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    Published On : Thu, Apr 26th, 2018

    अवैध निर्माणकार्य पर एम्प्रेस मॉल के खिलाफ ‘एफआईआर’ दर्ज करवाने में आनाकानी कर रही मनपा

    Empress Mall

    नागपुर: एम्प्रेस मॉल के अवैध निर्माण को लेकर जहां हाईकोर्ट की ओर से कई बार मनपा प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर फटकार लगाई गई, तो दूसरी ओर न्यायालय के आदेश ‘जैसे थे” होने के बावजूद एम्प्रेस मॉल प्रबंधन धड़ल्ले से बांधकाम शुरू रखे हुए है. जबकि मनपा धंतोली ज़ोन के वार्ड अधिकारी को तत्काल सम्बंधित थाने में ‘एफआईआर’ दर्ज करना चाहिए था. ‘एफआईआर’ दर्ज न करवाना अर्थात दाल में काला नज़र आ रहा है.

    सफेदपोशों और तत्कालीन वार्ड अधिकारी की शह के कारण मनपा प्रशासन को संपत्ति व जल कर के नाम पर करोड़ों का नुकसान हुआ है. वहीं आम नागरिक का मसला रहा तो नल कनेक्शन खंडित और संपत्ति निलामी पर चढ़वरही है.

    गत सप्ताह मनपा की सभा में प्रश्नकाल के दौरान पूर्व महापौर प्रवीण दटके द्वारा मुद्दा उठाए जाने से प्रशासन की पोल खुल गई. चर्चा करते हुए दटके द्वारा दिए गए वक्तव्य के अनुसार अवैध निर्माण को लेकर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान पहली बार 17 मार्च 2017 को अदालत ने ‘जैसे थे’ के आदेश दिए थे.

    अब दूसरी बार 12 अप्रैल 2018 को पुन: ‘जैसे थे’ के आदेश दिए गए, लेकिन इस दोनों के बीच मनपा अधिकारियों की लापरवाही और नजरअंदाज किए जाने से एक लाख वर्गफुट से अधिक का अवैध निर्माण किया गया है. नियमों के अनुसार ‘जैसे थे’ के आदेश के बाद यदि निर्माण जारी रहा, तो मनपा ने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया जिससे सम्पूर्ण मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग उन्होंने की. चर्चा के उपरांत महापौर नंदा जिचकार ने 1 माह के भीतर जांच पूरी कर सदन में रिपोर्ट पेश करने के आदेश आयुक्त को दिए थे.

    न्यायालय के 4 मंजिल आदेश के बाद हो गई 9 मंजिल

    चर्चा के दौरान दटके ने कहा कि 17 मार्च 2017 को पहली बार उच्च न्यायालय की ओर से ‘जैसे थे’ का आदेश देते समय यहां केवल 4 मंजिल का निर्माण हुआ था. जबकि दूसरी बार जैसे थे आदेश देने तक 9 मंजिल तक का निर्माण कर लिया गया. उन्होंने कहा कि यदि जैसे थे का आदेश होने के बावजूद निर्माण किया जा रहा था. तो मनपा के अधिकारियों ने उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की. वहीं सामान्य नागरिक द्वारा अवैध निर्माण करने पर 53 का नोटिस देने के बाद समय खत्म होते ही अवैध निर्माण तोड़ने की कार्रवाई होती है. लेकिन इस तरह से भारी अनधिकृत निर्माण होने के बावजूद मनपा की ओर से किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई. उच्च न्यायालय में मनपा की ओर से दिए गए हलफनामा को लेकर भी खिंचाई करते हुए उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में आयुक्त के साथ हुई बैठक में इन तमाम आंकड़ों के साथ अदालत में हलफनामा दायर करने का निर्णय लिया गया था. लेकिन अदालत के समक्ष इतना अनधिकृत निर्माण होने की जानकारी ही नहीं रखी गई. आयुक्त के आदेशों का भी अधिकारियों की ओर से पालन नहीं किया गया.

    सार्वजनिक सवाल पर बगले झांकने लगे सभी

    मनपा प्रशासन को उस समय सांप सूंघ गया. जब दटके ने पहली बार उच्च के आदेश के बाद किन अधिकारियों द्वारा यहां जाकर निरीक्षण किए जाने की जानकारी सदन में रखने की मांग की. उनकी मांग पर प्रशासन की ओर से किसी भी तरह का जवाब नहीं दिया गया. बताया गया कि पहली बार एम्प्रेस मॉल की ओर से नक्शा मंजूरी के लिए 2006 में प्रस्ताव दिया गया था, जिसके अनुसार 5 भूखंड पर निर्माण किया जाना था. भूखंड क्रमांक 1 और 2 आईटी और आवासीय निर्माण तथा भूखंड क्रमांक 5 पर एम्प्रेस मॉल का निर्माण किया जाना था. 2009 में प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी, लेकिन अवैध निर्माण होने के बाद 2013 में नोटिस जारी किया गया. वर्ष 2015 में भी नोटिस जारी किया गया. 26 अगस्त 2015 को अवैध निर्माण की कार्रवाई कर 1 लाख का जुर्माना वसूला गया. सम्पत्ति कर को लेकर 9.60 करोड़ का डिमांड जारी किया गया. हालांकि मॉल की ओर से सुधारित नक्शा मंजूरी के लिए डाला गया था, लेकिन उसे मंजूरी नहीं दी गई. अब न्यायालय में मामला चल रहा है.

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    पहले विरोधकर्ता को मिली थे फ्लैट ?
    उक्त मामलात को उछालने वाले तत्कालीन महापौर को उसके ही पक्ष के दिग्गज नेता ने मामला न उठाने की हिदायत दी और साथ में इसके बदले इस महापौर को एम्प्रेस मॉल प्रबंधन से एक फ्लैट ‘फ्री’ में दिलवाया था. इसके बाद इस परिसर में अवैध निर्माणकार्य का सिलसिला जारी रहा. लेकिन कार्रवाई के नाम पर मनपा और धंतोली प्रशासन की चुप्पी समझ से परे है. यहां तक की न्यायालय के आदेश के बाद किए गैर अवैध निर्माणकार्य को उक्त अतिक्रमण ढहाने के लिए आज तक मनपा प्रशासन ने अतिक्रमण विभाग को फाइल न सौंपना कई सवाल खड़े कर रहा.

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