Published On : Mon, Jun 12th, 2017

लीपापोती में लगे महाजेनको का हुआ भंडाफोड़ : करोड़ों का युनिट और बेंचा था कौडियों के दाम

Mahagenco
नागपुर:
महाजेनको ने कोरडी की पुराने ४ यूनिट( १२० मेगावॉट की ३ और १०५ मेगावॉट की १ यूनिट) को कबाड़ में तब्दील कर कौड़ी के मोल बेच दिया। जबकि यह यूनिट कुछ साल पूर्व वर्ष २०१० तक कार्यरत था. घटिया कोयले के उपयोग से ऊर्जा निर्मित नहीं हो पा रही थी. जिसको तय योजना तक २०१२ में कबाड़ दर्शाकर अंकेक्षण करवाया गया. अंकेक्षण के पश्चात् उसका बिक्री मूल्य ६०.६० तय कर बेचने के लिए विभाग सक्रीय हुआ. जबकि खरीदने वाले एवं महाजेनको के जानकारों का दबी जुबान में कहना है, की उक्त कबाड़ ‘२५ पैसे” में आसानी से बेचा गया, जिसमें अप्रत्यक्ष मददगारों का शेयर है. उक्त मामले को सर्वप्रथम ‘नागपुर टुडे’ ने सार्वजनिक किया था.

उक्त विवादस्पद कबाड़ का खरीददार सनविजय रिरोलिंग इंजीनियरिंग वर्क्स भी एक चर्चित समूह है. कुछ माह पहले इनका २५ करोड़ रूपए रामदासपेठ निवासी एक शातिर डकार गया, क्योंकि यह रकम कालेधन की श्रेणी में आता है, इसलिए इन्होने उक्त शातिर पर कोई पुलिसिया कार्रवाई करने से हांथ खींच लिए. इसके अपने ‘रेडी टु इट ” प्रोडक्ट का उत्पादन शुरू किया, जिसके के कारन यह समूह फीर एक बार चर्चा में आया. यह प्रोडक्ट देश की नामचीन निर्माताओं के प्रोडक्ट्स से काफी महँगा होने से भी चर्चा में आया है. इसके साथ ही, एक लोहे के व्यापारी का खाद्द्य-पदार्थ निर्माण क्षेत्र में कूदना भी संदेह उत्पन्न कर रहा था।

उक्त तथाकथित कबाड़ को बड़ी योजनाबद्ध तरीके से नीलामी का चोला पहनाया गया.नीलामी में एक ही कम्पनी ने भाग लिया,जो कि तय रणनीति का हिस्सा था,उसे ही तवज्जों दिया गया.जिसमें खादी व खाकीधारी दोनों का बराबरी का हाथ है.इस मामले का सार्वजानिक होने के बाद अगर राज्य सरकार ने शर्मिंदा होकर बड़ी कार्रवाई भी की तो खादीधारी को बचाकर खाकीधारी में से किसी को शहीद कर दिया जाएगा।इस मामले में जिस विशेष खादीधारी की चर्चा हो रही है,उसके उसके आका केन्दीय मंत्री का आशीर्वाद है और राज्य के सर्वोच्च खादीधारी अक्सर नज़रअंदाज करते रहते है,क्योंकि विवादस्पद खादीधारी जो उक्त नीलामी से जुड़ा है,वह आरएसएस के अगले सर्वेसर्वा का निकटवर्ती है. फ़िलहाल मामला कहीं राजनैतिक तूल न पकडे इसलिए विभाग द्वारा लीपापोती का दौर जारी है.