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    Published On : Wed, Oct 2nd, 2019

    मद्य सेवन कर रहा मौल्यवान सुखी जीवन परीवार को बर्बाद- डॉ.प्रितम गेडाम

    विश्व मद्य निषेध दिवस विशेष – 2 अक्तुंबर 2019

    नागपुर: आज का दिन 2 अक्तुबर को विश्वस्तर पर शराब के विरोध मे मद्य निषेध दिन के रूप मे मनाया जाता है। इस विशेष दिन का उद्देश्य विश्व को शराब के नशे से जागरूक व मुक्त करना है। आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी की जयंती है और उन्होने हमेशा नशीले पदार्थो से दूर रहने का संदेश दिया है। शराब समाज के लिए अत्यंत घातक जहर है क्योकी जहर सिर्फ मनुष्य को ही नही मारता अपीतु संपुर्ण समाज को खोखला कर देता है।

    आज के इस भागदौड भरी स्थिती मे अपने लक्ष्य को जलद गती से प्राप्त करने के लिए मनुष्य शाॅटकट का रास्ता अपनाने लगे है ऐसे मे उनका मन भटकाव की स्थिती मे आ जाता है। मानव समाज अपने संस्कृती, परंपरा, प्रथा, संस्कारो से दूर आधुनिकता के अंधे कुंए मे खोता जा रहा है। पहली बार नशा उत्साहवश, दबाव, तनाव, दोस्तो के साथ मजाक मे शुरूवात करता है और फिर आदत बन जाती है। अधिकतर अपराध नशे क लिए या नशे की हालत मे किये जाते है।

    विश्वस्तर पर स्थितीः-
    दुनियाभर मे हर वक्त कम-से-कम 5 करोड लोग नशे की हालत मे होते है। विश्वभर में करीब 23 करोड़ 70 लाख पुरुष और चार करोड़ 60 लाख महिलाएं शराब के कारण होने वाली बिमारीयों की चपेट में आती हैं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि शराब की वजह से दुनिया भर में हर साल 33 लाख लोगों की मौत हो जाती है। शराब के कारण हर 10 सेकंद मे एक मौत होती है यह एड्स, हिंसा और सड़क हादसों में होने वाली मौतों को जोड़कर प्राप्त आंकड़ों से भी ज्यादा है। खासतौर पर पुरुषों के लिये यह खतरा ज्यादा रहता है। सबसे ज्यादा शराब रशिया मे पी जाती है जिसकारण वहा हर साल 5 लाख लोगो की मौत होती है। शराब और स्वास्थ्य पर संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी की यह नई रिपोर्ट बताती है कि दुनियाभर में हर साल होने वाली 20 में से 1 मौत शराब की वजह से होती है। देश-स्तर पर, मोल्दोवा में सबसे अधिक शराब का सेवन था (प्रति वर्ष प्रति वयस्क 15 लीटर), और कुवैत में सबसे कम (0.005 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष) रहा।

    भारत में क्या है स्थिति:-
    भारत देश विश्व मे तिसरा सबसे बडा शराब बाजार है। देश मे प्रति व्यक्ति अल्कोहल खपत 4.6 लीटर प्रतिवर्ष है और यह मात्रा तेजी से बढ रही है। शराब के कारण हर साल 2.6 लाख भारतीयों की मौत हो रही है। इसमें लीवर में समस्या, कैंसर, नशे में ड्राइविंग के दौरान रोड ऐक्सिडेंट्स जैसे कारण हैं। शराब का सेवन सेहत के लिए हानिकारक है यह जानते हुए भी देशभर के करीब 15 प्रतिशत लोग शराब पीते हैं। भारत में पांच में एक शख्स शराब पीता है। सर्वे के अनुसार 19 प्रतिशत लोगों को शराब की लत है। जबकि 2.9 करोड़ लोगों की तुलना में 10-75 उम्र के 2.7 प्रतिशत लोगों को हर रोज ज्यादा नहीं तो कम से कम एक पेग जरूर चाहिए होता है और ये शराब के लती होते हैं। चैंकानेवाली बात यह है कि देश में 10 साल के बच्चे भी नशीले पदार्थों का सेवन करने वालों में शामिल हैं। भारतीय शराब बाजार 8.8 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़ रहा है और वर्ष 2022 तक इसके 16.8 बिलियन लीटर की खपत तक पहुंचने की संभावना है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक, सिक्किम हरियाणा और हिमाचल प्रदेश भारत में शराब के सबसे बड़े उपभोक्ता हैं। भारत में शराब की बिक्री का सबसे लोकप्रिय मार्ग शराब की दुकान तक आसान पहुंच है। सरकार की कुल आय मे शराब की बिक्री पर लगनेवाले टैक्स से होनेवाली आय की हिस्सेदारी एक चैथाई होती है। भारत में हर साल सड़क हादसे में होने वाली करीब 1 लाख मौतें अप्रत्यक्ष रूप से शराब के दुरुपयोग से संबंधित हैं।

