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    Published On : Thu, Jan 16th, 2020

    बिना इंटरव्यू के भर्ती के हरकत से विभाग सन्न

    – विधायक की सिफारिश पर हुई थी अवैध नियुक्ति

    नागपुर : नागपुर महानगरपालिका में स्थाई समिति के बाद सबसे महत्वपूर्ण विभाग परिवहन विभाग हैं.जहाँ इनदिनों बिना इंटरव्यू के भर्ती किये गए अधिकारी से अमूमन सभी परेशान हैं.यह इसलिए भी हो रहा क्यूंकि परिवहन सभापति और उक्त अधिकारी एक ही गुट अर्थात विधायक के करीबी हैं.

    याद रहे कि उक्त अधिकारी जब मनपा के मूल कर्मी थे,तब कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किए.जब वे सेवानिवृत्त हो गए तो मनपा में प्रचलन पद्दत के तहत वे परिवहन विभाग में ठेकेदारी पद्दत पर अपनी नियुक्ति हेतु प्रयास किये,क्यूंकि गुणवत्ता नहीं थी तो उनकी सीधे तौर अर्थात नियमानुसार नियुक्ति नहीं हो पाई.ऐसे में मनपा के सुखमय वातावरण में कायम रहने के लिए इस अधिकारी ने विधायक के सिफारिश या उनके दबाव में गैरकानूनी रूप से नियुक्ति पा ली.

    नियुक्ति पश्चात् मनपा और परिवहन विभाग के खिलाफत का सिलसिला जारी रहा.जैसे ही उन्हें कोई महत्वपूर्ण काम सौंपा जाता था,कोई न कोई बहाना कर वे कन्नी काटते रहे.

    अब जब से काफी उठा-पठक बाद नए सभापति परिवहन समिति को मिला तो इस अधिकारी की तूती सर चढ़ के बोलना शुरू हो गई.क्यूंकि सभापति और उक्त अधिकारी एक ही गुरु के शिष्य हैं.इसलिए नए सभापति के चंद दिनों के कार्यकाल में इस अधिकारी के व्यवहार से सभी हैरान-परेशान हो गए.

    उक्त अधिकारी की न्याय सम्बन्धी कामकाज मनपा-परिवहन हित में संभालने के लिए बिना इंटरव्यू के भर्ती की गई.अपने गुणवत्ता अनुसार वे सक्रिय हैं,भर्ती से आज तक मनपा परिवहन विभाग को कोई उल्लेखनीय उपलब्धि नहीं दिलवा पाए.अर्थात मनपा में सभी श्रेणी के लिए व्यवस्था हैं.

    सभापति हतोत्साहित
    सभापति के करीबी के अनुसार उन्हें यह समिति भा नहीं रही,ड्राइवर-कंडक्टर उनकी सुन नहीं रहे,जबकि सभापति का कहना हैं कि वे उनके हित के लिए काफी सक्रिय हैं.सभापति के विरोधी कह रहे कि वे डिम्ट्स का बचाव कर बस ऑपरेटरों पर कहर ढा रहे.उन्हें शुरू से लेकर आजतक कोई सुविधा नहीं दी.ऐसे में वे सभापति अंदरूनी रूप से समिति की जिम्मेदारी को लेकर पछता रहे.

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