Published On : Fri, Jul 2nd, 2021

डालमिया सीमेंट कंपनी की चिमनी से गिरे मजूदर की मौत

– सुरक्षा संसाधनों को ताक पर रखकर ७५ फीट ऊंचाई पर कराया जा रहा था काम,ठेका कामगार को मुआवजा देने में उद्योग कर रहा आनाकानी

गड़चांदूर/नागपुर – कोरपना तहसील के नारंडा में स्थित मुरली सीमेंट कंपनी को बीते दिनों डालमिया भारत सीमेंट कंपनी ने खरीदा और यहां नये सिरे से निर्माण व मरम्मत कार्य शुरू किया। कार्य की शुरुआत से ही डालमिया कंपनी पर अनेक गंभीर आरोप कामगार संगठनों ने लगाये और आंदोलन की चेतावनी दी थी। इस बीच मंगलवार, २९ जून की दोपहर २.३० बजे के दौरान कंपनी के सबसे ऊंचे चिमनी पर ईलेक्ट्रो स्टैटिक पर्सपेटर(ईएसपी) स्थापित करने के कार्य में जुटा एक ठेका मजदूर ७५ फीट की ऊंचाई से नीचे गिर पड़ा और घटना स्थल पर ही उसकी मौत हो गई। डालमिया प्रबंधन ने सुरक्षा संसाधनों की घोर लापरवाही करते हुए मजदूरों को ७५ फीट ऊंचे स्थल पर कार्य करने के लिये बाध्य किया। इसके चलते कामगार संगठनों में प्रबंधन के खिलाफ जबरदस्त रोष बना हुआ है।

प्रबंधन की पोल खुली
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बीते अनेक दिनों से यहां कार्यरत कामगार सुरक्षा संसाधनों की कमी को लेकर अपनी नाराजगी जता रहे थे। परंतु नौकरी छीन जाने के डर से कोई भी ठेका कामगार प्रबंधन के खिलाफ आवाज उठा नहीं पाया। मजदूरों के मौन का लाभ उठाते हुए डालमिया प्रबंधन ने अस्थायी ठेका कामगारों से स्कील्ड वर्कर का काम करवा रही है। कम वेतन पर मिलने वाले ठेका कामगारों को जोखिम भरे स्थल पर सुरक्षा के संसाधन दिये बिना ही उनसे काम करवाने की यह नीति मंगलवार को कंपनी प्रबंधन की पोल खोल दी।

माहिर तकनीशियन का काम कर रहे ठेका कामगार
रोज की तरह ही सुबह के शिफ्ट में २८ वर्षीय ठेका कामगार संतोष रामाचल चव्हाण ७५ फीट ऊंचे चिमनी पर पहुंचकर ईएसपी स्थापित करने के कार्य को अंजाम दे रहा था। धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिये यह विशाल मशीन चिमनी के मुहाने पर स्थापित की जाती है। इसके लिये मशीनों का ज्ञान रखने वाले एवं माहिर स्कील्ड वर्कर को काम पर लगाया जाता है। परंतु स्थानीय वर्कर एवं माहिर तकनीशियन से काम करवाने के बजाय प्रबंधन ने शिवा कन्स्ट्रक्शन की ओर से नियुक्त किये गये अस्थायी ठेका कर्मचारी संतोष चव्हाण को इस काम में लगा दिया।

सुरक्षा उपकरणों की कमी
जोखिम भर इस स्थल पर हर समय जान का खतरा होता है। इतनी ऊंचाई से नीचे गिर न पायें, इसके लिये हूक व लिफ्ट प्रणाली का प्रयोग किया जाना चाहिये। सुरक्षा से संबंधित सारे उपकरणों का उपयोग कर कामगारों के जीवन की रक्षा को सुनिश्चित किया जाना चाहिये। परंतु कम मजदूरी देकर मुनाफा कमाने की नीति ने एक बेकसूर कामगार की जान ले ली। परिसर के नांदाफाटा निवासी संतोष चव्हाण सुबह से लेकर दोपहर तक काम कर था। अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह ७५ फीट की ऊंचाई से जमीन पर आ गिरा।

घटना स्थल पर ही मौत
कामगार कानून के प्रावधानों के अनुसार घटना स्थल पर मौत पर मृतक के परिवार को तय नियमों के अनुसार मुआवजे की बड़ी रकम अदा करनी पड़ती है। इस मुआवजे से बचने के लिये पहले तो प्रबंधन ने कामगार संतोष को जीवित दर्शाने की कोशिश की, परंतु अन्य सहयोगी कामगारों ने जब मृतक के शव को लेकर तत्काल गड़चांदूर के ग्रामीण अस्पताल पहुंचे तो वहां के चिकित्सक ने संतोष को मृत पाया। यहां भी प्रबंधन की गलत नीति का पर्दाफाश हो गया। बावजूद मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने की अन्य कामगारों की मांग को प्रबंधन द्वारा दरकिनार किये जाने से घटना स्थल एवं अस्पताल परिसर में तनाव का वातावरण निर्माण हुआ। अनहोनि टालने के लिये यहां पुलिस को अपना बंदोबस्त लगाना पड़ा।

२ वर्ष पूर्व ही हुआ था विवाह
नांदाफाटा निवासी संतोष चव्हाण का २ वर्ष पूर्व ही विवाह हुआ था। इस गंभीर हादसे में संतोष की मौत होने के कारण उसका ४ वर्षीय पुत्र अपने पिता का साया खो चुका है। डालमिया कंपनी प्रबंधन के अडियल रवैये के कारण समाचार लिखे जाने तक अन्य कामगारों द्वारा की जा रही मांग को मंजूर नहीं किया गया। आंदोलनकर्ता कामगारों के अनुसार मृतक परिसर के किसी एक सदस्य को स्थानीय नौकरी देने एवं मुआवजे की उचित राशि देने की मांग की गई है। साथ ही कंपनी में सुरक्षा से संबंधित पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने की मांग पर कामगार अड़े हुए हैं। यदि सुरक्षा संसाधनों की कमी नहीं रहती तो संतोष को ७५ फीट ऊंचाई से गिरकर अपनी जान गंवानी नहीं पड़ती। यह प्रतिक्रिया आंदोलनकर्ता कामगारों ने दी है।

डालमिया पर शोषण का आरोप
परिसर के सीमेंट कंपनियों में कार्यरत संगठनों ने डालमिया सीमेंट कंपनी की ओर से कामगारों का शोषण करने, ठेका कामगारों से स्थानीय कामगार व स्कील्ड कामगारों के हिस्से का काम करवाने, सरकार की ओर से तय अनुसार वेतन नहीं देने, बाहरी राज्य के कामगारों को प्राथमिकता देने, ठेका कामगारों को केवल ३०० से ५०० रुपये की मजदूरी देकर ३५ से ४० हजार रुपये वाले कामगारों का कार्य सौंपने, वेतन के अलावा अन्य सुविधाएं नहीं देने, कामगारों को वेज बोर्ड के अनुसार १३५० रुपये मजदूरी व अन्य सुविधाएं देने में कोताही बरतने का आरोप लगाया गया है। अनेक कामगार इस शोषण के खिलाफ डालमिया कंपनी के विरोध में शीघ्र ही आंदोलन करने की तैयारियां कर रहे हैं।