    अनमोल जिंदगी को खत्म करती शराब:-
    नशा कोई भी हो वो सिर्फ जिंदगी बर्बाद करता है। शराब पीने से मस्तिष्क का डोपामाइन स्तर 40 प्रतिशत से बढकर 360 प्रतिशत तक बढ जाता है। जिस परीवार मे शराबी व्यक्ति हो वह परीवार हमेशा आत्मग्लानि व घुटनभरी जिंदगी जीते है। ऐसे परीवार मे तनाव, दुख, वादविवाद, कलह, नकारात्मकता, अपमानीत व्यवहार, अवसाद, बिमारी, आर्थीक व सामाजीक समस्या, हीनभावना जैसी समस्याओ से ग्रसीत होते है। ऐसे परीवार मे जरूरतो को पुरा करने के साधन कम होते है। शराबी खुद बर्बाद नही होता अपीतु संपुर्ण परीवार को दुखो के अंधेरे मे धकेलता है और यह शराबी व्यक्ती घर का मुखीया हो तो परीवार की जिंदगी नर्क होती है। हमे समाज मे अक्सर ऐसे लोग नजर आते है जो रोज शराब पीते है नशे मे धुत रहते है औरतो बच्चो को मारते पीटते है। शराब के नशे मे व्यक्ती अपना आपा खो देता है हत्या, आत्महत्या जैसे नकारात्मक विचार आते है जिससे अपराधवृत्ती बढती है। शराबी सही गलत का फर्क नही समझता, औरो से लडता है। व्यक्ती का पैसा, वक्त, स्वास्थ, प्रतिष्ठा, मान-सम्मान, नाम यह सब नशे की बली चढता है।

    जहरीली शराब ने देश मे मौत का तांडव किया:-
    देश मे शायद ही कोई राज्य बचा हो जहा जहरीली शराब के वजह से मौते ना हुई हो, पिछले कुछ वर्षाे मे जहरीली शराब के कारण मौतो मे भयंकर वृद्धी हुई है। सैकडो की संख्या मे परीवारो को उजाड दिया ऐसी देश को दहलानेवाली घटनाये घटीत हुई है। शराब में यूरिया और ऑक्सिटोसिन जैसे रसायनिक पदार्थ मिलाने की वजह से मिथाइल एल्कोल्हल बन जाता है इसमें जहरीली बेसरमबेल जैसी पत्ती भी डाली जाती है। सडे-गले पदार्थो का उपयोग व जहरीले जीवजंतुओ का भी प्रयोग होता है। अधिक नशीली बनाने के लिए इसमें ऑक्सिटोसिन मिला दिया जाता है, जो मौत का कारण बनती है द इकोनोमिस्ट में, अल्कोहल एंड ड्रग इंफॉर्मेशन सेंटर, एक गैर सरकारी संगठन, की रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल दाखिले का एक चैथाई घटनाओं के लिए नशा जिम्मेदार है।

