मनपा के तंग हाल व समन्वय अभाव से शहर राम-भरोसे

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– जिसे नब्ज की जानकारी वह काट रहा मजे
– नए-नवेले नगरसेवक-पदाधिकारी पचता रहे
– घाघ अधिकारी,नगरसेवक व कर्मी मजे में
– वर्ष २०१७ – १८ का आम बजट जून के दूसरे सप्ताह में

नागपुर: नागपुर महानगरपालिका पिछले कुछ सालों से आर्थिक संकट और शहर की जनसंख्या के हिसाब से जरूरतानुसार कर्मी सह अधिकारियों के आभाव में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है.इतना ही नहीं नए आयुक्त और नए पदाधिकारी-नगरसेवक को मनपा की कार्यप्रणाली समझ नहीं आने से कोई उल्लेखनीय कदम नहीं उठा पा रहे है.नतीजा यह हो रहा है कि शहर व यहाँ के रहवासी मुलभुत सुविधा से महरूम होते जा रहे है.

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आर्थिक संकट- राज्य सरकार ने आय के स्रोत ध्वस्त कर दिए.इसके एवज में अल्पतम अनुदान देने का आश्वासन दिए,कुछ माह नियमित दिए और बाद में रोने-गाने पर टुकड़ों-टुकड़ों में दे रहे है.साथ ही मनपा के लिए घोषित अनुदान आदि की राशि देने के मामले ठंडे बस्ते में है.कर्मचारियों सह पेंशन धारियों को ५० से ६० दिन बाद वेतन/पेंशन दिया जाता है.निधि के आभाव में विकास कार्य ठप है,सिर्फ व्यक्तिगत इच्छा से ओतप्रोत कार्य जारी है.इसके अलावा बेफजूल खर्चे का कोई ऑडिट नहीं होने से लाभार्थी मदमस्त है.मनपा लेखा व वित्त विभाग में अंधेरगर्दी चौपट राजा वाली कहावत चरितार्थ हो रही है.मनपा के आय व अनुदान से विभाग प्रमुख खेल रहे है.विशेष मद्द के लिए आरक्षित राशि को मनचाहे मद्द में ट्रांसफर कर अपने मंसूबे को अमलीजामा पहना रहे है.मद्दों की बारीकियां समझने वाले नगरसेवकों,पदाधिकारियों व पूर्व पदाधिकारियों द्वारा आज भी वर्ष २०१७- १८ का बजट पेश न होने के बावजूद अपने-अपनों का काम निकलवा रहे है.घाघ नगरसेवक व पूर्व पदाधिकारी आर्थिक तंगी में अपने=अपने स्वार्थपूर्ति हेतु ठेकेदारों के भुगतान अपने प्रभाव/वजन से निकलवा रहे है.तंगी और परिवहन समिति का बजट पेश न होने से वर्ष २०१७- १८ का आम बजट लटकता जा रहा है.संभवतः ५ जून के आसपास बजट पेश की जाएँगी। इसमें ज्यादा कोई तामझाम नहीं दिखेंगे,सरकारी अनुदान के आश्वासन दर्शाते हुए आंकड़ों के खेल के मध्य विकसित नागपुर दर्शन करवाया जाएगा।

समन्वय का आभाव

इन दिनों मनपा में अधिकारी हो या फिर पदाधिकारी जो मन में आता है,बिना तहकीकात या पूर्ण जानकारी लिए घोषणाएं करके खुद की पीठ थपथपा रहे है.शहर स्वच्छता,नदियों-नालों की स्वच्छता,कचरा संकलन,आदि मामलों में समन्वय आभाव के कारण एक ही वक़्त पर अलग अलग बयां आ रहे है.

शहर स्वच्छता मामले में ठेकेदार कनक से ठेके के शर्तो के अनुसार काम करवाने में असफल मनपा स्वास्थ्य विभाग के एक घाघ अधिकारी को सेवानिवृति के ३ माह पूर्व सत्तापक्ष ने बड़े तरीके से घर बैठा दिया। वैसे भी ६-८ माह से छुट्टी पर था.

