Published On : Mon, Sep 15th, 2014

वाशिम : टिकट के लिए दावेदारों की भीड़ उमड़ी


कारंजा में हो सकता है राकांपा-शिवसेना में मुकाबला


विनायक उज्जैनकर

Shivsena vs Rashtrwadi congress
वाशिम। 
कारंजा विधानसभा क्षेत्र ने लगातार बाहर के पार्सल उम्मीदवार को चुनकर मुंबई भेजा है. इस क्षेत्र की यह परंपरा ही रही है. इसमें अपवाद रहा केवल 2009 का चुनाव, जिसमें स्थानीय उम्मीदवार का मुद्दा उठाते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रकाश डहाके ने विजयश्री हासिल की. आगामी चुनाव में इस क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरने का सपना कई लोग देख रहे हैं. लगभग सभी के स्थानीय और बाहर के उम्मीदवार टिकट के लिए कतार में खड़े हैं.

1978 में बना कारंजा विधानसभा क्षेत्र
1978 में हुई पुनर्रचना में कारंजा विधानसभा क्षेत्र बना है. तब से यहां से एक बार फॉरवर्ड ब्लॉक, तीन बार कांग्रेस, दो दफा शिवसेना और एक बार निर्दलीय उम्मीदवार चुना गया है. 2009 में हुए पुनर्गठन के दौरान मूर्तिजापुर को कारंजा से अलग कर मानोरा तालुका से जोड़ दिया गया. पहले के मंगरुलपीर विधानसभा क्षेत्र को रद्द कर मंगरुलपीर तालुका को एससी के लिए आरक्षित वाशिम विधानसभा क्षेत्र से जोड़ दिया गया. इससे मंगरुलपीर के तत्कालीन विधायक राकांपा के डॉ. सुभाष ठाकरे विस्थापित हो गए.
शिवसेना-भाजपा युती के राजेंद्र पाटणी, भारिप-बहुजन महासंघ के डॉ. सुभाष राठोड़, राकांपा के बागी सुभाष ठाकरे और कांग्रेस-राकांपा के प्रकाश डहाके के बीच हुए मुकाबले में डहाके ने बाजी मार ली.

टिकट के लिए रस्साकशी
आगामी चुनाव में टिकट चाहने वालों की भीड़ लगी हुई है. तीनों महत्वपूर्ण दलों में भी टिकट के लिए भारी रस्साकशी है. वर्तमान विधायक और विधानसभा के अध्यक्ष दिलीप वलसे पाटिल के साले प्रकाश डहाके राकांपा से टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं. लेकिन सुभाष ठाकरे उनकी राह में रोड़ा बने हुए हैं. प्रकाश डहाके विदर्भ वैधानिक विकास मंडल के अध्यक्ष हैं. ठाकरे समर्थकों का कहना है कि ऐसे में डहाके के बजाय ठाकरे को टिकट दी जानी चाहिए. पार्टी में ठाकरे समर्थकों की संख्या डहाके की तुलना में कहीं
अधिक है.

सेना नहीं तो मनसे ही सही
शिवसेना-भाजपा महायुती में कारंजा शिवसेना के हिस्से में है. लेकिन सांसद भावना गवली द्वारा रिसोड पर भी दावा ठोंक देने से यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि कहीं यह क्षेत्र भाजपा के हिस्से में तो नहीं जाएगा. ऐसे में शिवसेना से निष्कासित राजेंद्र पाटणी, चार साल पहले शिवसेना में आए डॉ. सुभाष राठोड़, अनिल राठोड़, शिवसेना के जिला प्रमुख डॉ. सुधीर कवर, रणजीत पवार, रणजीत जाधव, दत्ता पाटिल तुरक ने टिकट के लिए दावेदारी की है. शिवसेना से पटरी नहीं बैठने पर पाटणी मनसे का दामन थाम सकते हैं.

भारिप-बमसं में भी उठा-पटक
पिछले चुनाव में इस क्षेत्र से भारिप-बमसं को उल्लेखनीय वोट मिले थे. इसलिए इस पार्टी की टिकट के लिए भी भीड़ लगी हुई है. जिला परिषद सदस्य उस्मान गारवे और उद्योगपति युसुफ पुंजाणी प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं. इस पृष्ठभूमि में राकांपा से डहाके अथवा ठाकरे में से किसी को भी टिकट मिले, दोनों एक-दूसरे को गिराने की कोशिश करेंगे ही. उधर अगर शिवसेना ने पाटणी को मैदान में उतारा तो सांसद गवली और रावते गुट उन्हें धूल चटाने का प्रयास करेंगे.