Published On : Sun, Dec 22nd, 2019

मुख्यमंत्री ठाकरे ने हिंदुत्व की विचारधारा छोड़ दी क्या : नारायण राणे

राणे ने जमकर ठाकरे पर साधा निशाना

नागपुर– मुख्यंमंत्री ने अब तक मंत्री भी जाहिर नहीं किए है । मंत्रिमंडल गठित नहीं किया गया है, प्रश्नोत्तर नहीं हो रहे है । राज्य को काम करनेवाला मुख्यमंत्री चाहिए। जिसको राज्य की समस्या की जानकारी है, जिसमे समस्याएं सुलझानी की धमक हो, ऐसा मुख्यमंत्री महाराष्ट्र को मिला तो महाराष्ट्र चलेगा। अगर महाराष्ट्र की हालत खराब हुई, तो इसकी जिम्मेदार मौजूदा सरकार रहेगी। राज्यपाल के अभिभाषण में राज्यपाल पिछली सरकार के काम का उल्लेख करते है, और भविष्य की भूमिका को लेकर मार्गदर्शन कर रहे है.

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इसके बाद मुख्यमंत्री का भाषण भी पढ़ा । लेकिन इस भाषण में राज्यपाल को सम्मान नहीं दिया गया, जो सम्मान राज्यपाल को भाषण में देना चाहिए था। वह नहीं दिया गया । उनकी भाषा काफी खराब थी । राज्यपाल के भाषण पर किसी भी तरह का उत्तर नहीं दिया गया । यह कहना है पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे का । राणे शुक्रवार 20 दिसंबर को प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे । इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर जमकर निशाना साधा।

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इस दौरान उन्होंने कहा की मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कमिटमेंट नहीं दिया है । किसी भी काम का उल्लेख नहीं किया गया है । राज्यपाल को रीसीव करने के लिए मुख्यमंत्री जाते है । यह कोई सिखाने की बात नहीं है । अधिकारी जानकारी देते है । 10 रुपए खाने की थाली की बात कही गई थी । मुंबई में यह थाली केवल अधिकारियो के है । मजदूरों और जनता के लिए नहीं है । 25 हजार रुपए किसानो को देने की बात कही गई थी । ऐसा कहा था.हम सत्ता पर आने के बाद कर्जमाफी की बात कही थी । लेकिन सरकार आए हुए एक महीना बीत गया. लेकिन किसी भी तरह का प्रस्ताव नहीं लाया गया ।

किसानो का सातबारा कोरा करने के लिए 55 हजार करोड़ रुपए लगेंगे। इसके साथ ही 25 हजार रुपए देने के लिए 23 हजार करोड़,यानी कुल 78 हजार करोड़ रुपए की जरुरत होगी। इसका खर्च राज्य की तिजोरी संभाल सकती है क्या इसका जवाब मुख्यमंत्री ने विधानसभा में देना चाहिए। इसके पहले भी शिवसेना सरकार में थी । राज्य की अर्थव्यवस्था खराब है यह शिवसेना को अब कैसे पता चला है. मुख्यमंत्री 5 दिन में कुछ भी नहीं बोले है ।

राणे ने नागरिकता बिल पर कहा की उद्धव ठाकरे ने हिंदुत्व छोड़ दिया है क्या। शिवसेना की आइडियोलॉजी आज भी हिंदुत्व की है क्या बताएं। अगर ऐसा है तो सोनिया गांधी से कहे की मैं हिंदुत्ववादी हु । शिवसेना हिंदुत्व के मुद्दे पर चलाई। यह इनको अब गलती लग रही है । बालासाहेब ने कहा था की मुझे पद मिले न मिले, सत्ता मिले न मिले, मैं हिंदुत्व पर कायम रहूँगा। उद्धव कहते है की मैंने बालासाहेब को शब्द दिया था, क्या यह शब्द दिया था की मैं हिंदुत्व छोड़ दूंगा। यह इनका व्यकतिक स्वार्थ है । उद्धव ठाकरे,संजय राऊत के साथ खुद शरद पवार से मिले और खुद को मुख्यमंत्री बनाने की घोषना करने की मांग की । जिसके बाद पवार ने उनके नाम की घोषणा की ।

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