Published On : Sat, Apr 29th, 2017

अंतिम बहस में खड़से के वकील ने जाँच समिति की शक्ति पर लगाया प्रश्नचिन्ह

Eknath Khadse
नागपुर:
 भोसरी ज़मीन खरीद मामले में हुए गैरव्यवहार की जाँच कर रही न्या डी झोटिंग समिति के सामने शनिवार को फिर एक बार दोनों पक्षों के बीच बहस हुई। इस बहस के दौरान इस मामले में फंसे राज्य के पूर्व राजस्व मंत्री की तरफ़ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील एम जी भांगड़े ने जाँच समिति के अधिकार पर प्रश्नचिन्ह खड़ा किया। अपनी अंतिम दलील में खड़से के वकील ने कहाँ की राज्य सरकार ने समिति के कार्यकाल को बढ़ाने के संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किया है जिस वजह से समिति शक्तिविहीन हो गयी है। इससे आगे अपना तर्क रखते हुए खड़से के वकील ने कहाँ कि एमआयडीसी का जाँच समिति के सामने अपना पक्ष ऱखने का सीधा संबंध और अधिकार नहीं है।

खड़से के वकील ने बहस के दौरान कई दलीलें दी जिसमें से एक में कहाँ गया कि एमआयडीसी की जिस जमीन की खरीददारी को लेकर जाँच शुरू है उसके मालिक ऊकानी को अब तक किसी तरह का मुआवजा नहीं मिला है और ना ही अधिग्रहण को पूरा किया गया है। ऐसे में उसे अपनी संपत्ति बेचने का अधिकार है। ज़ोर देकर यह बात भी कहीं गयी की इस व्यवहार से न ही सरकार को नुकसान हुआ है और न ही एकनाथ खड़से को फ़ायदा। अपनी दलीलों और तर्कों को सही साबित करने के लिए खड़से के वकील ने ऐसे ही मामलों में कई न्यायालयों में हुए फ़ैसले भी जाँच समिति के सामने प्रस्तुत किये।

जाँच समिति के सामने खड़से की तरफ़ से बहस पूरी हो चुकी है। इसी मामले से जुड़े दूसरे पक्ष एमआयडीसी के वकील चंद्रेशखर जलतारे ने खड़से के वकील द्वारा जाँच समिति की शक्ति पर उपस्थित की गई दलील के ज़वाब में अपना पक्ष रखते हुए कहाँ कि जाँच समिति शक्तिविहीन नहीं हुई है। सरकार ने समिति के अधिकार के संबंध में ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है। जलतारे ने आगे कहाँ की यह समिति मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करने के लिए गठित की गयी है। किसी विशिष्ठ आदेश के पारित न होने की वजह से यह डीम्ड एक्सटेंशन में कार्यरत समझी जा सकती है। समिति की अगली सुनवाई 2 मई को रखी गयी है जिसमे एमआयडीसी के वकील अपनी बहस के मुद्दे उपस्थित करेंगे।