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Published On : Sat, Jan 19th, 2019

डॉ. मुकेश लढ्ढा, रोबोटिक ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी करते हैं, जो मध्य भारत में इस तरह की अनूठी सर्जरी है।

नागपुर: विकास के मील के पत्थर के रूप में, नागपुर के जानेमाने ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, स्पोर्ट्स मेडीसिन तथा आर्थ्रोस्कोपी सर्जन, डॉ. मुकेश लढ्ढा ने रोबोटिक प्रणाली का उपयोग करके आरएनएच अस्पताल, धनतोली, नागपुर में कुल 12 घुटने के प्रत्यारोपण की सर्जरी की है, जो मध्य भारत में इस तरह की अनूठी सर्जरी है।

डॉ.लढ्ढा, जिन्हें जोड़ों के प्रत्यारोपण, आर्थ्रोस्कोपी तथा स्पोर्ट्स मेडीसिन सर्जरी के क्षेत्र में, देश के उच्चतम श्रेणी के महानतम विशेषज्ञों में गिना जाता है, ने कहा कि “हमें यह घोषित करते हुए बहुत प्रसन्नता और गर्व का अनुभव हो रहा है कि आरएनएच अस्पताल, नागपुर, संपूर्ण मध्य भारत का पहला अस्पताल बन गया है, जिसमें रोबोटिक सहायता वाले संपूर्ण घुटने के प्रत्यारोपण की सर्जरियाँ की गई हैं, जो यू.स.ए. में विकसित सबसे उन्नत और नवीनतम तकनीक है। हमारे लिए यह अवसर इसलिए भी गौरवपूर्ण अवसर बन गया है, क्योंकि माननीय सड़क यातायात और राजमार्ग मंत्री, श्री नितिन गडकरी जी ने स्वयं हमारे अस्पताल में पिछले शाम रोबोटिक प्रणाली का विधिवत उद्घाटन किया।

“सर्जन की कौशल वाली रोबोटिक प्रणाली, प्रत्येक रोगी के लिए उनकी अपनी शारीरिक रचना के अनुरूप, घुटने के सर्वोत्तम अनुकूलित फिट प्रत्यारोपण में काफी सहायता प्रदान करती है, जिससे उन्हें आर्टिफिशियल घुटने से भी सामान्य घुटने का अहसास होता है। यह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, आगमेंटेड रिअलिटी और सर्जन के दिमाग का एक आमेलन है, जो घुटने के प्रत्यारोपण के उपरांत सर्वोत्तम परिणाम प्रदान करता है।

सर्जरी के दौरान, यह हड्डियों को बचाने में सहायक होता है, खून की हानि को कम करता है और घुटने के जोड़ों के कोमल टिशुओं को संरक्षित रखता है, जिससे ऑपरेशन के उपरांत दर्द को कम करने में सहायता मिलती है और बहुत तेजी से रिकवरी होती है, जिसमें कम से कम फिजियोथेरेपी की जरुरत पड़ती है तथा परिणामस्वरूप अस्पताल में कम से कम समय तक रहना पड़ता है। रोबोट की सहायता वाली प्रणाली, मानवीय भूल की संभावना को खत्म कर देती है और सर्वोत्तम अलाइनमेंट सुनिश्चित करती है, जिससे जोड़ों का प्रत्यारोपण लंबे समय तक टिकाउ बना रहता है।

डॉ.लढ्ढा ने आगे बताया कि यह देखना काफी खुशनुमा लग रहा है कि सभी 12 रोगी, बिना किसी दर्द के और बिना किसी सहारे के, आराम से चल-फिर रहे हैं और दोनों घुटनों के प्रत्यारोपण की सर्जरियों के बावजूद, 4थे दिन वे अपने घर वापस लौट चुके थे।

“मुझे काफी खुशी हो रही है कि मेरा घरेलु शहर नागपुर ऐसी तकनीक से लैस हो गया है, जो इस शहर को चिकित्सा के क्षेत्र में उन्नति के लिए, विश्व के मानचित्र पर ला देगा और मैं डॉ. दिलीप राठी एवं डॉ. मुकेश लढ्ढा का शुक्रगुजार हूँ, कि उन्होंने ऐसा प्रयास प्रारंभ किया है। भारत की प्रगति के मार्ग में यह स्पष्ट हो गया है कि ऐसी तकनीक केवल महानगरों के बड़े अस्पतालों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, अपितु यह सूदूरवर्ती क्षेत्रों में भी आम लोगों के पहुँच में होनी चाहिए। नागपुर, मध्य भारत से बड़ी संख्या में रोगियों की सेवा कर सकता है।“ आरएनएच अस्पताल में 18 जनवरी की शाम, रोबोटिक प्रणाली का उद्घाटन करते हुए, श्री नितिन गडकरी जी के ये उद्गार थे।

डॉ.लढ्ढा रोबोटिक सहायता वाले, संपूर्ण घुटने के प्रत्यारोपण की 12 सफल सर्जरियाँ कर चुके है, जिसमें एक रोगी तो 75 वर्ष की उम्र के वासिम से श्री सोमानी थे और दूसरी 65 वर्ष की रोगी थीं, नागपुर की श्रीमती रागटेट, जिन्हें 7/8 वर्षों से घुटनों में भयानक दर्द था। इन सर्जरियों को नावियो पीएफएस रोबोटिक्स सर्जिकल प्रणाली का उपयोग करके किया गया, जो जोड़ों के प्रत्यारोपण के क्षेत्र में आधुनिकतम एडवांस्ड जेनरेशन वाली रोबोटिक सहायता(यू.एस.ए. में विकसित) है और इन रोगियों के परिवारों को अपार खुशी तब हुई जब सर्जरी होने के 4थे दिन ही, बिना किसी दर्द और सहारे के रोगी आराम से चल-फिर रहे थे।

डॉ. दिलीप राठी, आर्थोपिडिक सर्जन तथा निदेशक, आरएनएच अस्पताल ने आगे बताया कि “आरएनएच अस्पताल हमेशा से ही तकनीक के केन्द्र में और अग्रणी रहा है तथा हमारा लक्ष्य है कि हम इस अस्पताल को आर्थोपिडिक्स में, रोगियों उत्कृष्ट केन्द्र के रूप में विकसित करेंगे, जिसमें चौबीसो घंटे रोगियों की देखभाल पूरी लगन और निष्ठा से करने वाले, हमारे कर्मियों को इस प्रकार प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे रोगियों को अपने परिवार का सदस्य समझें। रोबोटिक सहायता वाले जोड़ों के प्रत्यारोपण के साथ, हमने एक कदम आगे बढ़ाकर अपना अलग मुकाम हासिल कर लिया है और हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हम दुनिया की कदमताल के साथ ही चल रहे हैं।“

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