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    Published On : Thu, Oct 4th, 2018

    असक्षम पदाधिकारी के कारण मनपा का अस्तित्व खतरे में

    NMC Nagpur

    नागपुर : नागपुर महानगरपालिका के कार्यभार के संचालन की जिम्मेदारी आमसभा के जरिए जनप्रतिनिधियों की है. मनपा प्रशासन को आम सभा में दिए गए आदेशों का पालन करना ही उनका कर्तव्य है.

    लेकिन बदलते समय के साथ मनपा पदाधिकारियों और नगरसेवकों की निष्क्रियता की वजह से प्रशासन मनपा पर हावी हो गए. इसलिए मनपा की आमसभा के निर्णयों को अधिकारी वर्ग तवज्जो नहीं दे रहे हैं.

    याद रहे कि विभिन्न आरक्षण और समीकरण के तहत मनपा में पदाधिकारी बनाए गए. जाने-अनजाने में वर्तमान पदाधिकारी समय के अनुसार जनहित में प्रशासन पर पकड़ कायम रख अपने-अपने पक्ष का मान बढ़ाने में असफल रहे. नतीजा आगामी लोकसभा चुनाव पर इसका गंभीर असर पड़ना लाजमी है.

    हालांकि मनपा में ऐसे भी नगरसेवक हैं जो मसले को समझ कर पलों में निर्णय लेकर प्रशासन को निर्देश अपने कार्यकाल में देते देखे गए. वर्तमान में इसके विपरीत काफी कमजोर साबित हो रहे पदाधिकारी, जो स्वयं के स्वार्थपूर्ति के लिए किसी भी हद से गुजरने को आतुर नज़र आ रहे हैं. मनपा के ऐसे पदाधिकारी के कार्यप्रणाली के मध्य ऐसे भी अधिकारी हैं जो चाहते हैं कि मनपा की सभा ही सर्वोपरी है और रहे. तभी मनपा का अस्तित्व कायम रह पाएंगा, अन्यथा मनपा का बाहरी अधिकारी अपने नए-नए नियम लाद शहर को नई अड़चनों में लाने का प्रयास कर रहे हैं.

    मनपा के एक पदाधिकारी इन दिनों काफी चर्चा में हैं. उससे ज्यादा चर्चा में उनके सलाहकार नगरसेवक हैं, जो नगरसेवकों के लिए परेशानी का सबब बन चुके हैं. दोनों की जुगलबंदी से उनके पक्ष में उनके वरिष्ठ अस्वस्थ्य हो गए हैं. इस पदाधिकारी के भाई-भतीजे दोहन-शोषण में लीन हैं. जिसे पदाधिकारी का संरक्षण स्पष्ट है. आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र इस पदाधिकारी ने विपक्ष को पहले से ही बड़े=बड़े मुद्दे दे दिए लेकिन इस पक्ष के दिग्गज नेताओं का इस पदाधिकारी के करतूतों को समर्थन देते हुए कायम रखना समझ से परे है.

    एक अन्य पदाधिकारी का अपने कोटे की निधि देने में १०% की कमीशन मांगना काफी गर्मागरम चर्चा का विषय बन चुका है. इस पदाधिकारी से नगरसेवक सह सर्वपक्षीय नगरसेवक काफी नाराज हैं. यह पदाधिकारी इन दिनों एक जल स्त्रोत पर टीडीआर दिलवाने हेतु काफी सक्रिय है. लाजमी है कि टीडीआर का बड़ा हिस्सा प्राप्त करना भी उनकी ख्वाइशों में सुमार होना जायज है. पार्टी के उम्मीदवार आगामी लोकसभा चुनाव में इन्हें लेकर घूमे तो पहले के मुकाबले वोट कम होना तय है.

    एक अन्य विशेष पदाधिकारी तो सभी विभाग प्रमुखों से मासिक फिक्सिंग करने में सफल हो गया है. जिन्हें समय समय पर चुकता करना पड़ रहा है. यह पदाधिकारी जनता, शिष्टमंडल के निवेदन को सूंघ सम्बंधित विभाग और जिनके मसले को न्याय मिल गया उन्हें नहीं छोड़ता है. इनसे सम्बंधित जोन, स्वास्थ्य विभाग के जोनल अधिकारी, इनके पक्ष के नगरसेवक काफी परेशान हो चुके हैं. इन्होने अन्य तबके के नाम पर ज़माने में भी सफलता हासिल की. इनके विरोधी पक्ष इनकी करतूतों से काफी खुश हैं, क्यूंकि उन्हें अबतक ऐसा सहयोगी नहीं मिला.

    उक्त तीनों पदाधिकारी आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी उम्मीदवारी को लेकर पक्की खबर फैलाना शुरू कर दिया. जबकि हकीकत यह हैं कि तीनों में से किसी को उम्मीदवारी नहीं मिलने वाली है.

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