    शराब के द्वारा गंभीर बिमारीयो का खतरा:-
    शराब के वजह से शरीर में विटामिन बी-12 कम बनेगा, कैल्शियम और विटामिन-डी के अवशोषण में बाधा, अवसाद, दिमागी कमजोरी, हार्मोन का संतुलन भी बिगड़ जाता है, हृदय रोग, लिवर सिरोसिस, लिवर में जलन और सूजन आदि समस्याएं पैदा हो सकती हैं, जो घातक बिमारीया होती हैं अधिक अल्कोहल के सेवन से हाई बीपी की समस्या और हृदय मांसपेशियों को नुकसान पहुंच सकता है इसके कारण मुंह के कैंसर, ग्रसनी, कंठनली, इसोफेगस, स्तन कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर होने का खतरा बढ़ता है हर साल होने वाली 30 हजार कैंसर पेशेंट्स की मौत के पीछे भी शराब का इस्तेमाल एक वजह है। शराब पीने की वजह से कई तरह के कैंसर समेत 200 से ज्यादा स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां होती हैं। वैश्विक तौर पर वर्ष 2016 में शराब से जुड़ी मौतों का आंकड़ा करीब 30 लाख था।

    शराब की खपत मे भारी उछाल:-
    विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा जारी शराब और स्वास्थ्य 2018 पर वैश्विक स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रति व्यक्ति शराब की खपत में 2005 और 2016 के बीच दो गुना वृद्धि हुई है। 2005 में भारतीयों ने 2.4 लीटर शराब का सेवन किया, जो 2010 में बढ़कर 4.3 लीटर और 2016 में 5.7 लीटर तक बढ़ गया। 2010 से 2017 के बीच भारत की वार्षिक शराब की खपत में 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई, प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जिसमें पाया गया कि 1990 के बाद विश्व स्तर पर प्रति वर्ष शराब की कुल मात्रा में 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। शोधकर्ताओं ने कहा कि अनुमान है कि 2030 तक सभी वयस्क शराब पीएंगे और लगभग एक चैथाई (23 फीसदी) कम से कम महीने में एक बार शराब पीएंगे। अपराधो का ग्राफ बढाने मे नशे का सबसे बडा हाथ है।

    नशे पर नियंत्रण के उपायः-
    व्यसनी व्यक्तीयो द्वारा स्वनियंत्रण, दृढनिश्चय व आपसी मदत समूह यह सबसे अच्छा नियंत्रण है।

    नशे से दुरी बनाना, चिकीत्सा करना, रोकथाम के नियमो का पालन, डाॅक्टरो से खुलकर बाते करना, मन मे उत्पन्न सवालो का तज्ञो द्वारा निराकरण करना।

    अकेलेपन मे ना रहे, दुसरो से अपने मन की बात करे, संभव हो तो हमेशा परिवार के बिच मे रहे।

    नशे पर कीया गया अब तक का खर्चा और उसके द्वारा हुए आपके नुकसान इन बातो का एक बार मुंल्याकंन करना, सकारात्मक सोच व स्वाभीमान के साथ जिंदादीली से जिये।

    खुद की देखभाल करना, निव्र्यसनी लोगो से संपर्क, ध्यानसाधना करना, अपने नये खेलकूद, योग, व्यायाम व शौक विकसीत करना, तनाव को हेल्दी तरीके से निपटाए एंवम लगातार इलाज कराये।

    विशेष रूप मे पालको ने अपने बच्चो से एक दोस्त के रूप मे व्यवहार करना, उस पर नियंत्रण रखना, बचपन से ही बच्चो को उचीत अनुचीत बातो की समझ देना, औरतो बुजूर्गो का सम्मान करना सिखाना, अच्छे संस्कार व उचित वातावरण का निर्माण कर देना।

    जब भी नशे की इच्छा आये तो अपने परिवार के लोगो को, उनकी खुशीयो को, अपने कर्तव्यो, जिम्मेदारीयो को, जो पुरा करना है उस लक्ष्य को याद करना।

    नशा मुक्ती के लिए प्रेरित करनेवाले व्यक्तीयो, समूहो, दोस्तो से संपर्क मे रहना और खुद को हमेशा व्यस्थ रखना।

    पारिवारीक, सामाजिक, आर्थिक दायित्वो को समझना व अपने कर्तव्यो को पुरा करना।


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