कनक ठेके के शर्तो अनुसार न कर्मी तैनात किये थे और न ही कचरे संकलन के लिए शर्तो के अनुसार मशीनरी लगाए थे लेकिन मनपा के दर माह करोडो की राशि उठा रहे थे.वही दूसरी ओर मनपा के जोनो में तैनात स्वास्थ्य विभाग के जमादारों के कार्यो की स्वतंत्र समिति के मार्फ़त जाँच होनी चाहिए,ये वर्षो से शहर स्वच्छ का दावा करते है और उनके अंतर्गत तैनात कर्मी/एवजदार आदि से दर माह आर्थिक वसूली भी करते है.उक्त सम्पूर्ण जानकारी स्वास्थ्य विभाग प्रमुख को होने पर भी कोई बड़ी कार्रवाई आजतक नहीं की गई.स्वच्छता,कचरा संकलन व डस्टबिन मामले में महापौर,सत्तापक्ष,सोनावणे सह अन्य अधिकारी के अलग-अलग बयान जनता-जनार्दन को गुमराह कर रहे है.

रिक्त पदों की फेरहिस्त

मनपायुक्त कार्यालय से लेकर सफाई कर्मचारी के हज़ारों पद रिक्त है,वर्ष २०१८ तक रिक्त पदों की संख्या मंजूर पदों से ६०-७०% तक पहुँच जाएँगी। सबसे पहले नए मनपायुक्त को अपने ही कार्यालय के रिक्त पदों को भरकर सम्पूर्ण मनपा के लिए उदहारण पेश करना होगा।इसके साथ ही वर्त्तमान में सभी कर्मचारियों को उनके उनके मूल विभाग में भेजना अनिवार्य करना होगा। शहर की जनसंख्या के हिसाब से मंजूर पदों की रिक्तता पूरी करनी होंगी तभी मनपा प्रशासन कोई भी विकासकार्य समय पर गुणवत्तापूर्ण कर पाएंगा।

उपलोकायुक्त की मांग

आप नेता जम्मू आनदं नेमुख्यमंत्री से मनपा के सीमेंट सड़क घोटाले की जाँच के लिए उपलोकायुक्त की मांग की है.साथ ही मनपा ने जिन प्रमुख नागरी सेवाओं का निजीकरण किया है,उन तमाम कार्यो की ‘ कैग ‘ के मार्फ़त अंकेक्षण करवाने की मांग की है.उक्त माँगो को लेकर कल जिलाधिकारी के मार्फ़त मुख्यमंत्री को निवेदन दिया है.आनंद ने उक्त निजीकरण के तहत हुए भ्रष्टाचार मामले में गडकरी से नैतिक जिम्मेदारी लेने की मांग की है.

ठेकेदार आत्महत्या पर सब चुप्प – मनपा का ठेकेदार सोनटक्के की आत्महत्या मामले पर मनपा प्रशासन,पदाधिकारी व ठेकेदार संगठन की चुप्पी समझ से परे है.इस घटनाक्रम के पिछे एक पहलु यह भी है कि उक्त ठेकेदार मनपा के ठेकेदार संगठन के सरगना के पंजीकृत ठेकेदार कंपनी में कर्मी था और साथ में खुद की ठेकेदारी का फर्म के तहत काम करता था.यह मामला सम्बंधित अधिकारी को भलीभांति पता था,इसका राज एक आरटीआई के तहत प्राप्त हुई थी.उक्त ग़ैरकृत में मनपा प्रशासन बराबरी का हिस्सेदार है.इसलिए मनपायुक्त सह पुलिस प्रशासन मृतक ठेकेदार के सन्दर्भ में मनपा प्रशासन व ठेकेदार संगठन के उक्त पदाधिकारी जिनका कागजो पर कर्मी था ,उनसे गहन पूछताछ करनी चाहिए,शायद नतीजे तक जाने हेतु कुछ मार्ग निकल पाएँगे।

कंडक्टर की कमी से खड़ी बसें- मनपा के बसों का संचलन करने वाली दिल्ली की कंपनी की असफलता के कारण पिछले २ सप्ताह में कई दिन कंडक्टर की कमी से ३ से ४ दर्जन बसें खड़ी हो जाने की जानकारी मिली है.तीनों बस ऑपरेटरों ने तय कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार और नए बस लाने की तैयारी दर्शाई है लेकिन मनपा परिवहन समिति की ढुलमुल रवैय्ये के कारण मामला थम सा गया है.पूर्व समिति प्रमुख को पदमुक्त करने के लिए सभी विधायकों ने पूर्व समिति प्रमुख पर दबाव बनाया था तो मुख्यमंत्री व खोपड़े ने अपना-अपना पल्ला भी झाड़ एक-दूसरे पर आरोप मढ़े थे.वही गडकरी ने पूर्व समिति प्रमुख को एक साल इंतज़ार करने के निर्देश दिए थे.

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