ययन दौरा Coconut Development Board के सहयोग से आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक नारियल खेती, बहु-फसली खेती प्रणाली, नर्सरी प्रबंधन, रोग नियंत्रण तथा नारियल आधारित कृषि में मूल्य संवर्धन के अवसरों के बारे में जानकारी देना था।

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Mar 16 2026 - Time 11.45Hrs
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दौरे के दौरान किसानों ने कोंडागांव स्थित नारियल विकास बोर्ड के नारियल फार्म का भ्रमण किया। यहां विशेषज्ञों ने उपयुक्त नारियल किस्में, रोपण तकनीक, नर्सरी प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा वैज्ञानिक कटाई-तोड़ाई पद्धतियों के बारे में विस्तृत मार्गदर्शन दिया। किसानों को नारियल बागानों में कोको, काली मिर्च, आम तथा लीची जैसी फसलों की अंतरफसल प्रणाली के व्यावहारिक प्रदर्शन भी दिखाए गए। इससे किसानों को समझ में आया कि नारियल बागानों को बहुस्तरीय खेती प्रणाली में बदलकर उत्पादन और आय बढ़ाई जा सकती है।

अध्ययन दौरे का एक प्रमुख आकर्षण प्रगतिशील किसानों के साथ संवाद रहा। प्रतिनिधिमंडल ने बस्तर जिले के बकावंड में Shubham Singh Rathod के फार्म का दौरा किया। उनके फार्म में नारियल आधारित एकीकृत कृषि मॉडल विकसित किया गया है। यहां नारियल के साथ 52 किस्मों के आम, वाटर एप्पल, अनानास की अंतरफसल, नारियल के नीचे कॉफी की खेती तथा हरी मिर्च और टमाटर जैसी सब्जियां उगाई जाती हैं। इस मॉडल ने दिखाया कि वैज्ञानिक योजना और विविधीकरण के माध्यम से खेती की आय को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया जा सकता है।

किसानों ने Rajaram Tripathi के फार्म का भी दौरा किया, जहां समतल क्षेत्रों के लिए उपयुक्त काली मिर्च की विशेष खेती प्रणाली विकसित की गई है। इस मॉडल में काली मिर्च की बेलें लगभग 50 फीट ऊंचाई तक बढ़ाई जाती हैं और प्रति पौधा 8 किलोग्राम से अधिक उत्पादन प्राप्त किया जाता है। यह खेती पूरी तरह जैविक पद्धति, प्राकृतिक मल्चिंग और मृदा कार्बन संवर्धन पर आधारित है।

अध्ययन दौरे के दौरान किसानों को नारियल आधारित बहुस्तरीय खेती प्रणाली के बारे में भी जानकारी मिली, जिसमें नारियल के साथ अनानास, कॉफी, अमरूद, कोको, काली मिर्च और बौनी किस्म के आम जैसी फसलें उगाई जा सकती हैं। विशेष रूप से अरुणिमा आम जैसी उच्च मूल्य वाली किस्मों में किसानों ने गहरी रुचि दिखाई।

इस अध्ययन दौरे का समन्वय श्री संजय सिन्हा, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, द्वारा किया गया। यह पहल शाची मलिक, संयोजक – VIA Agro, Rural Development & Food Processing Forum के नेतृत्व में आयोजित की गई।

इस दौरे में VIA Agro Forum के सदस्य श्री लक्ष्मीकांत पाडोले तथा डॉ. किर्ती सिरोठिया ने सक्रिय सहभागिता की। उनके मार्गदर्शन और सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

दौरे के दौरान स्थानीय समन्वय और व्यवस्थाएं Coconut Development Board की फील्ड टीम ने रवींद्र सिंह के नेतृत्व में कुशलतापूर्वक संभालीं।

यह अध्ययन दौरा किसानों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी सिद्ध हुआ। आधुनिक नारियल खेती तथा विविधीकृत कृषि मॉडल का अनुभव प्राप्त होने से विदर्भ क्षेत्र में नारियल आधारित बहुस्तरीय खेती विकसित करने की नई संभावनाएं सामने आई हैं। ऐसे प्रयास किसानों को फसल विविधीकरण, टिकाऊ कृषि और नवाचारपूर्ण खेती पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे।

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