Published On : Wed, Sep 1st, 2021

पावर प्लांट के इलेक्ट्रिक मेन्टेनेन्स मे करोड़ों का भ्रष्टाचार

– प्रतिस्पर्धी फर्म हाईकोर्ट में मामला दायर करेंगे

खापड़खेड़ा/नागपुर- महानिर्मिती पावर प्लांट खापरखेड़ा अंतर्गत इलेक्ट्रिक मेन्टेनेन्स एवं नवीनीकरण के मामले में करोड़ों रुपये करप्शन का पर्दाफाश हुआ है।इससे न सिर्फ स्थानीय जन सामान्य फर्म ठेकेदारों का हक छीना गया बल्कि सरकार को करोडों रुपये का चूना लगाया जा चुका है। इस नियम विरोधी कार्य को अंजाम देने में तत्कालीन मुख्य अभियंता मधुकर रघुनाथ शेलार से लेकर C.E. प्रकाश खंडारे तक की भूमिका अजीबो-गरीब रही है।

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इस संबंध में खापरखेड़ा के भूतपूर्व सरपंच और स्थानीय कान्ट्रक्टर कल्याण असोसिएशन के अध्यक्ष अशोक रामटेके की ओर से महानिर्मिती के वरिष्ठ अधिकारियों सहित महाराष्ट्र शासन को शिकायत का ज्ञापन सौंपा जा चुका है जाहिर है कि इस इलेक्ट्रिक मेन्टेनेन्स के कार्यों में PWD के CSR दर से ६०० गुणा अधिक दर में बढ़ा-चढाकर प्रस्ताव तैयार किया गया। मामले की शिकायत होते ही अधिकारियों को उक्त टेंडर स्थगित करना पडा। अधिकारी आखिर दूसरी निविदा आमंत्रित करने को मजबूर हैं तथा नये टेंडर मे कीमत कम करना पड़ रहा है।

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इस मामले के शिकायतकर्ता भूतपूर्व सरपंच श्री रामटेके का मानना है कि अभी तक इस प्रचंड घोटाला में लिप्त कोई भी सेंक्शन इन्चार्ज और अधिकारी जिम्मेदारी स्वीकार करने को तैयार नहीं है।क्योंकि भ्रष्ट्राचार के कारण सभी अधिकारियों के हाथ बंधे हुए हैं। फिर इस गैरकानूनी षड्यंत्र का जिम्मेदार कौन हैं ?

जिन अफसरों के दिशा-निर्देशों पर अभियंताओं ने यह गैरकानूनी हरकतों का साहस किया है।शिकायत के बाद ई-निविदा को रद्द किया जाना तथा नयी निविदा में कम दर अंकित करना और दोबारा ई-निविदा आमंत्रित किया जाना यह समस्या का समाधान नहीं है। अपितु इसकी संपूर्ण जांच- पड़ताल और दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्यवाई की मांग की गई है। क्योंकि विधुत उपकरण खरीदी तथा फिटिंग कार्यों की कीमत CSR दर के खिलाफ सिद्ध हो चुका है।जिसकी ई- निविदा क्रमांक-३००००१६४०६ है।जिसकी अनुमानित कीमत ८१ लाख,२०हजार ७०७ रुपैया है तथा दूसरा ठेका की निविदा क्रमांक-३००००१४४९५ है और उसकी अनुमति दर रुपये ७९ लाख ४९ हजार है। यह घटना विगत जनवरी से मार्च २०२१ के अंतराल की है। जिसकी लगातार शिकायत पर शिकयतें शुरु है। परन्तु महानिर्मिती प्रशासन के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है।

खापरखेड़ा पावर प्लांट मे व्याप्त चर्चाओं के अनुसार संबंधित ई-निविदा कार्यों का नाम है ‘मेन्टेनेन्स ऑफ लाइटिंग, केबलिंग प्लांट एण्ड कालोनी ‘ है। दूसरा टेंडर कार्यों का नाम है ‘नूतनीकरण आफ स्ट्रीटलाईटिग’ आफ २१० मेगावाट पावर प्लांट है। जिसमें वार्षिक विद्युत लाईन नूतनीकरण एवं दुरुस्तीकरण और रखरखाव का उल्लेख है। बताते हैं कि वार्षिक ठेका कार्यों को ६ महीने में समाप्त कर दिया जाता है।सबूत बतौर संबंधित कार्यों का कार्यादेश क्रमांक:-४५००११२७८१ दिनांक २८जनवरी २०२१ अंकित है।बताते हैं कि कालनी विद्युत सुव्यवस्था के कार्यों को ६ महीने में समाप्त कर दिया गया था दुसरा ठेका आमंत्रित किया गया है जिसका टेंडर नं ३००००१९६८१ दिनांक ११जून २०२१ बताया गया है।

इस संबंध में अन्याय ग्रस्त प्रतिस्पर्धी 3 फर्मो ने न्याय पाने के लिए मुंबई उच्च न्यायालय नागपुर खंडपीठ में याचिका दायर करने की तैयारी शुरु कर दी है। विद्युत केंद्र के अधिकारियों ने जो नियमों का उल्लंघन करके अपने चहेती फर्म को आर्थिक फायदा पहुंचाया तथा महानिर्मिती को करोड़ों का आर्थिक नुक़सान पहुंचाया जा चुका है।श्री रामटेके के मुताबिक अनुभव कुशल स्पर्धी फर्मो को उनके हक और अधिकार वंचित रखा गया।

इतना ही नहीं अधिकारियों ने अपनी चहेती फर्म को बनावटी और फर्जी मेज़रमेंट के जरिए अतिरिक्त बिलों का भी भुगतान किया जा चुका है तथा वार्षिक ई-नविदा के अलावा लघु निविदा (कोटेशन) के कार्यों फायदा भी अपनी चहेती फर्म को पंहुचाया गया है।नतीजतन स्थानीय गरीब और जनसमान्य विद्युत ठेकेदारों को उनके हक और अधिकार से वंचित रहना पडा है।यह एक तरफा मनमानी कारोबर का सिलसिला यहां पिछले १५-२० से चला आ रहा है।ऐसा नहीं है कि प्रकरण की जानकारी खापरखेड़ा पावर प्लांट के अधिकारी अभियंताओं को ही नही बल्कि महानिर्मीती मुख्यालय के विद्युत संचालकों सहित और व्यवस्थापकीय संचालकों को भी भली-भांति ज्ञात है। परन्तु इस मामले में कार्रवाई नहीं क्या जाना संदेहास्पद माना जा रहा है।

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